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नेपाल में दो साल की बच्ची को जीवित देवी चुना गया, जानें क्या है ये परंपरा और क्यों बनाई जाती है जिंदा देवी

नेपाल में दो साल की बच्ची को जीवित देवी चुना गया, जानें क्या है ये परंपरा और क्यों बनाई जाती है जिंदा देवी
नेपाल में दो साल की बच्ची को जीवित देवी चुना गया, जानें क्या है ये परंपरा और क्यों बनाई जाती है जिंदा देवी

काठमांडू: नेपाल में कुमारी परंपरा के तहत दो साल आठमहीने की आर्या तारा शाक्य को नई ‘जीवित देवी’ चुना गया है। मंगलवार को एक पारंपरिक समारोह के तहत उन्होंने काठमांडू के कुमारी घर में विधिवत रूप से सिंहासन ग्रहण किया। यह ऐतिहासिक परंपरा नेपाल में सदियों से चली आ रही है, जिसमें एक कन्या को देवी तलेजू का मानव अवतार माना जाता है।

काठमांडू के तलेजू भवानी मंदिर के पुजारी उद्धव कर्माचार्य के अनुसार, शुभ मुहूर्त में सम्पन्न इस विशेष समारोह के दौरान आर्या तारा शाक्य को पारंपरिक विधियों के अनुसार कुमारी के रूप में स्थापित किया गया।

कौन बन सकती है कुमारी?

कुमारी का चयन शाक्य समुदाय की लड़कियों में से किया जाता है, जो बौद्ध पृष्ठभूमि से आती हैं। हालांकि, कुमारी को हिंदू देवी के रूप में पूजा जाता है। परंपरा के अनुसार, लड़की की उम्र कम होनी चाहिए, पहली माहवारी शुरू नहीं हुई होनी चाहिए, शरीर पर कोई घाव या खरोंच नहीं होनी चाहिए और उसमें निर्भीकता होनी चाहिए।

चयन प्रक्रिया बेहद कठिन होती है। इसमें बच्ची को एक अंधेरे कमरे में ले जाकर डरावने मुखौटे और भैंस के सिरों के बीच रखा जाता है। यदि वह बिना डरे बाहर निकल आती है, तो उसे देवी के रूप में स्वीकार किया जाता है।

पूर्व कुमारी को किया गया पदमुक्त

इससे पहले की कुमारी को हाल ही में 12 वर्ष की आयु में पहली माहवारी आने के बाद पदमुक्त किया गया। कुमारी के रूप में चुनी गई कन्या तब तक देवी मानी जाती है, जब तक कि उसे पहली बार माहवारी न हो जाए। इसके बाद उसे ‘सामान्य जीवन’ में वापस लौटाया जाता है।

सदियों पुरानी परंपरा

नेपाल में कुमारी पूजा की परंपरा 500 से 600 साल पुरानी है और यह मल्ल राजवंश के समय से चली आ रही है। इस परंपरा के तहत कुमारी को देवी तलेजू भवानी का अवतार माना जाता है और उनका पूजन हिंदू और बौद्ध, दोनों समुदायों द्वारा किया जाता है।

नेपाल के राष्ट्रपति और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी इंद्रजात्रा जैसे पर्वों में कुमारी का आशीर्वाद लेते हैं। यह परंपरा आज भी नेपाली सांस्कृतिक पहचान का एक गहरा हिस्सा बनी हुई है।

नई कुमारी आर्या तारा शाक्य का चयन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह परंपरा आज भी नेपाल की सामाजिक और आध्यात्मिक संरचना में जीवंत बनी हुई है। इतनी कम उम्र की बच्ची का देवी रूप में प्रतिष्ठित होना इस परंपरा की अनोखी विशेषता को दर्शाता है।

Asia Cup 2025 Trophy विवाद में नया मोड़, भारत ने जताई नाराज़गी, UAE क्रिकेट बोर्ड को सौंपी गई ट्रॉफी

Asia Cup 2025 Trophy विवाद में नया मोड़, भारत ने जताई नाराज़गी, UAE क्रिकेट बोर्ड को सौंपी गई ट्रॉफी
Asia Cup 2025 Trophy विवाद में नया मोड़, भारत ने जताई नाराज़गी, UAE क्रिकेट बोर्ड को सौंपी गई ट्रॉफी

नई दिल्ली: एशिया कप 2025 के फाइनल में भारत की पाकिस्तान पर शानदार जीत के बाद ट्रॉफी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गंभीर होता जा रहा है। एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोसिन नक़वी द्वारा ट्रॉफी को आयोजन स्थल से अपने साथ ले जाने पर भारत ने कड़ा ऐतराज़ जताया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब नक़वी ने यह ट्रॉफी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) क्रिकेट बोर्ड को सौंप दी है। यह कदम एसीसी की 30 सितंबर को हुई वर्चुअल बैठक के बाद उठाया गया, जिसमें भारत की ओर से राजीव शुक्ला और आशीष शेलार ने हिस्सा लिया था।

भारत ने बैठक में उठाए तीन बड़े मुद्दे

BCCI प्रतिनिधियों ने वर्चुअल मीटिंग में तीन अहम मुद्दों को उठाया:

  1. मोसिन नक़वी द्वारा भारत को जीत की बधाई न देना।
  2. भारत के जीतने के बावजूद ट्रॉफी और मेडल्स को आयोजन स्थल से अपने साथ ले जाना।
  3. ट्रॉफी को ACC मुख्यालय दुबई में रखने की भारत की मांग की अनदेखी।

BCCI अधिकारियों ने साफ किया कि उन्होंने जानबूझकर नक़वी से ट्रॉफी स्वीकार करने से इनकार किया, क्योंकि वह पाकिस्तान के एक वरिष्ठमंत्री भी हैं।

BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने इस फैसले को “सोचा-समझा और ठोस निर्णय” बताया। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अस्पोर्ट्समैनशिप वाला व्यवहार है। ट्रॉफी और मेडल्स को आयोजन स्थल से ले जाना किसी भी मानदंड के अनुसार स्वीकार्य नहीं है।”

ICC में दर्ज कराई जाएगी शिकायत

सैकिया ने आगे कहा कि भारत इस मामले को नवंबर में दुबई में होने वाली आईसीसी कॉन्फ्रेंस में भी उठाएगा। “हम आईसीसी में इस व्यवहार के खिलाफ एक गंभीर और औपचारिक विरोध दर्ज कराने जा रहे हैं,” उन्होंने कहा।

अब क्या?

फिलहाल ट्रॉफी UAE क्रिकेट बोर्ड को सौंप दी गई है, लेकिन भारत की मांग है कि ट्रॉफी और मेडल्स जल्द से जल्द भारतीय टीम को सौंपे जाएं। बैठक के दौरान मोसिन नक़वी ने इन मुद्दों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और चुप्पी साधे रखी, जिससे भारत की नाराज़गी और भी बढ़ गई है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंध पहले से ही संवेदनशील मोड़ पर हैं। ऐसे में ACC चेयरमैन की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

एशिया कप जीत के बाद यह विवाद भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों और बोर्ड के लिए अप्रत्याशित और अपमानजनक रहा है। अब निगाहें नवंबर में होने वाली ICC बैठक पर हैं, जहां भारत इस मामले को वैश्विक मंच पर ले जाकर ACC अध्यक्ष की ज़िम्मेदारियों पर सवाल खड़ा कर सकता है। यह मामला सिर्फ एक ट्रॉफी का नहीं, बल्कि खेल भावना और अंतरराष्ट्रीय खेल संचालन के मूल्यों का भी है।

Neeraj Ghaywan की फिल्म ‘Homebound’ क्यों गई ऑस्कार में, फिल्मी समझ वाले ही इस फिल्म को देंखे

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नई दिल्ली: मशहूर निर्देशक नीरज घेवान ने लगभग एक दशक बाद अपनी नई फिल्म ‘होमबाउंड’ के ज़रिए हिंदी सिनेमा में एक बार फिर वापसी की है। 2015 में आई फिल्म मसान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले नीरज ने ‘अजीब दास्तान्स’ की गीली पुच्ची जैसी यादगार कहानी के बाद कुछ वर्षों तक पर्दे से दूरी बनाए रखी। लेकिन इस बार उन्होंने जो सिनेमा रचा है, वह न सिर्फ एक फिल्म है, बल्कि एक सामाजिक और भावनात्मक दस्तावेज़ है—एक ऐसा बयान जिसे देखना हर दर्शक और हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है।

तीन किरदार, तीन संघर्ष

‘होमबाउंड’ की कहानी चंदन, शोएब और सुधा के इर्द-गिर्द घूमती है। ये तीनों किरदार उस समाज की तस्वीर सामने लाते हैं, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। चंदन एक दलित है, शोएब मुस्लिम, और दोनों अपनी पहचान से छुटकारा पाने की जद्दोजहद में हैं। दोनों मानते हैं कि वर्दी उन्हें वह सम्मान और सुरक्षा दे सकती है, जो उनकी जाति और मजहब नहीं दे पाए। फिल्म में एक मार्मिक दृश्य आता है, जब चंदन जनरल कैटेगरी से पुलिस भर्ती का फॉर्म भरता है और कहता है, “सही नाम लिखता हूं तो दूसरों से दूर हो जाता हूं, झूठा नाम लिखता हूं तो ख़ुद से दूर हो जाता हूं।”

यह संवाद ही नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी का मानसिक संघर्ष है जिसे नीरज घेवान ने बेहद संजीदगी से फिल्माया है।

कोविड महामारी की सबसे जरूरी झलक

‘होमबाउंड’ सिर्फ सामाजिक पहचान की बात नहीं करती, यह फिल्म कोविड महामारी के उस भुला दिए गए दौर को भी दोबारा जीने पर मजबूर करती है, जिसे दुनिया ने मानो जान-बूझकर भुला दिया। फिल्म आपको श्मशान के बीचोंबीच खड़ा कर देती है, जहां एक नहीं, अनगिनत लाशें जल रही हैं। यह महामारी की त्रासदी पर सिर्फ अफसोस नहीं जताती, बल्कि उस स्मृति को संरक्षित भी करती है जिसे इतिहास और सिनेमा दोनों ने अब तक गंभीरता से नहीं संभाला।

नीरज घेवान की यह कोशिश न सिर्फ साहसी है, बल्कि यह हिंदी सिनेमा की ओर से महामारी पर एक तरह की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी की पूर्ति भी है।

अभिनय की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे कलाकार

ईशान खट्टर और विशाल जेठवा ने अपने किरदारों को जिस गहराई से जिया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। ईशान पहले भी अपनी प्रतिभा से प्रभावित कर चुके हैं, लेकिन विशाल जेठवा का प्रदर्शन इस बार उन्हें एक नई लीग में पहुंचा देता है। निर्देशक अब उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते। वहीं जाह्नवी कपूर ने सुधा के किरदार में अपने करियर का सबसे दमदार और परिपक्व अभिनय प्रस्तुत किया है। उनकी मौजूदगी फिल्म को एक गहरी मानवीय संवेदना से भर देती है।

सिनेमा जो सिर्फ दिखाता नहीं, जगाता है

‘होमबाउंड’ वह फिल्म है जो थिएटर से निकलते समय दर्शक की जेब में कोई न कोई सवाल ज़रूर रख देती है। यह फिल्म बताती है कि सिनेमा का काम सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि याद दिलाना भी है याद दिलाना कि हम क्या थे, और अब क्या बन गए हैं। यह फिल्म सिखाती है कि उम्मीद अभी बाकी है, लेकिन आंखें खुली रखना जरूरी है।

‘होमबाउंड’ नीरज घेवान की एक ऐसी वापसी है जो सिर्फ फिल्मी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक घटना बन चुकी है। यह फिल्म उन कहानियों को आवाज देती है जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है। यह एक ऐसा अनुभव है जिसे देखे बिना इस दौर को समझना अधूरा रहेगा।

हिंदी सिनेमा को ऐसी फिल्मों की आज सबसे ज्यादा जरूरत है और ‘होमबाउंड’ इस जरूरत का एक शुद्ध, सशक्त और साहसी उत्तर है।

Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी ने BCCI से मांगी माफ़ी, लेकिन ट्रॉफी लौटाने से इनकार

Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी ने BCCI से मांगी माफ़ी, लेकिन ट्रॉफी लौटाने से इनकार
Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी ने BCCI से मांगी माफ़ी, लेकिन ट्रॉफी लौटाने से इनकार

दुबई: एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रमुख और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने मंगलवार (30 सितंबर) को एक बैठक में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से माफी मांगी। हालांकि, उन्होंने एशिया कप ट्रॉफी और भारतीय खिलाड़ियों के मेडल लौटाने से साफ इनकार कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, नक़वी अब लाहौर रवाना हो रहे हैं, जबकि ट्रॉफी विवाद अभी भी सुलझा नहीं है। बताया जा रहा है कि उन्होंने मांग की है कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव खुद दुबई आकर ट्रॉफी प्राप्त करें। इस पर बीसीसीआई की ओर से जवाब दिया गया, “जब वो आपके सामने खड़े थे तब उन्होंने ट्रॉफी नहीं ली, अब आपको लगता है कि वो आएंगे?”

इस अहम बैठक में बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और कोषाध्यक्ष आशीष शेलार ने हिस्सा लिया। उन्होंने ट्रॉफी विवाद को लेकर मोहसिन नकवी को घेरा और उनसे विजेता टीम भारत को ट्रॉफी लौटाने की मांग की। बैठक में नक़वी ने यह स्वीकार किया कि प्रेजेंटेशन सेरेमनी में जो कुछ हुआ, वह नहीं होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने अपना रुख नहीं बदला। बैठक के एजेंडे में कई और मुद्दे भी शामिल थे, लेकिन ट्रॉफी विवाद के चलते उन पर चर्चा नहीं हो सकी।

BCCI करेगी ICC में शिकायत दर्ज

बैठक के बाद यह भी सामने आया है कि बीसीसीआई अब मोहसिन नकवी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगी, क्योंकि एशिया कप एक आईसीसी स्वीकृत टूर्नामेंट है। सूत्रों के मुताबिक, एसीसी ने यह निर्णय भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान इन पांच टेस्ट खेलने वाले देशों पर छोड़ दिया है कि ट्रॉफी को लेकर अगला कदम क्या हो।

क्या हुआ था प्रेजेंटेशन सेरेमनी में?

एशिया कप फाइनल के बाद विवाद तब शुरू हुआ जब भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में ट्रॉफी को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। सेरेमनी एक घंटे से अधिक देर तक रुकी रही क्योंकि भारत ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। नक़वी मंच पर लंबे समय तक खड़े रहे, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने केवल व्यक्तिगत पुरस्कार ही स्वीकार किए, टीम ट्रॉफी लेने कोई नहीं गया। बाद में नक़वी विजेता ट्रॉफी और मेडल्स लेकर मंच से चले गए, जिससे विवाद और गहरा गया। अब यह देखना होगा कि इस ट्रॉफी विवाद का समाधान कैसे निकलेगा और आईसीसी इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

US Government Shutdown Mean: ट्रंप सरकार पर लगा ताल, इसका क्या मतलब है और किन पर पड़ेगा असर?

US Government Shutdown Mean: ट्रंप सरकार पर लगा ताल, इसका क्या मतलब है और किन पर पड़ेगा असर?
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वॉशिंगटन: अमेरिका में छह वर्षों के बाद एक बार फिर संघीय सरकार का शटडाउन हो गया है। बुधवार को सीनेट में फंडिंग बिल पास नहीं हो पाने के कारण सरकार की सभी गैर-जरूरी सेवाएं ठप हो गईं। यह संकट तब और गहरा गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय कर्मचारियों की नई छंटनी की चेतावनी दी।

सीनेट में 55-45 वोट से बिल पास नहीं हो पाया, जिससे आधी रात के बाद 12:01 बजे से शटडाउन लागू हो गया। यह 1981 के बाद अमेरिका में 15वां सरकारी शटडाउन है।

शटडाउन का असर किन-किन पर पड़ेगा?

इस शटडाउन के कारण कई अहम सेवाएं प्रभावित होंगी। सितंबर की रोजगार रिपोर्ट जारी नहीं होगी, हवाई यात्रा धीमी हो सकती है, वैज्ञानिक अनुसंधान रुकेगा, अमेरिकी सैनिकों को वेतन नहीं मिलेगा, और लगभग 7.5 लाख संघीय कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जाएगा। इससे सरकार को प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा।

सरकार का शटडाउन होता क्या है?

जब अमेरिकी कांग्रेस समय पर बजट पारित नहीं कर पाती और राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर नहीं करते, तब कई संघीय एजेंसियों को फंडिंग नहीं मिलती। जिन एजेंसियों की फंडिंग बाधित होती है, वे अपना कामकाज रोक देती हैं। इस दौरान गैर-जरूरी सेवाओं के कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजा जाता है।

शटडाउन के दौरान क्या होता है?

शटडाउन लागू होने के बाद “नॉन-एक्सेप्टेड” कर्मचारियों को फर्लो यानी अस्थायी छुट्टी पर भेजा जाता है। “एक्सेप्टेड” कर्मचारी — जैसे कि जीवन और संपत्ति की रक्षा से जुड़े लोग — काम पर तो बने रहते हैं लेकिन उन्हें वेतन शटडाउन खत्म होने तक नहीं मिलता।

व्हाइट हाउस का ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट सभी एजेंसियों को निर्देश देता है कि वे “शटडाउन गतिविधियां” शुरू करें। यह निर्देश मंगलवार शाम को जारी कर दिया गया था।

कौन-कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी?

एफबीआई, सीआईए, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डों पर सुरक्षा एजेंसियों का काम चलता रहेगा। सशस्त्र बलों के जवान ड्यूटी पर बने रहेंगे।

जो कार्यक्रम “अनिवार्य खर्च” पर आधारित हैं, वे शटडाउन के दौरान भी जारी रहते हैं। सोशल सिक्योरिटी पेमेंट्स जारी रहेंगी। बुजुर्ग लोग मेडिकेयर के तहत डॉक्टर से इलाज करवा सकेंगे और स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी।

पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाएं भी चालू रहेंगी। वेटरन्स अफेयर्स के अस्पताल और क्लीनिक खुले रहेंगे। पूर्व सैनिकों को मिलने वाले लाभ मिलते रहेंगे और राष्ट्रीय कब्रिस्तानों में दफन की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।

‘The Taj Story’ के पोस्टर पर क्यों बवाल, Paresh Rawal पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप

'The Taj Story' के पोस्टर पर क्यों बवाल, Paresh Rawal पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
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नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पहले ‘हेरा फेरी 3’ से अचानक बाहर होने और अक्षय कुमार से मनमुटाव को लेकर चर्चा में रहे परेश रावल अब अपनी आने वाली फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के मोशन पोस्टर को लेकर विवादों का केंद्र बन गए हैं।

मोशन पोस्टर में ताजमहल से प्रकट होते दिखे भगवान शिव

29 सितंबर को फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ का मोशन पोस्टर सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसमें परेश रावल ताजमहल के गुंबद को उठाते नजर आते हैं और उसके भीतर से भगवान शिव की प्रतिमा प्रकट होती है। इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त नाराजगी पैदा कर दी है।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

पोस्टर वायरल होते ही कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया। एक यूजर ने लिखा, “OMG! ये परेश रावल से उम्मीद नहीं थी।” वहीं, दूसरे ने कहा, “ये क्या बकवास है?” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “ऐसे लोग देश में अशांति फैलाना चाहते हैं।” कुछ ने अभिनेता पर पैसा कमाने के लिए धार्मिक भावनाओं का सहारा लेने का भी आरोप लगाया।

निर्माताओं और अभिनेता ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख फिल्म के निर्माताओं और परेश रावल ने इंस्टाग्राम पर सफाई दी। उनके पोस्ट में लिखा गया,
“द ताज स्टोरी के निर्माता यह स्पष्ट करते हैं कि यह फिल्म किसी भी धार्मिक मुद्दे से संबंधित नहीं है और न ही यह दावा करती है कि भगवान शिव ताजमहल के भीतर विराजमान हैं। यह फिल्म केवल ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। हम दर्शकों से अनुरोध करते हैं कि फिल्म देखने से पहले किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें। धन्यवाद। – स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड”

हालांकि सफाई जारी करने के बावजूद विरोध कम होने की बजाय और तेज हो गया है। कई यूजर्स ने इसे एक सोची-समझी रणनीति बताया और आरोप लगाया कि इस तरह के दृश्य देश में धार्मिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।

फिल्म के भविष्य पर संकट के बादल

जहां एक ओर फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ रही थी, वहीं अब इस विवाद ने ‘द ताज स्टोरी’ के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। धार्मिक संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने सेंसर बोर्ड से फिल्म की गहन जांच की मांग की है।

फिलहाल यह देखना बाकी है कि विवाद के बीच फिल्म रिलीज तक पहुंच पाती है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि परेश रावल और ‘द ताज स्टोरी’ की टीम को अब भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

Philippines Earthquake: फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 31 से अधिक लोगों की मौत, कई घायल

Philippines Earthquake: फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 31 से अधिक लोगों की मौत, कई घायल
Philippines Earthquake: फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 31 से अधिक लोगों की मौत, कई घायल

मनीला: फिलीपींस के सेबू प्रांत में मंगलवार को आए 6.9 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 31 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हैं। भूकंप के कारण कई इमारतें और घर ढह गए, बिजली आपूर्ति ठप हो गई और लोग भय से अपने घरों से बाहर निकल आए।

बोगो शहर बना तबाही का केंद्र

भूकंप का केंद्र सेबू प्रांत के तटीय शहर बोगो से 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित था, जहां कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है। बोगो की आबादी लगभग 90,000 है। आपदा प्रबंधन अधिकारी रेक्स यगोट ने बताया कि पहाड़ी इलाके में भूस्खलन और चट्टानों के गिरने से कई लोग मलबे में दब गए हैं।

रेक्स यगोट ने कहा, “इलाके में भारी जोखिम है, लेकिन बचाव कार्य जारी है। एक बैकहो (मशीन) को मौके पर भेजा जा रहा है ताकि राहत कार्य में तेजी लाई जा सके।”

सैन रेमिगियो में छह की मौत

बोगो से दक्षिण में स्थित सैन रेमिगियो कस्बे में छह लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन कोस्ट गार्ड कर्मी, एक दमकलकर्मी और एक बच्चा शामिल हैं। उप मेयर अल्फी रेयनेस ने जानकारी दी कि भूकंप से नगर की जलापूर्ति प्रणाली भी क्षतिग्रस्त हो गई है और वहां खाद्य एवं जल संकट पैदा हो गया है।

कई इमारतें और सड़कें क्षतिग्रस्त

दमकलकर्मी रे कैनेटे ने बताया कि भूकंप ने बोगो में कई घरों की कंक्रीट की दीवारें, फायर स्टेशन और सड़कों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया। “हम अपने बैरक में थे जब अचानक धरती कांपने लगी, और हम भागने की कोशिश में गिर गए,” उन्होंने बताया।

भूकंप के बाद सैकड़ों लोग फायर स्टेशन के पास एक खुले मैदान में जमा हो गए और डर के कारण घंटों तक अपने घरों में वापस नहीं लौटे।

व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान

भूकंप से कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा है। सड़कें फट गई हैं और पास के दानबांतायन कस्बे में स्थित एक पुराना रोमन कैथोलिक चर्च भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी

फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंपीय संस्थान ने शुरुआत में सुनामी की चेतावनी जारी की थी और लोगों को सेबू, लेयते और बिलिरान प्रांतों के तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई थी। हालांकि बाद में चेतावनी वापस ले ली गई क्योंकि किसी असामान्य लहर की पुष्टि नहीं हुई।

हाल ही में तूफान से भी हुआ था भारी नुकसान

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही मध्य फिलीपींस में आए एक तूफान से 27 लोगों की जान चली गई थी। तूफान के चलते कई शहरों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था। सेबू की गवर्नर पामेला बारिकुआत्रो ने फेसबुक पर एक वीडियो संदेश में कहा, “स्थिति अनुमान से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है। हमें पूरी तस्वीर सुबह तक ही मिल पाएगी।” फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

October Holidays 2025: ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट, कब-कब बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज?

October Holidays 2025: ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट, कब-कब बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज?
October Holidays 2025: ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट, कब-कब बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज?

नई दिल्ली: देशभर में नवरात्रि और दशहरे की धूम के बीच स्कूलों की छुट्टियों को लेकर माता-पिता और छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बार दशहरा 2 अक्टूबर को पड़ रहा है, जो कि गांधी जयंती के साथ संयोग बना रहा है। ऐसे में कई राज्यों में छुट्टियों को लेकर अलग-अलग घोषणाएं की गई हैं।

कुछ राज्यों में छुट्टियां 1 और 2 अक्टूबर तक सीमित हैं, जबकि कई जगहों पर स्कूल 5 या 6 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। हालांकि, निजी स्कूलों का शेड्यूल अलग हो सकता है, इसलिए अभिभावकों को स्कूल से आधिकारिक पुष्टि करने की सलाह दी गई है।

इन राज्यों में घोषित की गई हैं छुट्टियां:

उत्तर प्रदेश:
1 और 2 अक्टूबर को दशहरा और गांधी जयंती के अवसर पर सभी स्कूल बंद रहेंगे।

बिहार:
राज्य के अधिकांश जिलों में स्कूल 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। वहीं कुछ जिलों में छुट्टी 5 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है।

दिल्ली:
राजधानी में 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश है। कक्षाएं 3 अक्टूबर से शुरू होंगी। हालांकि प्राइवेट स्कूलों में यह शेड्यूल अलग हो सकता है।

झारखंड:
यहां सरकारी स्कूलों में 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक छुट्टी रहेगी। कुछ स्कूलों में यह अवधि 5 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है।

ओडिशा:
राज्य में 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्कूल बंद रहेंगे। कक्षाएं 3 अक्टूबर से फिर शुरू होंगी।

पश्चिम बंगाल:
दुर्गा पूजा के चलते यहां स्कूल 24 सितंबर से ही बंद कर दिए गए हैं और ये 6 अक्टूबर तक बंद रहेंगे।

तेलंगाना:
राज्य में स्कूल 21 सितंबर से ही बंद हैं। अब 3 अक्टूबर से कक्षाएं दोबारा शुरू होंगी।

निजी स्कूलों के लिए अलग हो सकता है शेड्यूल
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि निजी स्कूल अपने हिसाब से छुट्टियों का शेड्यूल बना सकते हैं। इसलिए अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चे के स्कूल से आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

इस त्योहारी माहौल में स्कूलों की छुट्टियां बच्चों के लिए एक बड़ा अवसर हैं, जब वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं और त्योहारों की खुशियों का आनंद ले सकते हैं।

Pawan Vs Tej Pratap Yadav News: “कभी हमारे पैर पर गिरे थे” पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की अटकलों पर तेज प्रताप यादव का तीखा हमला

Pawan Vs Tej Pratap Yadav News:
Pawan Vs Tej Pratap Yadav News: "कभी हमारे पैर पर गिरे थे" पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की अटकलों पर तेज प्रताप यादव का तीखा हमला

पटना: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की बीजेपी में संभावित वापसी को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। मंगलवार को दिल्ली में पवन सिंह ने एनडीए के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भाजपा में दोबारा शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

तेज प्रताप यादव, जो कभी आरजेडी का हिस्सा थे और अब अपनी अलग पार्टी चला रहे हैं, ने पवन सिंह पर निजी हमला करते हुए कहा, “इनका यही काम है, कलाकारों को पकड़ना। खासकर पवन सिंह जैसा व्यक्ति जो कभी लखनऊ में हमारे पैर पर गिरा हुआ था, अब किसी और के पैर पर गिरने चला गया है।”

“कलाकारी करें, राजनीति नहीं” – तेज प्रताप

तेज प्रताप ने आगे कहा, “ये लोग लगातार किसी न किसी के पैर में गिरते रहते हैं। इनकी बुद्धि और विवेक काम नहीं कर रही है। पवन सिंह क्या करेंगे, क्या नहीं करेंगे, वह खुद जानें। वह एक कलाकार हैं, उन्हें केवल अपनी कलाकारी पर ध्यान देना चाहिए।”

हालांकि, पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से छठमहापर्व को यूनेस्को में दर्ज कराने की पहल पर तेज प्रताप ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा, “यह अच्छी बात है। यह लोक आस्था का विषय है और अगर कोई इसे आगे बढ़ा रहा है तो उसका स्वागत है।”

एनडीए नेताओं से पवन सिंह की अहम मुलाकातें

मंगलवार को पवन सिंह ने दिल्ली में एनडीए के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की। सबसे पहले उन्होंने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से भेंट की। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी उनकी बैठक हुई। इस दौरान बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े भी मौजूद थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकातें पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की ओर इशारा कर रही हैं। बीते लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने भाजपा से टिकट न मिलने के कारण काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिससे एनडीए को नुकसान हुआ था।

अब माना जा रहा है कि बीजेपी, पवन सिंह की लोकप्रियता को भुनाकर आगामी विधानसभा चुनाव में शाहाबाद क्षेत्र समेत पूरे बिहार में जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

तेज प्रताप यादव के बयान से साफ है कि पवन सिंह की सक्रियता से विपक्षी दलों में हलचल तेज हो गई है, और आगामी चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में यह मामला एक बड़ा मोड़ ले सकता है।

Pawan Singh News: पवन सिंह की अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी में वापसी के संकेत

Pawan Singh News: पवन सिंह की अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी में वापसी के संकेत
Pawan Singh News: पवन सिंह की अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी में वापसी के संकेत

पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। मंगलवार, 30 सितंबर 2025 को भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार और चर्चित चेहरे पवन सिंह ने एक ही दिन में तीन बड़े नेताओं से मुलाकात कर राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी।

पवन सिंह ने सबसे पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की। इसके तुरंत बाद वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले। यह बैठक लगभग 30 मिनट तक चली, हालांकि इस दौरान पवन सिंह ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और बैठक के बाद चुपचाप निकल गए। दिन का समापन उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के साथ किया, जो उनके आवास पर हुई।

बीजेपी में वापसी के कयास तेज

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन मुलाकातों के बाद पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, जिससे एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को नुकसान उठाना पड़ा था।

अब माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व पवन सिंह की लोकप्रियता को भुनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, खासकर शाहाबाद क्षेत्र की 22 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए।

युवाओं और सिनेप्रेमियों में पवन सिंह का प्रभाव

पवन सिंह का बिहार के युवाओं और सिने प्रेमियों के बीच व्यापक प्रभाव है। पार्टी नेतृत्व उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाकर खासकर ग्रामीण और युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

बताया जा रहा है कि अमित शाह स्वयं बिहार चुनाव की रणनीति पर नजर रख रहे हैं और पार्टी हर मोर्चे पर सतर्कता बरत रही है।

बीते चुनाव में आसनसोल से किया था इनकार, काराकाट से लड़े थे चुनाव

लोकसभा चुनाव से पहले पवन सिंह ने भाजपा का दामन थामा था और उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से टिकट की पेशकश की गई थी। हालांकि उन्होंने यह कहकर इनकार कर दिया कि वे बिहार से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, पवन सिंह की सक्रियता और भाजपा नेताओं से करीबी मुलाकातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि वे एक बार फिर पार्टी में वापसी की ओर अग्रसर हैं।

शाहाबाद की सियासत में नया मोड़

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पवन सिंह की वापसी से शाहाबाद क्षेत्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। साथ ही, बीजेपी जनसुराज पार्टी जैसी उभरती ताकतों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरों पर दांव खेल रही है।

फिलहाल, पवन सिंह की इन अहम मुलाकातों ने चुनावी मौसम में नई सरगर्मी ला दी है और यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आने वाले दिनों में क्या राजनीतिक कदम उठाते हैं।