नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में गुरुवार को भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनकी असहमति वाली टिप्पणियों (डिसेंट नोट्स) को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने लोकसभा से वॉकआउट कर दिया।
‘चंद घंटों में 655 पन्नों की रिपोर्ट कैसे पढ़ें?’
लोकसभा में रिपोर्ट पेश होने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा,
“655 पन्नों की रिपोर्ट पढ़ने के लिए हमें सिर्फ एक रात दी गई। हमें अपने विरोध दर्ज कराने का भी पर्याप्त समय नहीं मिला। अगर आप मीटिंग्स के मिनट्स देखेंगे तो पाएंगे कि क्लॉज-बाय-क्लॉज चर्चा नहीं हुई। यह बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसे दरकिनार कर दिया गया। अध्यक्ष किसके प्रभाव में काम कर रहे हैं? इसके विरोध में हमने वॉकआउट किया।”
संजय सिंह का BJP पर बड़ा आरोप
समिति के सदस्य और आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,
“यह बेहद निराशाजनक है कि विपक्ष की असहमति वाली टिप्पणियों को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। यह सिर्फ शुरुआत है, आगे वे गुरुद्वारों, मंदिरों और चर्चों की जमीनों को भी हड़पने का कानून लाएंगे और अपने पूंजीपति दोस्तों को सौंप देंगे।”
राज्यसभा में भी हंगामा, AIMIM सांसद ओवैसी ने दी सफाई
इससे पहले राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि उनके डिसेंट नोट्स को JPC रिपोर्ट से हटा दिया गया।
हालांकि, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि केवल वे पैराग्राफ हटाए गए, जो समिति के कामकाज पर संदेह जताते थे।
उन्होंने कहा,
“हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें बताया कि हमारी असहमति वाली टिप्पणियों के कई पन्ने रिपोर्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने हमें आश्वासन दिया और सचिव-जनरल को नियमों के तहत संभव होने वाली बातें जोड़ने के निर्देश दिए। इसके बाद हमने संसदीय पुस्तकालय में बैठकर अधिकतर हटाए गए पृष्ठों को रिपोर्ट में शामिल किया।”
लोकसभा स्थगित
बाद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विधेयक पेश किया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 10 मार्च तक स्थगित कर दी गई। संसद का बजट सत्र 4 अप्रैल 2025 तक जारी रहेगा।
क्या है वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024?
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की डिजिटल रिकॉर्डिंग, ऑडिट को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध रूप से कब्जाई गई संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी उपाय लागू करना है।
अगला कदम क्या होगा?
अब सभी की निगाहें बजट सत्र के दूसरे चरण पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक पर विस्तृत बहस और संभावित मतदान होगा। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वे इस बिल को लेकर सरकार को आसानी से नहीं छोड़ेंगे।