UPI Charges: क्या ₹2,000 से ज्यादा की UPI Payment करने पर अब आपकी जेब से भी पैसे कटेंगे? सोशल मीडिया पर इस तरह के कई दावे सामने आ रहे हैं। जानिए ₹2,000 की लिमिट का असली मतलब क्या है और नए UPI framework में ग्राहक और दुकानदार पर इसका क्या असर पड़ेगा।
भारत में UPI आज डिजिटल पेमेंट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले माध्यमों में शामिल है। चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, लोग कुछ सेकंड में QR Code स्कैन करके भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में UPI Charges को लेकर सामने आने वाली किसी भी खबर का सीधा असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि ₹2,000 से ज्यादा की UPI Payment करने पर ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। लेकिन असल नियम इससे अलग है।
₹2,000 की लिमिट का क्या मतलब है?
सबसे पहले UPI के दो प्रमुख तरह के transactions को समझना जरूरी है।
P2P यानी Person-to-Person Payment में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजता है। उदाहरण के लिए आपने अपने दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को ₹5,000 भेजे।
वहीं P2M यानी Person-to-Merchant Payment में ग्राहक किसी दुकानदार या कारोबारी को UPI के जरिए भुगतान करता है।
15 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी P2P UPI transactions राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेंगे। यानी आप किसी व्यक्ति को ₹500 भेजें या ₹50,000, उस transaction पर ग्राहक से UPI transaction fee नहीं ली जाएगी।
दूसरी ओर, ₹2,000 तक के merchant payments भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत P2M transactions प्रभावित नहीं होंगे।
फिर ₹2,000 से ऊपर क्या होगा?
नए framework के तहत ₹2,000 से ऊपर के कुछ specified P2M transactions पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से लिया जाने वाला UPI transaction charge नहीं है। यह merchant payment ecosystem से जुड़ा charge है, जिसे payment system में शामिल अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटा जाता है।
निर्धारित merchant transactions में ₹2,000 से ऊपर की payment पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के transactions के लिए MDR को प्रति transaction ₹300 तक सीमित किया गया है। वहीं कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग flat MDR व्यवस्था रखी गई है।
क्या ₹5,000 की UPI Payment पर ग्राहक के खाते से पैसे कटेंगे?
नहीं।
अगर आपने किसी दुकान पर ₹5,000 का सामान खरीदा और UPI से ₹5,000 का भुगतान किया, तो सिर्फ इसलिए कि payment ₹2,000 से ज्यादा है, आपके बैंक खाते से अपने आप कोई अतिरिक्त MDR नहीं काटा जाएगा।
सरकार ने साफ किया है कि MDR ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा और बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि merchant-side MDR को ग्राहकों पर pass on न किया जाए। UPI apps को भी platform fee या hidden charges लगाने की अनुमति नहीं है।
क्या दोस्त को ₹5,000 भेजने पर भी charge लगेगा?
यहां भी जवाब साफ है—नहीं।
अगर आपने अपने दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को ₹5,000 UPI से भेजे हैं, तो यह P2P transaction है। नए framework में P2P transactions किसी भी amount पर free रहेंगे।
इसलिए केवल payment की रकम देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई MDR लागू होगा या नहीं। यह भी देखना होगा कि payment किसे की जा रही है और transaction किस category में आता है।
GST को लेकर भी है भ्रम
₹2,000 से ज्यादा की UPI payment पर GST लगाए जाने की खबर पहले भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है।
अप्रैल 2025 में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI transactions पर GST लगाने का सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि GST payment से जुड़े कुछ charges, जैसे MDR, पर लागू हो सकता है; इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक की ₹5,000 की UPI payment पर सीधे GST लगा दिया जाएगा।
क्यों जरूरी पड़ी MDR की व्यवस्था?
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके पीछे का payment infrastructure भी लगातार विस्तार कर रहा है। बैंक, payment service providers और fintech कंपनियां transaction processing, security और infrastructure पर खर्च करती हैं।
सरकार ने नए framework को UPI ecosystem की long-term sustainability और infrastructure को मजबूत करने से जोड़कर बताया है। साथ ही, छोटे merchants और आम users को अतिरिक्त लागत से बचाने के लिए कई transactions को zero-MDR framework में रखा गया है।
आसान उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आपने—
- ₹800 किसी दुकान पर UPI से दिए — ग्राहक से कोई UPI MDR charge नहीं।
- ₹1,800 की shopping की — ग्राहक से कोई UPI MDR charge नहीं।
- ₹5,000 किसी दोस्त को भेजे — P2P transaction है, free।
- ₹5,000 किसी specified merchant को दिए — merchant-side MDR framework लागू हो सकता है, लेकिन ग्राहक से MDR नहीं लिया जाना है।
यानी ₹2,000 कोई ऐसी सीमा नहीं है जिसके पार जाते ही आपके बैंक खाते से UPI charge अपने आप कटने लगे।
UPI Users के लिए क्या बदला?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम UPI user के लिए payment experience को free रखने की व्यवस्था जारी है।
सरकार के मुताबिक P2P transactions पूरी तरह free रहेंगे और ₹2,000 तक के merchant transactions भी free रहेंगे। वहीं लगभग 96 प्रतिशत merchant transactions zero-MDR framework में रहेंगे।
इसलिए अगर सोशल मीडिया पर आपको यह message मिलता है कि—
“₹2,000 से ऊपर UPI Payment करते ही आपके बैंक खाते से charge कट जाएगा”
तो इसे सही नहीं माना जाना चाहिए।
असल मामला merchant-side MDR framework का है, न कि हर UPI user पर सीधे charge लगाने का।
निष्कर्ष
तो अगर आप ₹3,000, ₹5,000 या ₹10,000 की UPI payment करते हैं, तो केवल payment amount ₹2,000 से ज्यादा होने के कारण आपके खाते से अपने आप कोई UPI fee नहीं कटेगी।
P2P payment किसी भी amount पर free है और ग्राहकों से MDR वसूलने की व्यवस्था नहीं है। ₹2,000 से ऊपर के कुछ merchant transactions पर MDR लागू हो सकता है, लेकिन यह merchant-side payment ecosystem का charge है।
इसलिए अगली बार UPI Charges को लेकर कोई message या social media post सामने आए, तो सिर्फ ₹2,000 की रकम देखकर घबराने के बजाय यह जरूर देखें कि payment P2P है या P2M और charge किस पर लागू हो रहा है।












