नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी (TMGL) का शुभारंभ किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय डिजिटल मंच है, जिसे आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से जुड़ी शोध सामग्री, नीतियों और वैज्ञानिक प्रमाणों को एक जगह उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है।
भारत मंडपम में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान किए गए एक महत्वपूर्ण वादे को पूरा करती है।
उन्होंने बताया कि TMGL दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित वैज्ञानिक शोध, अध्ययन और नीति दस्तावेजों को एक डिजिटल मंच पर एकत्र करेगा। इससे सभी देशों को प्रमाणित और विश्वसनीय जानकारी तक समान पहुंच मिल सकेगी।
194 देशों के सहयोग से तैयार की गई यह लाइब्रेरी पारंपरिक चिकित्सा के बिखरे हुए ज्ञान को एक वैश्विक ज्ञान भंडार में बदलने का प्रयास है। इससे शोध को बढ़ावा मिलेगा, नियमों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित रूप से शामिल करने का रास्ता आसान होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन में परंपरा और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन मेल देखने को मिला। इसमें शोध पद्धतियों, डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैश्विक मानकों और निवेश के अवसरों जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि इन चर्चाओं के आधार पर दिल्ली घोषणा पत्र तैयार किया गया है, जो सुरक्षा, गुणवत्ता मानकों और पेशेवर प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का साझा ढांचा बनेगा।
पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने गुजरात के जामनगर में स्थापित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने दिल्ली में WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के नए परिसर का भी उद्घाटन किया और इसे शोध, नियमन और क्षमता विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के कारण मधुमेह, हृदय रोग, अवसाद और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में शारीरिक और मानसिक संतुलन को बहाल करना पूरी दुनिया की जरूरत बन गया है।
उन्होंने बताया कि भारत पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा को मिलाकर कैंसर के समग्र उपचार को बढ़ावा देने के लिए नई पहल कर रहा है। साथ ही एनीमिया, गठिया और मधुमेह जैसी बीमारियों पर क्लिनिकल रिसर्च भी जारी है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा किए जा रहे नवाचारों की भी सराहना की।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने माय आयुष इंटीग्रेटेड सर्विसेज पोर्टल और आयुष मार्क सहित कई महत्वपूर्ण आयुष पहलों की शुरुआत की। आयुष मार्क को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक के रूप में विकसित करने की योजना है।
उन्होंने योग शिक्षा पर WHO की एक तकनीकी रिपोर्ट भी जारी की और योग के प्रचार-प्रसार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को प्रधानमंत्री योग पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।











