
नई दिल्ली: मशहूर यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया उर्फ बीयरबाइसेप्स द्वारा यूट्यूब शो में दिए गए विवादित बयान के मामले में दर्ज FIR को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करेगा।
न्यायमूर्ति सूर्या कांत और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ इस मामले को सुनेगी। रणवीर अल्लाहबादिया के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की अपील की थी, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने बेंच का गठन किया।
इतनी जल्दबाजी क्यों?
यह मामला कॉमेडियन समय रैना के यूट्यूब शो “इंडियाज़ गॉट लेटेंट” में रणवीर अल्लाहबादिया द्वारा दिए गए एक बयान से जुड़ा है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई।
मामले को तूल पकड़ता देख समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया दोनों ने माफी मांग ली है।
समय रैना ने कहा:
“मेरी मंशा सिर्फ लोगों को हंसाने और अच्छा समय बिताने की थी, लेकिन यह सब मेरे लिए बहुत भारी पड़ गया। मैंने अपने चैनल से ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के सभी वीडियो हटा दिए हैं और जांच में पूरा सहयोग करूंगा।”
रणवीर अल्लाहबादिया ने भी अपनी टिप्पणी को “अप्रासंगिक और हास्यपूर्ण न होने” की बात स्वीकारते हुए कहा:
“कॉमेडी मेरा क्षेत्र नहीं है, मैं सिर्फ माफी मांगने आया हूं।”
NCW और महाराष्ट्र साइबर सेल ने भेजा समन
इस विवाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी हस्तक्षेप किया है और रणवीर अल्लाहबादिया, समय रैना सहित अन्य लोगों को समन भेजा है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र साइबर सेल ने भी इस मामले में रणवीर और समय को 24 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है।
महाराष्ट्र साइबर सेल के आईजी यशस्वी यादव ने जानकारी दी कि इस मामले में 42 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है, जिनमें कई कलाकार और डिजिटल इन्फ्लुएंसर भी शामिल हैं।
रणवीर ने धमकियों का दिया हवाला
रणवीर अल्लाहबादिया ने कोर्ट से अपील की थी कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, इसलिए सुनवाई को आगे बढ़ाया जाए। अदालत ने उनकी अपील को स्वीकार करते हुए सुनवाई की नई तारीख 6 मार्च तय की है।
और कौन है जांच में
इस मामले की जांच अब सिर्फ रणवीर अल्लाहबादिया और समय रैना तक सीमित नहीं रही। अशिष चंचलानी, जसप्रीत सिंह और अपूर्वा मुखिजा जैसे अन्य डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है।
विदेश में मौजूद लोगों के चलते जांच में देरी
मुंबई और गुवाहाटी पुलिस के संयुक्त बयान के अनुसार, रणवीर और समय अभी तक जांच एजेंसियों के संपर्क में नहीं आए हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य आरोपी देश से बाहर होने के कारण भी जांच प्रक्रिया में देरी हो रही है।
अब देखने वाली बात होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कोई नई कानूनी गाइडलाइन जारी होती है।











