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वेनेजुएला कनेक्शन के आरोप में अमेरिका ने रूसी ध्वज वाला तेल टैंकर जब्त किया, 3 भारतीय चालक दल में शामिल

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने वेनेजुएला से कथित संबंधों के चलते एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त किया है, जिसमें कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे। इनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। इस टैंकर को अमेरिकी सेना ने कैरिबियन सागर से पीछा करने के बाद उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने नियंत्रण में लिया।

कैरिबियन से उत्तरी अटलांटिक तक चला पीछा

रूस टुडे (RT) के मुताबिक, रूस के परिवहन मंत्रालय ने बताया कि ‘मरीनरा’ नामक इस टैंकर को अमेरिकी नौसेना बलों ने रोका। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था, जिस वजह से यह कार्रवाई की गई।

पहले था नाम ‘बेला 1’, झंडा भी बदला गया

आरटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह जहाज पहले एक निजी व्यापारी द्वारा किराए पर लिया गया था और इसका पुराना नाम ‘बेला 1’ था। उस समय यह गुयाना के ध्वज के तहत संचालित हो रहा था। कार्रवाई से बचने के लिए जहाज ने न केवल अपना नाम बदला बल्कि झंडा भी बदल दिया।

चालक दल में कई देशों के नागरिक

जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इनमें 17 यूक्रेन, 6 जॉर्जिया, 3 भारत और 2 रूस के नागरिक शामिल थे।

अमेरिकी नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश का आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई तब की गई जब टैंकर ने प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर लागू अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की और अमेरिकी तटरक्षक बल द्वारा जहाज पर चढ़ने के प्रयासों को भी विफल कर दिया। इस अभियान को अमेरिकी तटरक्षक बल और सेना ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।

हाल के वर्षों में पहली बार रूसी ध्वज वाले जहाज की जब्ती

रॉयटर्स के अनुसार, यह हालिया समय में पहला मामला है जब अमेरिकी सेना ने किसी रूसी ध्वज वाले जहाज को जब्त किया है। यह घटना वेनेजुएला में अमेरिकी विशेष बलों की गतिविधियों के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है।

रूस ने बताया ‘समुद्री डकैती’

रूस की सत्तारूढ़ यूनाइटेड रूस पार्टी के वरिष्ठ सांसद आंद्रेई क्लिशास ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘खुला समुद्री डकैती का कृत्य’ बताया। रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा जहाज पर चढ़ने के बाद उनका टैंकर से संपर्क टूट गया।

हेलीकॉप्टर से निगरानी की तस्वीरें आईं सामने

आरटी ने एक तस्वीर जारी की है, जिसमें एक हेलीकॉप्टर जहाज के ऊपर मंडराता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह अमेरिकी बलों द्वारा जहाज पर कब्जा करने की कोशिश का हिस्सा था।

अमेरिका का दावा: दो प्रतिबंधित टैंकर किए जब्त

अमेरिका ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने उत्तरी अटलांटिक और कैरिबियन क्षेत्र में वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त किया है। इनमें से एक टैंकर ‘बेला 1’ था, जिसने बाद में अपना नाम बदलकर ‘मरीनरा’ रख लिया था।

‘डार्क फ्लीट’ से जुड़े जहाजों पर कार्रवाई

अमेरिकी दक्षिणी कमान ने बताया कि पनामा के झंडे वाला टैंकर ‘एम सोफिया’ भी प्रतिबंधों के दायरे में आता है और इसे ‘राज्यविहीन डार्क फ्लीट मोटर टैंकर’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

गृह सुरक्षा सचिव ने दी कार्रवाई की जानकारी

अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों जहाज या तो हाल ही में वेनेजुएला में रुके थे या वहां जाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि तटरक्षक बल ने दोनों ‘घोस्ट फ्लीट’ टैंकरों पर सुनियोजित तलाशी अभियान चलाया।

ब्रिटेन ने भी की अमेरिकी कार्रवाई की पुष्टि

ब्रिटेन ने कहा है कि रूसी ध्वज वाले टैंकर बेला 1 को जब्त करने की कार्रवाई में उसने अमेरिका को सहयोग प्रदान किया था।

Anil Agarwal Son Death: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन के बेटे का न्यूयॉर्क में निधन, जानिए अग्निवेश अग्रवाल की पूरी कहानी

Anil Agarwal Son Agnivesh Agarwal Death:

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल के निधन की खबर से कॉर्पोरेट जगत में शोक की लहर है। 49 वर्षीय अग्निवेश का 7 जनवरी को न्यूयॉर्क में कार्डियक अरेस्ट के चलते निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, वह स्कीइंग के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

इस दुखद घटना के बाद अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे पीड़ादायक दिन है। उन्होंने कहा कि पिता द्वारा बेटे की अर्थी को कंधा देना सबसे बड़ा दुख होता है। साथ ही उन्होंने अपने बेटे के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प भी लिया।

Who Is Agnivesh Agarwal | अग्निवेश अग्रवाल कौन थे?

अग्निवेश अग्रवाल, वेदांता ग्रुप के संस्थापक अनिल अग्रवाल और किरण अग्रवाल के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। कम उम्र में ही उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय में सक्रिय भूमिका निभाई और कंपनी के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कॉर्पोरेट जगत में बनाई खास पहचान

अग्निवेश अग्रवाल एक सफल उद्योगपति थे और उन्हें कॉर्पोरेट सेक्टर में लगभग 20 वर्षों का अनुभव था। 27 अप्रैल 2019 को उन्होंने टीएसपीएल में निदेशक और चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाला। इसके अलावा, फुजैराह गोल्ड की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही, जहां वे चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन भी रह चुके थे और पंजाब की प्रमुख ग्रीनफील्ड थर्मल पावर परियोजनाओं में से एक की निगरानी भी उन्होंने की थी।

खेल, संगीत और नेतृत्व में भी आगे

बिजनेस के साथ-साथ अग्निवेश अग्रवाल बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक एथलीट, संगीत प्रेमी और कुशल लीडर थे। अनिल अग्रवाल के अनुसार, उनके बेटे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी देशभक्ति थी। वे आत्मनिर्भर भारत के विचार को पूरी मजबूती से समर्थन देते थे।

दिल्ली: तुर्कमान गेट पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद हालात सामान्य, सुरक्षा कड़ी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास मंगलवार रात दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा अवैध निर्माण हटाने के लिए बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। प्रशासन के मुताबिक, इस ऑपरेशन में 30 से अधिक बुलडोजर तैनात किए गए थे।

कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया, जो बाद में हिंसक हो गया। इस बीच कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की, जिसके जवाब में पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस झड़प में चार से पांच पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आने की जानकारी सामने आई है।

MCD अधिकारियों ने बताया कि तोड़फोड़ अभियान रात करीब 1 बजे शुरू हुआ। फिलहाल इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पत्थरबाजी के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और CCTV फुटेज व बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी जारी रही कार्रवाई

इस कार्रवाई को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इससे एक दिन पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने मस्जिद सैयद इलाही की मैनेजमेंट कमेटी की याचिका पर नोटिस जारी किया था। याचिका में MCD के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें रामलीला मैदान से सटी मस्जिद और कब्रिस्तान की ज़मीन से कथित अतिक्रमण हटाने की बात कही गई थी। नोटिस जारी होने के बावजूद रात में बुलडोजर कार्रवाई जारी रही।

MCD के अनुसार, हटाए गए अतिक्रमण में सड़क का हिस्सा, फुटपाथ, कम्युनिटी हॉल, पार्किंग एरिया और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल था।

पुलिस का पक्ष

सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने बताया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर पत्थर फेंककर अभियान को बाधित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीमित और आवश्यक बल का प्रयोग किया गया, जिससे हालात को बिगड़ने से रोका जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि कार्रवाई से पहले शांति बनाए रखने के उद्देश्य से स्थानीय लोगों के साथ कई समन्वय बैठकें की गई थीं और एहतियाती कदम पहले ही उठाए गए थे।

हाई कोर्ट का पुराना आदेश बना आधार

MCD का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच के 12 नवंबर 2025 के आदेश के तहत की गई है। इस आदेश में सिविक बॉडी और PWD को तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान की करीब 38,940 वर्ग फुट ज़मीन से अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।

यह आदेश ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित हुआ था। इससे पहले अक्टूबर 2025 में किए गए संयुक्त सर्वे में यह सामने आया था कि उक्त ज़मीन पर MCD, PWD और L&DO की भूमि पर अतिक्रमण मौजूद है।

वहीं, मस्जिद सैयद इलाही मैनेजमेंट कमेटी ने MCD के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए दावा किया है कि यह भूमि वक्फ बोर्ड से लीज पर ली गई है और वक्फ अधिनियम के तहत अधिसूचित संपत्ति है, जिस पर किसी भी विवाद का अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल को है।

बांग्लादेश में शर्मनाक घटना: हिंदू विधवा महिला से मारपीट, पेड़ से बांधा और बाल काटे; आरोपी गिरफ्तार

बांग्लादेश में हिंदू विधवा महिला के साथ क्रूरता: पेड़ से बांधा, मारपीट की और बाल काटे; दो आरोपी गिरफ्तार
बांग्लादेश के झेनैदाह जिले से एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक घटना सामने आई है। यहां एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट, यौन उत्पीड़न और सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया गया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना शनिवार रात झेनैदाह के कालिगंज नगर क्षेत्र में हुई।

लंबे समय से कर रहा था परेशान

बताया जा रहा है कि पीड़िता ने कुछ वर्ष पहले आरोपी शाहीन और उसके भाई से करीब 20 लाख टका में एक दो-मंजिला मकान और जमीन खरीदी थी। इसके बाद से शाहीन कथित तौर पर महिला को परेशान करने लगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला द्वारा उसके प्रस्तावों को ठुकराने के बाद भी वह लगातार उसे डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। यह उत्पीड़न पिछले ढाई साल से जारी था।

रात में कथित हमला

आरोप है कि घटना वाली रात शाहीन और उसके साथी ने महिला का अपहरण कर लिया। इसके बाद उसके साथ गंभीर मारपीट की गई और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। हमले के दौरान महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और बेहोश हो गई।

बाद में स्थानीय लोगों ने उसे घायल अवस्था में देखा और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में हुआ इलाज

झेनैदाह सदर अस्पताल में महिला का इलाज किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआत में पीड़िता सदमे और डर के कारण पूरी घटना बताने से हिचकिचा रही थी।

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि जांच में महिला के साथ गंभीर शारीरिक हिंसा होने के संकेत मिले।

शिकायत के बाद कार्रवाई

स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद महिला ने कालिगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में शाहीन और उसके एक सहयोगी को नामजद किया गया।

झेनैदाह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Bilal Hossain ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और विस्तृत जांच जारी है।

पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के तुरंत बाद दोनों आरोपियों को कालिगंज क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।

लोगों में नाराजगी

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। कई लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत कदम उठाने की मांग की है।

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

IND U-19 vs SA U-19: दूसरे यूथ ODI में भारत की नजर सीरीज में बढ़त पर

बेनोंनी: भारत अंडर-19 और दक्षिण अफ्रीका अंडर-19 के बीच तीन मैचों की यूथ वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला सोमवार को Willowmoore Park में खेला जाएगा।

Vaibhav Suryavanshi की कप्तानी वाली भारतीय टीम पहले मैच में 25 रन की जीत दर्ज करने के बाद आत्मविश्वास से भरी हुई है। वहीं, Muhammed Bulbulia की अगुवाई वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम सीरीज बराबर करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

मैच की जानकारी

  • मुकाबला: भारत अंडर-19 बनाम दक्षिण अफ्रीका अंडर-19, दूसरा यूथ ODI
  • तारीख: 5 जनवरी 2026
  • स्थान: Willowmoore Park
  • मैच शुरू: दोपहर 1:30 बजे (भारतीय समयानुसार)
  • टॉस: दोपहर 1:00 बजे

संभावित भारतीय प्लेइंग इलेवन

  • एरॉन जॉर्ज
  • वैभव सूर्यवंशी (कप्तान)
  • वेदांत त्रिवेदी
  • अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर)
  • हरवंश पंगलिया
  • आर.एस. अम्बरीश
  • कनिष्क चौहान
  • मोहम्मद इनान
  • खिलान पटेल
  • दीपेश देवेंद्रन
  • हेनिल पटेल

संभावित दक्षिण अफ्रीकी प्लेइंग इलेवन

  • जोरिच वैन शाल्कविक
  • अदनान लगाडियन
  • मुहम्मद बुलबुलिया (कप्तान)
  • जेसन राउल्स
  • अरमान मनैक
  • पॉल जेम्स
  • बांदिले मबाथा
  • लेथाबो फाहलामोहलाका (विकेटकीपर)
  • जेजे बैसन
  • बयांडा मजोला
  • नटांडो सोनी

लाइव स्ट्रीमिंग कहां देखें?

क्रिकेट प्रशंसक भारत अंडर-19 और दक्षिण अफ्रीका अंडर-19 के बीच दूसरा यूथ ODI Cricket South Africa YouTube Channel पर लाइव देख सकते हैं। मैच की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग इसी चैनल पर उपलब्ध होगी।

भारत यदि यह मुकाबला जीतता है तो वह तीन मैचों की सीरीज में अजेय बढ़त हासिल कर लेगा, जबकि दक्षिण अफ्रीका के लिए यह मैच “करो या मरो” जैसा होगा।

BCCI ने KKR को 2026 आईपीएल सीजन के लिए अपनी टीम से मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज़ करने का निर्देश दिया, देवजीत सैकिया ने की पुष्टि।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आधिकारिक तौर पर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को निर्देश दिया है कि वह 2026 आईपीएल सीजन के लिए अपनी टीम से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज़ कर दे। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने शनिवार, 3 जनवरी को इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम “हाल की परिस्थितियों” को देखते हुए उठाया गया है।

30 वर्षीय बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को KKR ने 16 दिसंबर को हुए मिनी ऑक्शन में 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। उनके लिए चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच भी कड़ी बोली लगी थी। BCCI ने यह भी साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर KKR उनकी जगह किसी अन्य खिलाड़ी को टीम में शामिल कर सकती है।

शाहरुख खान की सह-मालिकाना वाली KKR में मुस्तफिजुर के चयन को लेकर काफी विवाद हुआ था, खासकर महाराष्ट्र में। कई राजनेताओं और धार्मिक नेताओं ने इसका विरोध किया था। कुछ राजनीतिक दलों ने इस फैसले के लिए शाहरुख खान की भी आलोचना की थी। बांग्लादेश में हाल ही में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या समेत कई घटनाओं के बाद वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, जिससे BCCI पर दबाव भी बढ़ा।

मुस्तफिजुर रहमान आईपीएल के अनुभवी खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2016 से अब तक आठ आईपीएल सीजन खेले हैं और केवल 2019 व 2020 में नहीं खेल पाए थे। वह सनराइजर्स हैदराबाद, मुंबई इंडियंस, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के लिए खेल चुके हैं। 2026 का सीजन KKR के लिए उनका पहला सीजन होता।

भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों पर भी अनिश्चितता

बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति का असर दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ा है। पिछले साल भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली सीमित ओवरों की सीरीज टाल दी गई थी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 2 जनवरी 2026 को घोषणा की कि यह सीरीज अब सितंबर में खेली जाएगी। हालांकि BCCI ने अभी तक इसमें भाग लेने की पुष्टि नहीं की है और राजनीतिक हालात को लेकर चिंता जताई है।

दोनों देशों के बीच तनाव तब बढ़ा जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले साल अगस्त में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच देश छोड़कर भारत आना पड़ा। बाद में एक ट्रिब्यूनल ने छात्र मौतों से जुड़े मामले में उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई।

इसके बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में भी तनाव बढ़ा। ढाका ने कई बार भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया, जबकि भारत ने सुरक्षा चिंताओं को लेकर बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज़ हमीदुल्लाह को बुलाया। अवामी लीग सरकार के जाने और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के आने के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति में बदलाव आया है, जिसका असर भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ा है।

भारत के एक शहर में पानी के जहरीला होने से कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़।

सुनील साहू कहते हैं कि उन्हें जिंदगी भर इस बात का अफसोस रहेगा कि उन्होंने अपने पांच महीने के बेटे अव्यान को गाय का दूध पानी में मिलाकर पिलाया था। अव्यान मुख्य रूप से मां का दूध पीता था, लेकिन इंदौर (मध्य प्रदेश) में रहने वाले परिवार ने उसके आहार में थोड़ा पतला किया हुआ गाय का दूध शामिल करने का फैसला किया, जो भारत के कई घरों में आम बात है।

अक्सर माना जाता है कि गाय का दूध छोटे बच्चों के लिए भारी होता है और पाचन संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकता है, इसलिए उसे पानी मिलाकर दिया जाता है। परिवार का कहना है कि उन्हें पता था कि नल का पानी सुरक्षित नहीं है, इसलिए उन्होंने दूध और पानी के मिश्रण को उबालकर ठंडा करने के बाद बच्चे को पिलाया था।

26 दिसंबर को अव्यान को तेज दस्त शुरू हो गए। स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराने के बावजूद उसकी हालत तेजी से बिगड़ती गई और तीन दिन के भीतर उसकी मौत हो गई। सुनील साहू का मानना है कि उनके बेटे की मौत दूषित नल का पानी पीने से हुई।

अव्यान उन कई लोगों में शामिल है जिनकी मौत इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में प्रदूषित पेयजल पीने के कारण होने की आशंका है। प्रशासन अभी मामले की जांच कर रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि एक क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण सीवर का पानी शहर की जल आपूर्ति में मिल गया, जिससे दस्त की बड़ी महामारी फैल गई।

मौतों की सही संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अब तक चार मौतों को दूषित पानी से जोड़ा गया है। हालांकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। राज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आठ मौतों की जानकारी मिलने की बात कही है, जबकि स्थानीय पत्रकारों ने बीबीसी हिंदी को बताया कि मृतकों की संख्या लगभग 14 तक हो सकती है। शहर भर में 200 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में भागीरथपुरा के करीब 40,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। यह इलाका मुख्य रूप से गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों का है। इनमें से लगभग 2,450 लोगों में उल्टी और दस्त के मामले पाए गए।

इस घटना ने इंदौर में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में हुई इस घटना के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सवाल उठ रहे हैं।

जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि जिस पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ था, उसे ठीक कर दिया गया है और अन्य खामियों की भी जांच की जा रही है। एक नगर निगम अधिकारी को सेवा से हटा दिया गया है, जबकि दो अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “यह घटना कभी नहीं होनी चाहिए थी। मामले की गहराई से जांच के लिए एक समिति बनाई गई है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।”

अगले आदेश तक नगर निगम भागीरथपुरा के लोगों को टैंकरों के जरिए पानी उपलब्ध करा रहा है। साथ ही लोगों को नल का पानी इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।

जांच जारी रहने के बीच इलाके के परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दुख से जूझ रहे हैं। दर्जी संजय यादव ने बताया कि उनकी 69 वर्षीय मां को 26 दिसंबर की शाम उल्टियां शुरू हुई थीं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन एक दिन के भीतर उनकी मौत हो गई।” उनका 11 महीने का बेटा भी बीमार है।

एक अन्य निवासी सुधा पाल ने बताया कि उनके 76 वर्षीय पिता नंदलाल पाल की भी तेज दस्त के बाद मौत हो गई। उनका कहना है कि उनके घर में आने वाला पानी अब भी दूषित है और उससे बदबू आती है।

अरुण प्रजापत, जिनका दावा है कि उनकी मां सीमा की मौत दूषित पानी पीने से हुई, कहते हैं, “पानी से बदबू आ रही थी, लेकिन हमने कभी नहीं सोचा था कि यह जानलेवा साबित हो सकता है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाके के लोग पिछले दो महीने से अधिक समय से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे। इन आरोपों पर भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने कहा कि इंदौर की सीवर और जल आपूर्ति व्यवस्था को बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है और कई इलाकों में काम जारी है।

वहीं, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर खराब प्रशासन और घटना की वास्तविक गंभीरता छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इंदौर के लोगों ने बार-बार भाजपा को वोट दिया, लेकिन बदले में उन्हें जहरीला पानी मिला।”

पीएम मोदी ने पुतिन के आवास पर कथित हमले पर चिंता जताई, कहा- शांति का रास्ता केवल कूटनीति और बातचीत से निकल सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास पर कथित हमले की खबरों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति का एकमात्र भरोसेमंद रास्ता कूटनीति और बातचीत है।

इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे कदम, जो मौजूदा संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं, चिंता का विषय हैं। उन्होंने सभी पक्षों से शांति प्रयासों को कमजोर करने वाले कदमों से बचने और बातचीत जारी रखने की अपील की।

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में मोदी ने कहा कि किसी राष्ट्राध्यक्ष के आवास को निशाना बनाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने दोहराया कि युद्ध और तनाव को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका लगातार कूटनीतिक प्रयास ही हैं।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के उस दावे के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने रूस के नोवगोरोद क्षेत्र में स्थित राष्ट्रपति पुतिन के सरकारी आवास पर हमला करने की कोशिश की थी। लावरोव के अनुसार, इस कथित घटना का असर मॉस्को की वार्ता संबंधी नीति पर पड़ सकता है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुतिन से फोन पर बातचीत के दौरान इस कथित हमले की जानकारी मिलने के बाद वे “बहुत नाराज” हुए। ट्रंप ने कहा कि युद्ध के दौरान सैन्य कार्रवाई अलग बात है, लेकिन किसी नेता के आवास को निशाना बनाना एक सीमा पार करने जैसा है।

चीन ने भी प्रतिक्रिया देते हुए सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने और संघर्ष को और फैलने से रोकने की अपील की।

लावरोव ने आरोप लगाया कि 28 और 29 दिसंबर के बीच यूक्रेन ने पुतिन के आवास की ओर 91 लंबी दूरी के ड्रोन भेजे थे। उन्होंने दावा किया कि रूस की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी ड्रोन मार गिराए। लावरोव ने इस घटना को लापरवाह कार्रवाई बताते हुए चेतावनी दी कि इसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इसे “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” भी बताया।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कथित घटना के समय राष्ट्रपति पुतिन उस आवास में मौजूद थे या नहीं।

वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि रूस के आरोप निराधार हैं और रूस वास्तव में युद्ध समाप्त करने के लिए गंभीर नहीं है।

अरावली पहाड़ियों विवाद: पर्यावरण मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के रोक आदेश का स्वागत किया, कहा- पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी

अरावली पहाड़ियों विवाद: सुप्रीम कोर्ट के रोक आदेश का पर्यावरण मंत्री ने किया स्वागत

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला की “नई परिभाषा” से जुड़े अपने आदेश पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। इस नई परिभाषा को लेकर पहले काफी आलोचना हुई थी।

मंत्री ने कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) अरावली पहाड़ियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए हर संभव सहयोग देगा।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश पर रोक लगाने और मामले की जांच के लिए नई समिति बनाने का फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने यह भी बताया कि नई खनन लीज़ और पुरानी लीज़ के नवीनीकरण पर फिलहाल पूरी तरह प्रतिबंध जारी है।

इससे पहले भी मंत्री ने स्पष्ट किया था कि अरावली के मुख्य, संरक्षित और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों, खासकर National Capital Region, में कोई नई खनन अनुमति नहीं दी जाएगी।

मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अरावली संरक्षण के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को मान्यता देता है। इसमें वैज्ञानिक अध्ययन, कड़े सुरक्षा उपाय और Aravalli Green Wall Project जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

विवाद क्यों शुरू हुआ?

यह विवाद पिछले नवंबर में शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की पहचान के लिए केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। नई गाइडलाइन के अनुसार, केवल वे पहाड़ियां जो आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ऊंची हों, या ऐसी पहाड़ियों के समूह हों, उन्हें नियामक उद्देश्यों के लिए अरावली का हिस्सा माना जाएगा।

हालांकि सरकार का कहना था कि इससे लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान होगा, लेकिन कई विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने चिंता जताई कि यह नई और सीमित परिभाषा पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रयासों को कमजोर कर सकती है।

‘बांग्लादेश पर हमला नहीं कर सकते तो पीएम पद छोड़ दें’—सीएम योगी के वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है?

सोशल मीडिया पर नेताओं के बयानों को लेकर अक्सर भ्रामक वीडियो वायरल होते रहते हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पद छोड़ने की मांग की है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

क्या है वायरल दावा?

25 दिसंबर को एक इंस्टाग्राम यूजर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सीएम योगी को यह कहते हुए दिखाया गया कि यदि प्रधानमंत्री बांग्लादेश पर कार्रवाई नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वीडियो में बांग्लादेश, पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख से जुड़ी बेहद आक्रामक बातें भी सुनाई देती हैं। इसी आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि सीएम योगी ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती दी है।

फैक्ट चेक में क्या सामने आया?

वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए उसके की-फ्रेम्स की जांच की गई और असली स्रोत तलाशा गया। जांच के दौरान यह वीडियो एक प्रतिष्ठित यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध मूल भाषण से मेल खाता पाया गया, जो उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का है। पूरा भाषण देखने पर साफ हुआ कि मुख्यमंत्री योगी ने अपने वास्तविक संबोधन में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाया था और इस पर विपक्ष की चुप्पी को लेकर सवाल किए थे। लेकिन उन्होंने न तो प्रधानमंत्री से इस्तीफे की कोई बात कही थी और न ही पाकिस्तान या उसके सैन्य नेतृत्व के खिलाफ किसी तरह की टिप्पणी की थी।

एडिटिंग और AI से छेड़छाड़ की आशंका

जांच को आगे बढ़ाने पर वायरल वीडियो में लिप-सिंक से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे इसके एडिटेड होने का संदेह गहराया। डिटेक्शन टूल्स के जरिए की गई जांच में यह संकेत मिले कि वीडियो के ऑडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

ऑडियो एनालिसिस टूल Truth Scan के अनुसार, आवाज के AI-जनरेटेड होने की संभावना करीब 98 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा, एआई और उभरती तकनीकों के विशेषज्ञों ने भी पुष्टि की कि वीडियो में डीपफेक तकनीक का उपयोग किया गया है।

निष्कर्ष

जांच से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफा मांगने वाला यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसे AI तकनीक के जरिए तैयार किया गया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस तरह के भ्रामक और मनगढ़ंत कंटेंट से सावधान रहने की जरूरत है।