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इंसाफ की आखिरी पुकार? यौन उत्पीड़न के बाद बालासोर में छात्रा का आत्मदाह

इंसाफ की आखिरी पुकार? यौन उत्पीड़न के बाद बालासोर में छात्रा का आत्मदाह
इंसाफ की आखिरी पुकार? यौन उत्पीड़न के बाद बालासोर में छात्रा का आत्मदाह

बड़े दुखद और संवेदनशील मामले में, 20 वर्षीय एक कॉलेज छात्रा ने अपने ही कॉलेज परिसरों में आत्मदाह कर लिया। इसका मुख्य कारण था, अपने एक प्रोफ़ेसर द्वारा मांगे गए यौन संबंधों के खिलाफ शिकायत करने के बावजूद, कॉलेज प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

क्या कुछ हुआ?

  • छात्रा ने 30 जून 2025 को कॉलेज के प्राचार्य को अपनी शिकायत दी, जिसमें उसके HoD (विभाग प्रमुख) द्वारा यौन उत्पीड़न और गढ़ी-फर्ज़ी ‘क्विड प्रो क़्वो’ (फेवर में बदलाव की धमकी) करने का आरोप लगाया था।

इसके बाद 1 जुलाई को ICC (Internal Complaints Committee) का गठन किया गया, लेकिन 12 जुलाई को समिति ने आरोपी को क्लीन चिट दी। इसकी रिपोर्ट प्राचार्य तक पहुंची, उसके बाद छात्रा को बुलाया गया। फिर उसने कैंपस में आत्मदाह कर लिया।

गंभीर रूप से घायल छात्रा को रांची के AIIMS में भर्ती कराया गया। 14 जुलाई की रात को उसकी मृत्यु हो गई।

अन्य प्रतिक्रियाएँ और कार्रवाई

पुलिस ने प्रोफ़ेसर व प्राचार्य दोनों के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आत्महत्या के लिए उकसाने और धमकी सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया। प्रोफ़ेसर को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया, प्राचार्य को दो दिन बाद।

छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि “प्राचार्य ने उसे शिकायत वापस लेने का दबाव डाला; ICC की निष्पक्ष जांच नहीं हुई”, और उन्होंने राजनीतिक साज़िश और हत्या की जांच की मांग की।

  • Odisha पुलिस ICC सदस्यों की भूमिका भी जांच रही है, क्योंकि रिपोर्ट उन्हें क्लीन चिट देती दिखती है।
  • UGC ने 4 सदस्यीय fact‑finding committee बनाई है, जो घटना की जाँच कर संभावित सुधार की सिफारिश करेगी।

सोशल और मेडिकल प्रतिक्रिया

  • जैसे ही इस घटना का पता चला, कई मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जवाहरात की, इनके अनुसार ऐसे हादसों को रोकने के लिए कॉलेजों में काउंसलिंग, हेल्पलाइन और विश्वास-योग्य ICC की आवश्यकता है।

विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इंसाफ की गुहार लगाई।

Odisha के गवर्नर और सांसदों ने रिपोर्ट मांगी और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही।

यह दर्दनाक घटना इसलिए भी गहरा असर छोड़ती है क्योंकि छात्रा ने समय से पहले मदद मांगने के बावजूद कोई समाधान नहीं पाया। इसने कॉलेजों में यौन उत्पीड़न और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में मौलिक खामियों को उजागर किया है।

आगामी जांच—Police + ICC + UGC—से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और छात्राओं को व्यापक सुरक्षा मिल सके।


Digikhabar Team
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