Google search engine
Home Blog Page 6

DNA वाले बयान पर Prashant Kishor का Revanth Reddy पर तीखा हमला, बोले- राहुल गांधी भी नहीं बचा सकते

DNA वाले बयान पर Prashant Kishor का Revanth Reddy पर तीखा हमला, बोले- राहुल गांधी भी नहीं बचा सकते
DNA वाले बयान पर Prashant Kishor का Revanth Reddy पर तीखा हमला, बोले- राहुल गांधी भी नहीं बचा सकते

नई दिल्ली: जन सवराज आंदोलन के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रसांत किशोर ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि अगली विधानसभा चुनावों में वह रेवंत रेड्डी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और इस बार राहुल गांधी भी उन्हें नहीं बचा पाएंगे।

टाइम्स नाउ को दिए एक साक्षात्कार में प्रसांत किशोर ने रेवंत रेड्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिहारियों का अपमान करते हुए यह कहा कि “बिहारियों का डीएनए तेलंगाना के लोगों से घटिया है।” किशोर ने कहा, “अगर हमारा डीएनए घटिया है, तो फिर हमारे पास मदद के लिए क्यों आए थे? यहां तक कि राहुल गांधी भी उन्हें नहीं बचा सकते। हम उन्हें हराएंगे और पूरी ताकत से हराएंगे।”

किशोर ने दावा किया कि रेवंत रेड्डी कांग्रेस की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली में उनसे कई बार मदद मांगने आए थे। उन्होंने कहा, “रेवंत रेड्डी एक, दो, तीन बार दिल्ली आए। उन्होंने मुझसे मदद मांगी, लेकिन मैंने नहीं की। आज जब वे मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो उनका अहंकार इस कदर बढ़ गया है कि वे बिहारियों को नीचा दिखा रहे हैं।”

गौरतलब है कि दिसंबर 2023 में रेवंत रेड्डी ने एक विवादित बयान में कहा था, “मेरा डीएनए तेलंगाना का है। केसीआर का डीएनए बिहार का है। वह बिहार से आए हैं, उनकी जाति कुर्मी है, जो बिहार से विजयनगरम और फिर तेलंगाना में आए। तेलंगाना का डीएनए बिहार से बेहतर है।”

इस बयान को लेकर किशोर ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, “यदि रेवंत रेड्डी के अनुसार बिहारी डीएनए हीन है, तो वह मुझसे मदद क्यों मांग रहे थे? अगर हिम्मत है तो सार्वजनिक रूप से फिर से ऐसा कहें।”

प्रसांत किशोर ने रेवंत रेड्डी को “राजनीतिक पलटीमार” कहा और कहा कि वह पहले बीजेपी, फिर टीडीपी और अब कांग्रेस में हैं। उन्होंने सवाल किया, “उनकी क्या औकात है? आज मुख्यमंत्री बनकर घमंड में चूर हैं, लेकिन हम उन्हें जनता के बीच जवाब देंगे।”

किशोर ने कांग्रेस नेताओं पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस में दिल्ली और केरल जैसे राज्यों के नेता बिहारियों को हीन दृष्टि से देखते हैं। उन्होंने कहा, “ये नेता बिहारी समाज को हंसी का पात्र समझते हैं। यह उनके वर्गभेद और मानसिक संकीर्णता को दिखाता है।”

राज ठाकरे को “लम्पट तत्व” करार देते हुए किशोर ने बताया कि उन्होंने 2020 में उद्धव ठाकरे से केवल एक आग्रह किया था — कि शिवसेना के लोग मुंबई में बिहारियों के खिलाफ हिंसा न करें। उन्होंने दावा किया, “2020 से लेकर अब तक एक भी घटना नहीं हुई। यही मेरी फीस थी।”

इसके साथ ही किशोर ने तमिलनाडु की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि DMK ने भी बिहारियों के खिलाफ बयान दिए हैं और उनका भी हिसाब बराबर किया जाएगा। “मैं किसी ऐसे नेता की मदद नहीं करूंगा जो बिहारियों का अपमान करता हो। अगर मौका मिला, तो हम हर मंच पर इनका जवाब देंगे।”

प्रसांत किशोर ने स्पष्ट किया कि वह न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में बिहारी स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर भगवान मौका देगा, तो हम सबका हिसाब बराबर करेंगे।”

Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले

Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले
Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले

नई दिल्ली: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार ने गिरावट के साथ शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 173.88 अंक या 0.21 प्रतिशत टूटकर 80,809.43 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 64.20 अंक या 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,772.10 पर कारोबार करता नजर आया।

स्मॉलकैप और मिडकैप में बढ़त, ऑटो सेक्टर चमका

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में बढ़त देखने को मिल रही है, जबकि लार्जकैप इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो सेक्टर में खास उछाल देखने को मिला और यह इंडेक्स 282.48 अंक या 0.48 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,537.82 पर पहुंच गया। टाटा मोटर्स इस सेक्टर में सबसे आगे रही।

आज के टॉप गेनर्स

  • टाटा स्टील
  • एक्सिस बैंक
  • टाटा मोटर्स
  • भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड
  • कोटक महिंद्रा बैंक

आज के टॉप लूजर्स

  • महिंद्रा एंड महिंद्र
  • बजाज फाइनेंस
  • बजाज फिनसर्व
  • मारुति सुजुकी
  • हिंदुस्तान यूनिलीवर

वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत

अमेरिकी बाजारों में तेजी का सिलसिला जारी है, शटडाउन की आशंका के बावजूद वॉल स्ट्रीट लगातार मजबूत बना हुआ है। डाओ जोंस दो दिनों में लगभग 125 अंक चढ़कर नए उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। नैस्डैक में 180 अंकों की तेज बढ़त देखने को मिली और यह ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा। एसएंडपी इंडेक्स भी लाइफ हाई पर बंद हुआ।

कमोडिटी मार्केट में हलचल, सोना-चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने $3,920 प्रति औंस का लाइफटाइम हाई छूने के बाद $40 की गिरावट दर्ज की। चांदी भी 2 प्रतिशत फिसली। घरेलू बाजार में सोना ₹1,18,444 और चांदी ₹1,45,715 प्रति किलो के साथ ऑल-टाइम हाई पर पहुंच चुके हैं। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में बीते दो दिन में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई है, और यह 4 महीने के निचले स्तर $65 प्रति बैरल से नीचे आ गया है।

बेस मेटल्स में तेजी

बेस मेटल्स में मजबूती बनी रही। एलएमई कॉपर 16 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, वहीं जिंक भी 10 महीने के शिखर पर कारोबार करता दिखा।

भारतीय बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ सत्रों से गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद फार्मा सेक्टर में भारी गिरावट आई है, जिससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसके अलावा, बुधवार को हुई आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे भी बाजार की धारणा पर असर पड़ा। ग्लोबल संकेतों की मजबूती के बावजूद घरेलू कारकों की वजह से भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आ रहा है। निवेशकों को सतर्क रहकर अगले कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।

दशहरे पर रिलीज़ हुईं ”Kantara A Legend: Chapter 1′ और ‘Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari’, पहले दिन की कमाई में ‘Kantara’ ने मारी बाज़ी

दशहरे पर रिलीज़ हुईं ''Kantara A Legend: Chapter 1' और 'Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari', पहले दिन की कमाई में 'Kantara' ने मारी बाज़ी
दशहरे पर रिलीज़ हुईं ''Kantara A Legend: Chapter 1' और 'Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari', पहले दिन की कमाई में 'Kantara' ने मारी बाज़ी

नई दिल्ली: 2 अक्टूबर 2025, जो इस साल गांधी जयंती और दशहरे के त्योहार के साथ आया, सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। इस दिन दो बड़ी बजट की बहुप्रतीक्षित फिल्में ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा ठलीजेंड: चैप्टर 1’ और वरुण धवन की ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हुईं।

जहां दोनों फिल्मों की ओपनिंग अच्छी रही, वहीं पहले ही दिन ‘कांतारा ठलीजेंड: चैप्टर 1’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ को पीछे छोड़ दिया।

‘कांतारा ठलीजेंड: चैप्टर 1’ बनाम ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ – पहले दिन की कमाई

‘कांतारा’ की यह प्रीक्वल फिल्म, जो 2022 में आई ब्लॉकबस्टर ‘कांतारा’ का अगला अध्याय है, ने अपने ओपनिंग डे पर ₹60 करोड़ की जबरदस्त कमाई की। फिल्म को कन्नड़, हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, बांग्ला और अंग्रेज़ी सहित कई भाषाओं में रिलीज़ किया गया था।

₹125 करोड़ की भारी भरकम लागत से बनी इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। ऋषभ शेट्टी न केवल फिल्म के मुख्य अभिनेता हैं, बल्कि उन्होंने इसका निर्देशन भी किया है। फिल्म में रुक्मिणी वसंथ, गुलशन देवैया और जयराम अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं।

वहीं दूसरी ओर, शशांक खेतान निर्देशित रोमांटिक ड्रामा ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ ने पहले दिन ₹9.25 करोड़ की कमाई की। इस फिल्म में वरुण धवन और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं, जबकि सान्या मल्होत्रा और रोहित सराफ ने सहायक भूमिकाएं निभाई हैं।

फिल्म की हिंदी ऑक्यूपेंसी 2 अक्टूबर को कुल मिलाकर 34.08% रही, जिसमें सबसे अधिक 38.95% दर्शक रात के शो में देखने को मिले।

कुल मिलाकर, दशहरे के मौके पर रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उत्साहजनक शुरुआत करने में सफल रहीं, लेकिन ‘कांतारा ठलीजेंड: चैप्टर 1’ की ऐतिहासिक ओपनिंग ने साफ कर दिया है कि दर्शकों का रुझान इस बार पौराणिकता, रहस्य और प्रकृति की शक्ति को दिखाने वाली कहानी की ओर ज्यादा है।

RIP Pandit Chhannulal Mishra: शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

RIP Pandit Chhannulal Mishra: शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
RIP Pandit Chhannulal Mishra: शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

वाराणसी (उत्तर प्रदेश): पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपनी बेटी नम्रता के निवास, मिर्जापुर के गंगादर्शन कॉलोनी में अंतिम सांस ली।

पंडित मिश्र का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनका अंतिम संस्कार उनके पोते ने किया। उनके पार्थिव शरीर को दोपहर 12:30 बजे उनके पैतृक निवास छोटी गबी, वाराणसी लाया गया, जहां उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र, वाराणसी की महापौर, कई विधायक, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त समेत बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए एकत्र हुए। संगीत जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी और शास्त्रीय गायिका डॉ. सोमा घोष शामिल हैं।

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक गांव में हुआ था। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की और बाद में बनारस में औपचारिक संगीत प्रशिक्षण लिया। उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खां के सान्निध्य में दीर्घकालीन तालीम ली और बनारस घराने के प्रमुख गायक बने। उन्हें ख़याल और पूरब अंग की ठुमरी में विशेष महारत हासिल थी।

पंडित मिश्र को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद सम्मान, यश भारती पुरस्कार, 2010 में पद्म भूषण और 2020 में पद्म विभूषण जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप भी प्राप्त हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पंडित मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुःख हुआ है। उन्होंने भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वे शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने में भी अग्रणी रहे। मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उनका स्नेह और आशीर्वाद मुझे हमेशा मिला।”

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी याद किया कि पंडित मिश्र 2014 में वाराणसी लोकसभा सीट से उनके प्रस्तावक थे। पंडित मिश्र अपने पीछे चार बेटियां और एक बेटे का परिवार छोड़ गए हैं। पूरब अंग की ठुमरी शैली के प्रमुख स्तंभों में से एक रहे पंडित छन्नूलाल मिश्र को उनके भावपूर्ण और मधुर गायन के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके जाने से भारतीय शास्त्रीय संगीत ने एक अमूल्य रत्न खो दिया है।

Sonam Wangchuk की गिरफ्तारी को लेकर पत्नी गितांजलि की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, राष्ट्रपति से भी लगाई गुहार

Sonam Wangchuk की गिरफ्तारी को लेकर पत्नी गितांजलि की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, राष्ट्रपति से भी लगाई गुहार
Sonam Wangchuk की गिरफ्तारी को लेकर पत्नी गितांजलि की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, राष्ट्रपति से भी लगाई गुहार

लेह: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गितांजलि जे अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनके पति की तत्काल रिहाई की मांग की है। गितांजलि का कहना है कि वांगचुक की गिरफ्तारी अवैध है और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है।

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को लेह में हुई हिंसक झड़पों के दो दिन बाद गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था। उनकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई थी। इन झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। ये हिंसा लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान हुई थी।

गितांजलि ने कहा कि उनके पति को पाकिस्तान से संबंध होने के झूठे आरोपों में फंसाया गया है, जबकि वह हमेशा देश और सेना के समर्थन में खड़े रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अनियंत्रित विकास के खिलाफ आवाज उठाना कोई अपराध है।

गितांजलि का कहना है कि उन्हें अब तक वांगचुक की हिरासत का आधिकारिक आदेश नहीं मिला है और वह अपने पति से संपर्क नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सीआरपीएफ की निगरानी में रखा गया है और हिमाालयन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) से छात्रों और कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है। HIAL की दो सदस्य भी तीन दिन पहले हिरासत में ली गई हैं।

गितांजलि ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को तीन पन्नों का पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने लिखा है कि वांगचुक ने अपना जीवन लद्दाख के लोगों और देश की सेवा में समर्पित कर दिया है और वे किसी के लिए भी खतरा नहीं हो सकते।

गितांजलि ने कहा कि राष्ट्रपति खुद एक आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं, इसलिए उन्हें लद्दाख के लोगों की भावनाएं सबसे बेहतर तरीके से समझ में आएंगी।

उन्होंने राष्ट्रपति से वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की मांग की और कहा कि उनके साथ जो हो रहा है, वह एक “विच-हंट” जैसा है, जो पिछले चार वर्षों में जनता की आवाज उठाने के कारण किया जा रहा है।

Bihar Election Opinion Poll: कांग्रेस को झटका, एनडीए को बहुमत, प्रशांत किशोर सीएम की रेस में सबसे आगे

Bihar Election Opinion Poll: कांग्रेस को झटका, एनडीए को बहुमत, प्रशांत किशोर सीएम की रेस में सबसे आगे
Bihar Election Opinion Poll: कांग्रेस को झटका, एनडीए को बहुमत, प्रशांत किशोर सीएम की रेस में सबसे आगे

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान भले ही अभी न हुआ हो, लेकिन चुनावी बिसात पर गोटियां चलनी शुरू हो गई हैं। इस बीच जेवीसी (JVC) द्वारा किए गए ताजा ओपिनियन पोल ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सर्वे के नतीजे खासकर कांग्रेस के लिए झटका साबित हो रहे हैं, जबकि एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है।

राहुल गांधी को बड़ा झटका

16 अगस्त से 3 सितंबर तक राहुल गांधी, तेजस्वी यादव के साथ बिहार दौरे पर थे और उन्होंने बीजेपी-जेडीयू सरकार पर जमकर हमला बोला। लेकिन जेवीसी सर्वे के अनुसार, राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ अभियान जनता को प्रभावित करने में नाकाम रहा। सर्वे के मुताबिक, 52% लोगों ने उनके आरोपों को बेबुनियाद बताया।

सीटों का गणित: कौन कहां खड़ा?

जेवीसी ओपिनियन पोल में अनुमान लगाया गया है कि नवंबर में होने वाले चुनाव में एनडीए गठबंधन को 131-150 सीटें मिल सकती हैं। इनमें:

  • भाजपा को 66-77 सीटें
  • जेडीयू को 52-58 सीटें
  • अन्य एनडीए सहयोगियों को 13-15 सीटें

वहीं, महागठबंधन को 81-103 सीटें मिलने का अनुमान है, जिनमें:

  • राजद को 57-71 सीटें
  • कांग्रेस को सिर्फ 11-14 सीटें
  • अन्य सहयोगियों को 13-18 सीटें

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को 4-6 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि AIMIM, बसपा और अन्य को भी 5-6 सीटें मिल सकती हैं।

वोट शेयर में भी एनडीए को बढ़त

वोट प्रतिशत के लिहाज से:

  • एनडीए को 41-45% वोट मिलने की उम्मीद
  • महागठबंधन को 37-40%
  • जन सुराज को 10-11% वोट शेयर

इस आंकड़े से यह स्पष्ट होता है कि एनडीए को सिर्फ सीटों में नहीं, वोट प्रतिशत में भी बढ़त मिल रही है।

नीतीश कुमार सबसे पसंदीदा सीएम चेहरा

मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद को लेकर किए गए सर्वे में:

  • नीतीश कुमार को 27% समर्थन
  • तेजस्वी यादव को 25%
  • प्रशांत किशोर को 15%
  • चिराग पासवान को 11%
  • सम्राट चौधरी को 8%

इससे संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार अब भी सबसे लोकप्रिय चेहरा बने हुए हैं, और जेडीयू के जनाधार में गिरावट की अटकलें फिलहाल गलत साबित हो रही हैं।

कांग्रेस की स्थिति और कमजोर

2020 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था, लेकिन इस बार स्थिति और खराब होती दिख रही है। सर्वे से संकेत मिला है कि कांग्रेस 2020 के मुकाबले और भी कम सीटों पर सिमट सकती है। राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर ‘वोट चोरी’ और एसआईआर जैसे मुद्दों को लेकर मतदाताओं में असर न दिखने के कारण।

एक महीने में बदले समीकरण

गौरतलब है कि अगस्त में हुए पिछले सर्वे में जेडीयू की स्थिति कमजोर मानी जा रही थी, लेकिन ताजा सर्वे में जेडीयू को 2020 के मुकाबले 10 सीटों की बढ़त मिलती दिख रही है। यानी, एक महीने में जेडीयू की स्थिति दोगुनी मजबूत हो गई है।

जेवीसी के इस ओपिनियन पोल से साफ है कि बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर का मैदान बनने जा रहा है। लेकिन फिलहाल एनडीए बढ़त बनाए हुए है। नीतीश कुमार एक बार फिर सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे हैं, वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा जैसा साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि अगले कुछ महीनों में सियासी समीकरण और जनमानस में क्या बदलाव आता है और क्या कांग्रेस अपनी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव करती है या नहीं।

Sonam Wangchuk पर लगे आरोपों पर पत्नी गीतांजलि अंगमो फायर, BJP सरकार के छूटे पसीने

Sonam Wangchuk पर लगे आरोपों पर पत्नी गीतांजलि अंगमो फायर, BJP सरकार के छूटे पसीने
Sonam Wangchuk पर लगे आरोपों पर पत्नी गीतांजलि अंगमो फायर, BJP सरकार के छूटे पसीने

नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के निदेशक सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति के खिलाफ लगाए गए विदेशी संपर्क और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने कहा कि ये सब केवल उन्हें लद्दाख के हक की आवाज उठाने के लिए निशाना बनाने की साजिश है।

30 सितंबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में मीडिया से बातचीत करते हुए अंगमो ने कहा कि सरकार ने अभी तक वांगचुक की गिरफ्तारी का कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया है। बता दें कि वांगचुक को 27 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर राजस्थान के जोधपुर जेल भेजा गया था।

“हम न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे”

गीतांजलि अंगमो ने कहा, “हम भारत के कानूनी तंत्र में पूरा विश्वास रखते हैं और अपने पति के लिए न्याय की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेंगे। जब तक सच सामने नहीं आता, हम पीछे नहीं हटेंगे।”

उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “अगर सोनम वांगचुक ने कोई गुनाह किया है, तो सबूत सामने लाएं। अगर उनके संगठन HIAL में कोई वित्तीय गड़बड़ी है या विदेशी फंडिंग में कोई उल्लंघन हुआ है, तो उसे साबित करें।”

“जो सरकार सम्मान देती है, वही अब देशद्रोही कह रही है”

गीतांजलि ने सवाल उठाया कि यदि सोनम वांगचुक देश विरोधी हैं, तो उन्हें पहले सम्मान क्यों दिया गया? उन्होंने बताया कि HIAL को केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने पैसिव सोलर हीटेड बिल्डिंग डिजाइन के लिए पहला पुरस्कार दिया था। इसके अलावा, आइस स्तूपा परियोजना को जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने सम्मानित किया था।

उन्होंने कहा, “जब हमारी यूनिवर्सिटी को देश का बेस्ट ईको-प्रोजेक्ट घोषित किया गया, तब क्या हम राष्ट्र विरोधी थे? अगर नहीं, तो अब अचानक ऐसा क्यों कहा जा रहा है?”

“अगर अच्छे काम करने वालों को अपराधी बनाया जाएगा तो प्रेरणा कौन लेगा?”

अंगमो ने कहा कि उनके पति ने 1.8 लाख वर्ग फीट पैसिव सोलर हीटेड स्ट्रक्चर का निर्माण किया है, जिनका इस्तेमाल सेना भी कर रही है। इससे हर महीने 4000 टन कार्बन की बचत हो रही है। उन्होंने कहा, “दुनिया जहां नेट ज़ीरो की बात कर रही है, लद्दाख कार्बन निगेटिव बन चुका है। ऐसे कार्यकर्ता को अपराधी की तरह पेश करना भारत के ‘विश्वगुरु’ बनने की सोच के खिलाफ है।”

पाकिस्तान यात्रा और विदेशी संबंधों पर जवाब

सोनम वांगचुक के पाकिस्तान से संबंधों के आरोपों को लेकर अंगमो ने स्पष्ट किया कि वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक जलवायु सम्मेलन में भाग लेने इस्लामाबाद गए थे। उन्होंने कहा, “क्या हिंदूकुश पर्वत, जो आठदेशों को छूता है और दो अरब लोगों को पानी देता है, पर चर्चा करना देशद्रोह है?”

उन्होंने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक ने उस मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मिशन लाइफ’ पहल की खुलकर तारीफ की थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि पाकिस्तान का कोई नागरिक लद्दाख में देखा गया था, तो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन क्यों हुआ?

“FCRA और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप बेबुनियाद”

HIAL की FCRA लाइसेंस रद्द किए जाने को लेकर अंगमो ने कहा कि उनके संगठन ने कोई विदेशी चंदा नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि विदेशों से जो भी भुगतान आया है, वह सेवा समझौते के तहत है और यह पूरी तरह कानूनी है। CBI ने भी अब तक किसी उल्लंघन की पुष्टि नहीं की है।

उन्होंने कहा कि HIAL का अनुसंधान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाया गया है और सरकार ने खुद इसकी नीतियों को राज्य में लागू किया है। आइस स्तूपा परियोजना और नई पर्यटन नीति में सोलर हीटिंग अनिवार्य कर दी गई है।

लद्दाख हिंसा को लेकर प्रशासन पर हमला

24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा, जिसमें चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी, को लेकर अंगमो ने लद्दाख की केंद्र शासित प्रशासन और उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता तथा पुलिस महानिदेशक एस.डी. जमवाल को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा, “सोनम पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्हें इस हिंसा की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने पिछले पांच सालों में कभी किसी तरह की हिंसा या उकसावे में भाग नहीं लिया। अब जो हुआ है, उसका जवाब प्रशासन और पुलिस को देना चाहिए।”

“मैगसेसे अवार्ड भी बदनाम करने का जरिया बना दिया गया”

गीतांजलि अंगमो ने कहा कि कुछ लोग वांगचुक को बदनाम करने के लिए यह प्रचार कर रहे हैं कि उन्होंने मैगसेसे पुरस्कार जीता है, जो कुछ ‘देशविरोधियों’ को भी मिला है। उन्होंने जवाब दिया, “भारत के 60 नागरिकों को यह पुरस्कार मिला है, जिनमें से 20 को बाद में पद्म विभूषण भी दिया गया है। क्या सरकार देशविरोधियों को सम्मान देती है?”

निष्कर्ष

गीतांजलि अंगमो का यह प्रेस वार्ता सिर्फ अपने पति के लिए न्याय की मांग नहीं थी, बल्कि यह लद्दाख के हक और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई की एक आवाज थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार को सबूत पेश करने होंगे, नहीं तो यह साबित होगा कि वांगचुक को एक जनहितैषी कार्यकर्ता से अपराधी बनाने की साजिश रची जा रही है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और न्यायिक प्रक्रिया आगे किस दिशा में जाती है।

Bihar Election 2025: क्या है EBC वोटबैंक, जिसको साधने के लिए महागठबंधन ने खेल दिया बड़ा खेल, नीतीश कुमार की बढ़ीं मुश्किलें

Bihar Election 2025: क्या है EBC वोटबैंक, जिसको साधने के लिए महागठबंधन ने खेल दिया बड़ा खेल, नीतीश कुमार की बढ़ीं मुश्किलें
Bihar Election 2025: क्या है EBC वोटबैंक, जिसको साधने के लिए महागठबंधन ने खेल दिया बड़ा खेल, नीतीश कुमार की बढ़ीं मुश्किलें

पटना: आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। 24 सितंबर को महागठबंधन ने ‘अतिपिछड़ा न्याय संकल्प’ के तहत EBC समुदाय के लिए 10 वादों की घोषणा की है। इसे विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के परंपरागत वोटबैंक में सेंध लगाने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU का सबसे मजबूत सामाजिक आधार अति पिछड़ा वर्ग रहा है। अब कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की अगुवाई वाला महागठबंधन EBC समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यदि महागठबंधन EBC वोटों में थोड़ी भी सेंध लगाने में सफल हो गया, तो JDU की सीटों में भारी गिरावट आ सकती है।

कौन हैं अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और क्यों हैं इतने अहम?

बिहार में EBC यानी Extremely Backward Classes राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक उपवर्ग हैं। इनमें वे जातियां शामिल हैं जो सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े मानी जाती हैं। हालिया जातीय सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार की 13.07 करोड़ जनसंख्या में EBC की हिस्सेदारी 36.01% है, जो राज्य का सबसे बड़ा सामाजिक समूह है।

EBC में हज्जाम, सहनी, केवट, निषाद, लोहार, कहार, तेली, नोनिया जैसी जातियां शामिल हैं। ये जातियां पारंपरिक रूप से कारीगर, मछुआरे, श्रमिक या सेवा से जुड़ी रहीं हैं। समय के साथ कई जातियों की पारंपरिक आजीविका लुप्त हो गई है, जिससे सामाजिक असुरक्षा और राजनीतिक उपेक्षा की भावना इन वर्गों में बढ़ी है।

‘अतिपिछड़ा न्याय संकल्प’ के 10 वादे

महागठबंधन ने EBC के लिए जिन 10 वादों की घोषणा की है, वे इस प्रकार हैं:

  1. पंचायत और नगर निकायों में आरक्षण 20% से बढ़ाकर 30% किया जाएगा
  2. आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने के लिए कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में डाला जाएगा
  3. भर्तियों में ‘नॉट फाउंड सूटेबल (NFS)’ को अवैध घोषित किया जाएगा
  4. अल्प या अति समावेशन मामलों को लेकर कमिटी बनेगी
  5. भूमिहीन EBC, SC/ST और पिछड़ा वर्ग के लोगों को शहर में 3 डेसिमल और गांव में 5 डेसिमल आवासीय भूमि दी जाएगी
  6. निजी स्कूलों की आरक्षित सीटों में से आधा हिस्सा EBC, SC/ST और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को
  7. 25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेकों में 50% आरक्षण
  8. निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाएगा
  9. आरक्षण की निगरानी के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन
  10. SC/ST एक्ट की तर्ज पर EBC अत्याचार निवारण अधिनियम बनाया जाएगा

क्या महागठबंधन की रणनीति काम करेगी?

पॉलिटिकल विश्लेषक रशीद किदवई के अनुसार, इस समय महागठबंधन का मुख्य लक्ष्य JDU को 25-30 सीटों तक सीमित करना है ताकि NDA के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो जाए। यही कारण है कि कांग्रेस और RJD ने EBC पर सीधा फोकस किया है।

हालांकि, चुनौती यह है कि नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में EBC के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं:

  • पंचायत और नगर निकायों में आरक्षण
  • EBC आयोग का गठन
  • कल्याणकारी योजनाओं के जरिए लक्षित सहायता
  • नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण विस्तार

इसके अलावा, नीतीश सरकार ने महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के लिए भी नकद हस्तांतरण योजनाएं शुरू की हैं, जिससे EBC समुदाय में सरकार के प्रति समर्थन कायम है।

कांग्रेस और RJD का बदला रुख

एक समय था जब कांग्रेस ने कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण नीति का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से विरोध किया था। लेकिन समय के साथ उसका रुख बदलता गया। 1990 और 2000 के दशक में कांग्रेस का उच्च जातियों में आधार कमजोर हुआ, जिसके बाद उसने OBC और EBC के लिए आरक्षण समर्थन शुरू किया। अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस EBC समुदाय को अपनी चुनावी रणनीति का केंद्र बना रही है।

RJD ने हमेशा OBC और EBC वर्ग को लेकर सक्रिय राजनीतिक पहल की है। लालू यादव के कार्यकाल में इन वर्गों को छात्रवृत्ति, छात्रावास और आरक्षण जैसे कई लाभ मिले।

क्या होगा असर?

फिलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि महागठबंधन EBC वोटों में कितनी सेंध लगा पाएगा, लेकिन यह साफ है कि बिहार चुनाव 2025 का सबसे बड़ा सियासी दांव EBC वोटबैंक पर ही खेला जा रहा है। JDU और BJP की नजर जहां कल्याणकारी योजनाओं और नीतीश के पुराने कामों के सहारे EBC को साथ बनाए रखने की है, वहीं महागठबंधन नए वादों के जरिए इस आधार को डगमगाने की कोशिश कर रहा है।

चुनाव में कौन कितना सफल होता है, यह तो नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल के राजनीतिक संकेत साफ हैं—EBC बिहार चुनाव 2025 का सबसे निर्णायक मतदाता वर्ग बन चुका है।

Sonam Wangchuk News: सोनम वांगचुक को लेकर फैलाई जा रही ‘मनगढ़ंत कहानी’, पत्नी गीता अंजू आंगमो ने लगाए गंभीर आरोप

Sonam Wangchuk News: सोनम वांगचुक को लेकर फैलाई जा रही 'मनगढ़ंत कहानी', पत्नी गीता अंजू आंगमो ने लगाए गंभीर आरोप
Sonam Wangchuk News: सोनम वांगचुक को लेकर फैलाई जा रही 'मनगढ़ंत कहानी', पत्नी गीता अंजू आंगमो ने लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली/लेह: लद्दाख में हाल ही में हुई अशांति को लेकर गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगे आरोपों को उनकी पत्नी गीता अंजू आंगमो ने पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एक “मनगढ़ंत कहानी” बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार छठे अनुसूची को लागू न करने के बहाने वांगचुक को बलि का बकरा बना रही है।

24 सितंबर की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गीता ने सुरक्षा बलों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और पूछा, “सीआरपीएफ को फायरिंग का आदेश किसने दिया?” उन्होंने कहा कि लद्दाख जैसे शांत क्षेत्र में, जहां कभी कोई हिंसक प्रदर्शन नहीं हुआ, वहां अपने ही नागरिकों पर गोली चलाना अस्वीकार्य है।

लद्दाख पुलिस के आरोपों को खारिज किया

आंगमो ने लद्दाख के पुलिस महानिदेशक एसडी सिंह जम्वाल के बयानों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने ANI से बातचीत में कहा, “हम लद्दाख डीजीपी के बयानों की कड़ी निंदा करते हैं। केवल मैं ही नहीं, बल्कि पूरा लद्दाख इन आरोपों को खारिज करता है।”

डीजीपी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक के पाकिस्तान से कथित संबंधों पर सवाल उठाए थे और उनके विदेश दौरों पर भी संदेह जताया था।

“सोनम वांगचुक को फंसाने की साजिश”

गीता आंगमो ने स्पष्ट किया कि उनके पति सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, और 24 सितंबर की घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने बताया कि घटना के समय वांगचुक कहीं और भूख हड़ताल पर थे।

उन्होंने आरोप लगाया, “पुलिस किसी एजेंडे के तहत काम कर रही है। वे छठा शेड्यूल लागू नहीं करना चाहते और किसी को बलि का बकरा बनाना चाहते हैं।”

‘राष्ट्रविरोधी’ कहे जाने पर भी दी सफाई

वांगचुक पर ‘राष्ट्रविरोधी’ टैग लगाए जाने को भी गीता आंगमो ने खारिज करते हुए कहा कि वह वर्षों से “गांधीवादी तरीकों” से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 24 सितंबर की स्थिति CRPF की कार्रवाई के चलते बिगड़ी, न कि किसी उकसावे के कारण।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वांगचुक की पाकिस्तान यात्रा जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के तहत हुई थी। उन्होंने कहा, “हम एक जलवायु सम्मेलन में गए थे। हिमालय की बर्फ यह नहीं देखती कि वह भारत में पिघल रही है या पाकिस्तान में।”

गीता आंगमो के इन बयानों ने लद्दाख में उभरते तनाव और वांगचुक की गिरफ्तारी पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर प्रशासन वांगचुक पर गंभीर आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थक और परिजन इसे एक राजनीतिक साजिश मान रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर लद्दाख और राष्ट्रीय राजनीति में और बहस छिड़ सकती है।