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Uniform Civil Code के बाद उत्तराखंड में क्या बदल रहा है?

देश का पहला UCC राज्य बनने के बाद बदलीं कई कानूनी व्यवस्थाएँ, जानिए आम लोगों पर इसका क्या होगा असर?

एक राज्य एक समान नागरिक कानून।”

उत्तराखंड ने जब Uniform Civil Code (UCC) लागू किया, तो यह केवल एक नया कानून नहीं था, बल्कि भारत की संवैधानिक बहस के सबसे चर्चित विषयों में से एक को जमीन पर उतारने की ऐतिहासिक पहल भी थी। स्वतंत्र भारत में उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बना, जहाँ विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे कई नागरिक मामलों में धर्म-आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान कानूनी व्यवस्था लागू की गई।

लेकिन सवाल यह है कि UCC लागू होने के बाद वास्तव में क्या बदला है? क्या यह बदलाव केवल कानूनी किताबों तक सीमित है या आम नागरिकों के जीवन पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है?

आइए विस्तार से समझते हैं।

सबसे पहले समझिए, Uniform Civil Code क्या है?

Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता) का अर्थ है – ऐसी व्यवस्था जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेना और परिवार से जुड़े नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि यह नीति-निर्देशक तत्त्व (Directive Principle) है, इसलिए इसे लागू करना राज्यों या केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करता है।

 

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद क्या बदला?

सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य

अब उत्तराखंड में विवाह का पंजीकरण (Registration) सभी समुदायों के लिए अनिवार्य है।

इसका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों के कानूनी अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

ऑनलाइन विवाह पंजीकरण की सुविधा शुरू होने से पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी हुई है।

बेटा-बेटी को उत्तराधिकार में समान अधिकार

UCC के तहत उत्तराधिकार (Inheritance) के मामलों में लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त करने की दिशा में समान नियम लागू किए गए हैं।

इसका उद्देश्य संपत्ति के अधिकारों में महिलाओं को बराबरी देना और उत्तराधिकार संबंधी विवादों को कम करना है।

बहुविवाह (Polygamy) पर समान नियम

समान नागरिक संहिता के तहत एक समय में एक ही वैध विवाह की व्यवस्था लागू की गई है।

इससे विवाह संबंधी कानून सभी नागरिकों के लिए एक समान बनाने का प्रयास किया गया है।

लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी ढांचे में लाया गया

उत्तराखंड के UCC का सबसे चर्चित प्रावधान Live-in Relationship को लेकर है।

कानून के तहत लिव-इन संबंधों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। साथ ही ऐसे संबंधों से जुड़े कुछ अधिकारों और कानूनी जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य विवाद की स्थिति में संबंधित पक्षों और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना बताया गया है।

 

तलाक और भरण-पोषण के लिए समान व्यवस्था

अब तलाक और भरण-पोषण (Maintenance) से जुड़े कई मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी आधार उपलब्ध कराया गया है।

सरकार का तर्क है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और समान होगी।

डिजिटल व्यवस्था से प्रक्रिया हुई आसान

UCC लागू होने के बाद उत्तराखंड सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहाँ विवाह पंजीकरण सहित कई प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकती हैं।

इससे नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ते हैं और रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है।

क्या अनुसूचित जनजातियों (STs) पर भी लागू है UCC?

नहीं।

उत्तराखंड का UCC अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) पर लागू नहीं होता। वे अपने पारंपरिक और प्रथागत कानूनों के अनुसार ही व्यक्तिगत मामलों का संचालन जारी रख सकते हैं।

सरकार क्या कहती है?

उत्तराखंड सरकार के अनुसार, UCC का उद्देश्य-

  • महिलाओं को समान अधिकार देना
  • नागरिक कानूनों में एकरूपता लाना
  • पारदर्शिता बढ़ाना
  • कानूनी विवाद कम करना
  • प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

 

विरोध और बहस भी जारी है

जहाँ सरकार इसे समानता और लैंगिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कुछ सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और विपक्षी दलों ने इसकी कुछ धाराओं- विशेषकर लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और निजता (Privacy) से जुड़े प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की है। इन प्रावधानों को लेकर न्यायालय में भी चुनौतियाँ दी गई हैं और कुछ मामलों की सुनवाई जारी है।

क्या उत्तराखंड पूरे देश के लिए मॉडल बनेगा?

उत्तराखंड UCC लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है। इसके बाद अन्य राज्यों में भी इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। इसलिए उत्तराखंड का अनुभव भविष्य में अन्य राज्यों की नीतियों के लिए महत्त्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में लागू Uniform Civil Code केवल एक नया कानून नहीं, बल्कि नागरिक जीवन से जुड़े कई नियमों में व्यापक बदलाव का प्रयास है। विवाह पंजीकरण से लेकर उत्तराधिकार, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप तक अनेक क्षेत्रों में एक समान कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।

इसके समर्थक इसे समानता, पारदर्शिता और महिला अधिकारों की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम मानते हैं, जबकि आलोचक कुछ प्रावधानों पर निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सवाल उठाते हैं। इसलिए UCC का वास्तविक प्रभाव आने वाले वर्षों में इसके क्रियान्वयन, न्यायिक व्याख्याओं और सामाजिक स्वीकार्यता से तय होगा।

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