टोक्यो में रहने वाली एक भारतीय महिला ने सोमवार शाम जापान में आए 7.6 तीव्रता के भूकंप के दौरान अपने डरावने अनुभव साझा किए हैं।
एक वीडियो में उन्होंने हिंदी में कहा, “इतना तेज भूकंप था कि मेरी तो जान ही निकल गई थी, क्योंकि वह रुक ही नहीं रहा था।” उन्होंने बाद में अपने रिहायशी परिसर को भी दिखाया और बताया कि वहां का कोई भी निवासी बाहर नहीं निकला। उनके अनुसार, जापान के लोगों को अपनी इमारतों की मजबूती पर पूरा भरोसा है और वे मानते हैं कि तेज भूकंप के दौरान भी इमारतें उन्हें सुरक्षित रखेंगी।
उत्तरी जापान में पहुंचीं सुनामी की लहरें
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने पुष्टि की है कि भूकंप के बाद उत्तरी जापान के कई इलाकों में सुनामी की लहरें पहुंचीं।
होक्काइडो के उराकावा शहर और आओमोरी के मुत्सु ओगावारा बंदरगाह पर सुनामी की लहरें दर्ज की गईं।
इवाते प्रांत के कुजी बंदरगाह पर 50 सेंटीमीटर ऊंची लहर पहुंची, जबकि कई अन्य तटीय इलाकों में 40 से 50 सेंटीमीटर तक की लहरें देखी गईं।
इससे पहले अधिकारियों ने चेतावनी जारी की थी कि उत्तर-पूर्वी तट पर तीन मीटर तक ऊंची लहरें पहुंच सकती हैं। यह चेतावनी होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रांतों के लिए जारी की गई थी, जहां भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
कई लोग घायल
स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में कई लोग घायल हुए हैं।
सरकारी प्रसारक संस्थानों ने बताया कि आओमोरी प्रांत के हाचिनोहे शहर के एक होटल में कई लोग घायल हो गए।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप भारतीय समयानुसार रात में आया और इसकी गहराई लगभग 53.1 किलोमीटर थी। इसका केंद्र उत्तरी जापान के मिसावा शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित था।
भूकंप के झटके जापान के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में व्यापक रूप से महसूस किए गए, जिसके बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी अलर्ट जारी किया गया।
सरकार ने बनाई आपातकालीन टीम
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने नुकसान का आकलन करने और राहत कार्यों की निगरानी के लिए एक आपातकालीन टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
सावधानी के तौर पर ईस्ट जापान रेलवे ने कई ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं।
भूकंप के लिए संवेदनशील है जापान
जापान प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत बड़े भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण जापान में भूकंप से निपटने के लिए व्यापक तैयारी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। जुलाई में रूस के कामचटका क्षेत्र में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप के बाद भी कई देशों में सुनामी की लहरें देखी गई थीं।
2011 में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी से मिली सीख के आधार पर जापान आज भी उच्च स्तर की सतर्कता बनाए हुए है।












