Arvind Kejriwal Granted Bail: दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को दी जमानत, रखी कुछ महत्वपूर्ण शर्तें

Arvind Kejriwal Granted Bail: दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को दी जमानत, रखी कुछ महत्वपूर्ण शर्तें

Arvind Kejriwal Granted Bail: दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को दी जमानत, रखी कुछ महत्वपूर्ण शर्तें

दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी है। आप नेता मनीष सिसोदिया और बीआरएस नेता के कविता की जमानत के बाद केजरीवाल इस मामले में कानूनी राहत पाने वाले तीसरे व्यक्ति हैं।

हालांकि, कोर्ट ने जमानत पर कुछ खास शर्तें लगाई हैं:

– केजरीवाल को जब भी बुलाया जाएगा, उन्हें ट्रायल कोर्ट में पेश होना होगा और उन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामलों में तय की गई शर्तों का पालन करना होगा।

– उन्हें मामले की मेरिट के बारे में कोई भी सार्वजनिक बयान देने से मना किया गया है।

– वे सीएम या दिल्ली सचिवालय के दफ्तर नहीं जा सकते।

– वे किसी भी आधिकारिक फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और गवाहों से बातचीत नहीं करेंगे या मामले से जुड़ी किसी भी फाइल तक उनकी पहुंच नहीं होगी

– ट्रायल कोर्ट के साथ पूरा सहयोग अनिवार्य है।

कोर्ट के फैसले में केजरीवाल की गिरफ्तारी और उसके बाद जमानत आवेदन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कार्यवाही के दौरान तीन मुख्य प्रश्नों की जांच की:

1. गिरफ्तारी की वैधता: न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध थी, तथा इसमें गिरफ्तारी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले कानून की धारा 41(3) का कोई उल्लंघन नहीं पाया गया।

2. नियमित जमानत की आवश्यकता: न्यायाधीश ने केजरीवाल के खिलाफ आरोपों के निहितार्थों को ध्यान में रखते हुए यह आकलन किया कि क्या उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए।

3. आरोपपत्र का महत्व: न्यायालय ने इस बात पर भी विचार-विमर्श किया कि क्या कई आरोपपत्र दाखिल करने से परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आया है, जिसके कारण मामले को ट्रायल कोर्ट में वापस भेजा जाना चाहिए।

फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने केजरीवाल की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर लंबे समय तक हिरासत में रहने के संभावित प्रभावों पर चिंता व्यक्त की, तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए न्यायालय की सामान्य प्राथमिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2022 में एफआईआर दर्ज करने के बाद शुरू किया गया मुकदमा, मामले की जटिलता के कारण काफी समय तक चलने की उम्मीद है, जिसमें चार आरोपपत्र और कुल 424 गवाह शामिल हैं।

अदालत के इस आकलन ने जमानत के निर्णय को प्रभावित किया कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ से जुड़े जोखिम न्यूनतम थे, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि केजरीवाल जमानत के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा करते हैं।

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