लूथरा बंधुओं के प्रत्यर्पण पर लाइव अपडेट: गौरव और सौरभ लूथरा को मंगलवार दोपहर थाईलैंड से निर्वासित किए जाने के बाद दिल्ली लाया गया।
उत्तर गोवा के अर्पोरा स्थित बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के मालिक गौरव और सौरभ लूथरा को गोवा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसी नाइटक्लब में 6 दिसंबर को लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, थाईलैंड से निर्वासित होकर दिल्ली पहुंचने के बाद जैसे ही दोनों भाई हवाई अड्डे से बाहर आए, गोवा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत में पेश किया जाएगा, जिसके बाद गोवा ले जाया जाएगा।
दिल्ली के रहने वाले ये कारोबारी 6 दिसंबर को हुई आग की घटना के लगभग 90 मिनट बाद ही थाईलैंड के फुकेट शहर भाग गए थे। इस हादसे में 25 लोगों की जान चली गई थी।
दोनों भाइयों को वापस भारत लाने के लिए भारतीय अधिकारियों ने थाईलैंड की एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से संपर्क किया था। इंटरपोल की मदद से भारत सरकार ने उनके खिलाफ ब्लू नोटिस भी जारी कराया था।
इससे पहले भारतीय दूतावास ने लूथरा बंधुओं के लिए दो आपातकालीन यात्रा प्रमाणपत्र जारी किए थे। उनके पासपोर्ट पहले जब्त किए गए और बाद में विदेश मंत्रालय द्वारा रद्द कर दिए गए थे।
मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और दोनों आरोपियों को जल्द अदालत में पेश किया जाएगा।
महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे, जबकि मतगणना 16 जनवरी को की जाएगी। राज्य चुनाव आयोग ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, इन 29 नगर निगमों में कुल 2,869 सीटों पर चुनाव होंगे।
राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नामांकन प्रक्रिया 23 दिसंबर से शुरू होगी और 30 दिसंबर तक चलेगी।
इन नगर निगम चुनावों में लगभग 3.48 करोड़ मतदाता मतदान के पात्र होंगे। जिन प्रमुख शहरों में चुनाव होंगे, उनमें मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर शामिल हैं।
महाराष्ट्र में ‘वोट चोरी’ विवाद
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब मुंबई में कथित “वोट चोरी” को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में फर्जी और डुप्लीकेट नाम जोड़े गए हैं।
BMC ने मतदाता सूची को साफ करने की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मुंबई के सभी 227 वार्डों में अपनी अलग जांच मुहिम शुरू की है।
पार्टी का दावा है कि उसके कार्यकर्ताओं ने हजारों फर्जी और डुप्लीकेट मतदाता नामों की पहचान की है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। शिवसेना (UBT) का यह भी कहना है कि कई पुराने स्थानीय निवासियों, खासकर मराठी मतदाताओं, के नाम गलत तरीके से डुप्लीकेट बताकर सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे उनके मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
ये चुनाव शिवसेना (UBT) के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला BMC चुनाव होगा। इस चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट का सीधा मुकाबला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट से होगा, जो महाराष्ट्र में भाजपा नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है।
मोटी सैलरी और बड़े पैकेज से आगे बढ़ते हुए, मेटा की भर्ती रणनीति अब कुछ ज्यादा ही व्यक्तिगत होती दिख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग शीर्ष एआई विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए घर का बना सूप तक पहुंचा रहे हैं।
ओपनएआई के मुख्य शोध अधिकारी मार्क चेन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बताया कि जिन लोगों को मेटा अपनी टीम में शामिल करना चाहता था, उनके लिए जुकरबर्ग खुद घर का बना सूप लेकर पहुंचे थे। चेन ने कहा कि यह देखकर वह काफी हैरान रह गए थे।
मेटा पहले से ही एआई टैलेंट को भर्ती करने पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है और प्रतिस्पर्धी कंपनियों से विशेषज्ञों को लाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जुकरबर्ग का यह तरीका दिखाता है कि वह सिर्फ पैसों पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संबंध बनाने पर भी जोर दे रहे हैं।
चेन ने मजाक में कहा कि यह विचार उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने सोचा कि वह भी भविष्य में ऐसा कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वह घर के बने सूप की जगह मिशेलिन-स्टार शेफ द्वारा बनाया गया सूप लेकर जाएंगे।
यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने एआई विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए अलग रणनीति अपनाई हो। इससे पहले खबरें आई थीं कि मेटा ने ओपनएआई की पूर्व सीटीओ मीरा मुराती के नए एआई स्टार्टअप के कर्मचारियों को अपनी ओर लाने के लिए बेहद बड़े पैकेज, यहां तक कि अरबों डॉलर तक के प्रस्ताव दिए थे। हालांकि उन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया गया।
तकनीकी कंपनियों के बीच सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को हासिल करने की होड़ अब केवल पैसे, सुविधाओं या प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं रह गई है।
अब लगता है कि इस प्रतिस्पर्धा में सूप भी एक नया हथियार बन गया है।
अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में कम से कम 21 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति जीवित बच गया। मजदूरों को ले जा रहा एक ट्रक मेटेंगलियांग के पास पहाड़ी सड़क से फिसलकर गहरी खाई में गिर गया।
यह हादसा 8 दिसंबर को हुआ था, लेकिन इसकी जानकारी दो दिन बाद तब मिली जब हादसे में बचा एकमात्र व्यक्ति किसी तरह बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स (BRTF) के शिविर तक पहुंचा और अधिकारियों को घटना की सूचना दी।
अंजॉ के पुलिस अधीक्षक अनुराग द्विवेदी के अनुसार, 22 मजदूरों का एक समूह 7 दिसंबर को असम के तिनसुकिया जिले से चागलागाम के लिए रवाना हुआ था, जहां वे निर्माण कार्य में लगे हुए थे। जब वे 10 दिसंबर तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचे, तो उनके साथियों ने हयूलियांग पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद पुलिस ने मजदूरों की तलाश शुरू की। इसी दौरान BRTF शिविर से सूचना मिली कि एक घायल व्यक्ति वहां पहुंचा है। उसने बताया कि जिस ट्रक में वह यात्रा कर रहा था, वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें उसके अलावा 21 अन्य मजदूर भी सवार थे।
घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए तेजू के रास्ते असम भेजा गया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसा 8 दिसंबर की रात 8 से 9 बजे के बीच चागलागाम से लगभग 11 किलोमीटर दूर हुआ। ट्रक पहाड़ी सड़क पर फिसलकर गहरी खाई में जा गिरा।
इलाके में मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण यह हादसा करीब दो दिनों तक किसी की जानकारी में नहीं आ सका।
बचे हुए व्यक्ति की जानकारी के आधार पर प्रशासन ने संभावित दुर्घटनास्थल का पता लगाया। इसके बाद सेना, सीमा सड़क संगठन (BRO), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया। सहायता के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम भी बुलाई गई है।
उप पुलिस अधीक्षक (DySP) हाबुंग सामा ने बताया, “अब तक 17 शवों का पता लगाया जा चुका है और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास जारी है। खाई लगभग 700 मीटर गहरी है, जिससे राहत कार्य बेहद कठिन हो गया है।”
अधिकारियों ने बताया कि 22 मजदूरों में से 18 मजदूर असम के तिनसुकिया जिले स्थित गिलापुखुरी चाय बागान के निवासी थे। फिलहाल मामले को दुर्घटना मानकर जांच की जा रही है।
मन और पेट का संबंध: राम वर्मा से प्रेरित एनएलपी का एक दृष्टिकोण
आजकल मन और पेट (गट-ब्रेन कनेक्शन) के संबंध पर काफी चर्चा हो रही है। बहुत से लोग महसूस करते हैं कि जब वे तनाव, चिंता या तीव्र भावनाओं से गुजरते हैं, तो उसका असर सबसे पहले उनके पेट पर दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा मस्तिष्क और पाचन तंत्र एक-दूसरे से दो-तरफा संचार प्रणाली के माध्यम से जुड़े होते हैं।
यह लेख एनएलपी (न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग) विशेषज्ञ राम वर्मा की सरल और जीवन बदलने वाली सीखों से प्रेरित है।
छोटे-छोटे मानसिक बदलाव आपकी सोच, ऊर्जा और यहां तक कि शरीर की प्रतिक्रिया को भी बदल सकते हैं।
हालांकि पेट का स्वास्थ्य मुख्य रूप से खान-पान, जीवनशैली और चिकित्सकीय कारणों पर निर्भर करता है, लेकिन हमारी मानसिक स्थिति और भावनाएं भी उस पर प्रभाव डालती हैं। एनएलपी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत, जिसे राम वर्मा जैसे विशेषज्ञ समझाते हैं, यह है कि हमारी सोच और भावनात्मक आदतें शरीर की प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं।
मन का पेट पर प्रभाव
जब व्यक्ति मानसिक तनाव, डर, दबाव या अधिक सोचने की स्थिति में होता है, तो उसका असर शरीर पर भी पड़ता है। कई लोगों को निम्न समस्याएं महसूस होती हैं:
पेट में कसाव या भारीपन
भूख कम लगना
बेचैनी और घबराहट
कब्ज या दस्त
असहजता और थकान
एनएलपी सीधे तौर पर पेट की बीमारियों का इलाज नहीं करता, लेकिन यह समझने में मदद करता है कि हमारी मानसिक स्थिति और शारीरिक अनुभव एक-दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं।
राम वर्मा अक्सर कहते हैं कि जब हमारी भावनाएं शांत और सकारात्मक होती हैं, तो शरीर भी स्वाभाविक रूप से संतुलन की स्थिति में आने लगता है।
एनएलपी का दृष्टिकोण: आपकी मानसिक अवस्था तय करती है आपकी प्रतिक्रिया
एनएलपी के अनुसार, हमारा शरीर हमारी आंतरिक बातचीत और भावनात्मक स्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देता है।
उदाहरण के लिए:
नकारात्मक सोच आंतरिक तनाव बढ़ा सकती है।
शांत और सकारात्मक सोच शरीर को आराम की स्थिति में ला सकती है।
आत्मविश्वास से भरी सोच और बातचीत ऊर्जा बढ़ा सकती है।
किसी परिस्थिति को नए नजरिए से देखना तनाव कम कर सकता है।
कई बार हमारा मन ही यह तय करता है कि हम किसी स्थिति को कैसे महसूस करेंगे और उस पर शरीर कैसी प्रतिक्रिया देगा।
कुछ सरल एनएलपी तकनीकें
1. विचारों को नया नजरिया देना (Reframing) किसी कठिन परिस्थिति को देखने का तरीका बदलें।
“यह बहुत मुश्किल है” की जगह सोचें — “मैं इसे एक-एक कदम करके संभाल सकता हूं।”
2. अपनी मानसिक अवस्था को संभालना
कुछ क्षण रुकना, गहरी सांस लेना और खुद को वर्तमान में लाना शरीर को शांत करने में मदद कर सकता है।
3. खुद से बेहतर भाषा में बात करना
नकारात्मक आत्म-वार्ता की जगह सकारात्मक और रचनात्मक शब्दों का उपयोग भावनात्मक दबाव कम कर सकता है।
4. नकारात्मक पैटर्न तोड़ना
खड़े होना, शरीर की मुद्रा बदलना या ध्यान किसी अन्य कार्य पर लगाना तनाव के चक्र को तोड़ सकता है।
आज के समय में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
आधुनिक जीवन में काम का दबाव, समय-सीमाएं और लगातार डिजिटल दुनिया से जुड़े रहना आम बात हो गई है।
इन सभी का असर हमारी भावनाओं और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है।
मन और पेट के इस संबंध को समझने से लोग अधिक संतुलित, एकाग्र और उत्पादक बन सकते हैं।
अंतिम विचार
मन और पेट का रिश्ता बहुत गहरा है। एनएलपी हमें यह समझने का एक नया नजरिया देता है कि हमारी सोच और भावनात्मक आदतें हमारे रोजमर्रा के अनुभवों को कैसे प्रभावित करती हैं।
जैसा कि राम वर्मा अक्सर कहते हैं:
“जब आप अपनी आंतरिक स्थिति बदलते हैं, तो आपकी बाहरी दुनिया भी बदलने लगती है।”
टोक्यो में रहने वाली एक भारतीय महिला ने सोमवार शाम जापान में आए 7.6 तीव्रता के भूकंप के दौरान अपने डरावने अनुभव साझा किए हैं।
एक वीडियो में उन्होंने हिंदी में कहा, “इतना तेज भूकंप था कि मेरी तो जान ही निकल गई थी, क्योंकि वह रुक ही नहीं रहा था।” उन्होंने बाद में अपने रिहायशी परिसर को भी दिखाया और बताया कि वहां का कोई भी निवासी बाहर नहीं निकला। उनके अनुसार, जापान के लोगों को अपनी इमारतों की मजबूती पर पूरा भरोसा है और वे मानते हैं कि तेज भूकंप के दौरान भी इमारतें उन्हें सुरक्षित रखेंगी।
उत्तरी जापान में पहुंचीं सुनामी की लहरें
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने पुष्टि की है कि भूकंप के बाद उत्तरी जापान के कई इलाकों में सुनामी की लहरें पहुंचीं।
होक्काइडो के उराकावा शहर और आओमोरी के मुत्सु ओगावारा बंदरगाह पर सुनामी की लहरें दर्ज की गईं।
इवाते प्रांत के कुजी बंदरगाह पर 50 सेंटीमीटर ऊंची लहर पहुंची, जबकि कई अन्य तटीय इलाकों में 40 से 50 सेंटीमीटर तक की लहरें देखी गईं।
इससे पहले अधिकारियों ने चेतावनी जारी की थी कि उत्तर-पूर्वी तट पर तीन मीटर तक ऊंची लहरें पहुंच सकती हैं। यह चेतावनी होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रांतों के लिए जारी की गई थी, जहां भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
कई लोग घायल
स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में कई लोग घायल हुए हैं।
सरकारी प्रसारक संस्थानों ने बताया कि आओमोरी प्रांत के हाचिनोहे शहर के एक होटल में कई लोग घायल हो गए।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप भारतीय समयानुसार रात में आया और इसकी गहराई लगभग 53.1 किलोमीटर थी। इसका केंद्र उत्तरी जापान के मिसावा शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित था।
भूकंप के झटके जापान के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में व्यापक रूप से महसूस किए गए, जिसके बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी अलर्ट जारी किया गया।
सरकार ने बनाई आपातकालीन टीम
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने नुकसान का आकलन करने और राहत कार्यों की निगरानी के लिए एक आपातकालीन टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
सावधानी के तौर पर ईस्ट जापान रेलवे ने कई ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं।
भूकंप के लिए संवेदनशील है जापान
जापान प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत बड़े भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण जापान में भूकंप से निपटने के लिए व्यापक तैयारी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। जुलाई में रूस के कामचटका क्षेत्र में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप के बाद भी कई देशों में सुनामी की लहरें देखी गई थीं।
2011 में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी से मिली सीख के आधार पर जापान आज भी उच्च स्तर की सतर्कता बनाए हुए है।
लगातार चौथे दिन देशभर के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा क्योंकि इंडिगो की कई उड़ानें देरी से चल रही हैं या रद्द की जा रही हैं। बड़े शहरों के हवाई अड्डों पर लंबी कतारें और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। 5 दिसंबर को इंडिगो की 400 से अधिक उड़ानें रद्द होने की खबर है, जिससे यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। एक दिन पहले छह प्रमुख मेट्रो हवाई अड्डों पर एयरलाइन का ऑन-टाइम प्रदर्शन केवल 8.5% रह गया था।
उड़ानों में देरी और रद्द होने की वजह क्या है?
इंडिगो ने इसके लिए कई कारण बताए हैं। एयरलाइन के अनुसार तकनीकी समस्याएं, मौसम की खराब स्थिति, हवाई यातायात का दबाव, मौसमी शेड्यूल में बदलाव और पायलटों के लिए लागू किए गए नए ड्यूटी नियम (FDTL) मिलकर इस स्थिति का कारण बने हैं।
हालांकि, समस्या की जड़ इससे भी गहरी बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार द्वारा पायलटों के आराम और उड़ान घंटों से जुड़े सख्त नियम लागू किए जाने के बाद इंडिगो को अपने पायलटों की ड्यूटी शेड्यूलिंग में कठिनाई हो रही थी। ये नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम पायलटों की थकान कम करने के लिए लाए गए थे।
इन नियमों को दो चरणों में लागू किया गया:
1 जुलाई से: पायलटों का साप्ताहिक आराम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया।
1 नवंबर से: रात में उड़ान भरने के घंटों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लागू किए गए।
एयरलाइनों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि नवंबर में लागू होने वाले नए नियमों के कारण अधिक पायलटों की जरूरत पड़ेगी और उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है। सरकार ने तैयारी के लिए अतिरिक्त समय भी दिया था, लेकिन माना जा रहा है कि इंडिगो की योजना पर्याप्त नहीं थी।
दूसरे चरण के पूरी तरह लागू होने के बाद एयरलाइन को पायलटों की ड्यूटी सूची बनाने में दिक्कत आने लगी। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने कुछ पायलटों से छुट्टियां वापस लेने का अनुरोध भी किया और स्टाफ की कमी की चेतावनी दी।
वहीं, कई पायलट पहले से ही लंबे कार्य घंटों, कंपनी के मुनाफे के बावजूद वेतन वृद्धि न होने और नए नियमों को लेकर असंतोष जताते रहे हैं। इससे स्थिति और जटिल हो गई।
इंडिगो ने क्या माना?
4 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और डीजीसीए प्रमुख फैज़ किदवई के साथ हुई बैठक में इंडिगो अधिकारियों ने स्वीकार किया कि योजना बनाने में कमी और गलत आकलन वर्तमान संकट की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
कंपनी के सीईओ पीटर एल्बर्स ने भी आंतरिक संदेश में माना कि इंडिगो जैसे बड़े नेटवर्क में छोटी समस्या भी तेजी से पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है।
हालात कब सामान्य होंगे?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मंत्रालय के अनुसार 6 दिसंबर से उड़ानों की स्थिति में सुधार शुरू होने की उम्मीद है, जबकि अगले तीन दिनों के भीतर संचालन पूरी तरह सामान्य हो सकता है, यदि सभी उपाय योजना के अनुसार लागू किए जाते हैं।
इस बीच, इंडिगो ने डीजीसीए से अनुरोध किया है कि नए रात की उड़ानों से जुड़े प्रतिबंधों में 10 फरवरी तक अस्थायी राहत दी जाए। डीजीसीए ने कहा है कि वह इस अनुरोध पर विचार करेगा।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। शुरुआत रक्षा सहयोग से हुई, फिर बदलते वैश्विक हालात के बीच यह संबंध और मजबूत हुए, और अब दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। 2025 के अंत में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले एक बड़ा सवाल चर्चा में है:
क्या भारत और रूस वास्तव में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचा सकते हैं?
व्यापार में तेज़ बढ़ोतरी
2024–25 के आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापार में तेज़ वृद्धि हुई है:
भारत ने 2024 में रूस से 64.23 अरब डॉलर का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5% अधिक है।
रूस को भारत का निर्यात 4.91 अरब डॉलर रहा, जिसमें 2% की बढ़ोतरी हुई।
कुल द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 69.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
2025 की पहली छमाही में ही व्यापार 33.12 अरब डॉलर का रहा।
रूस अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात रहा है। दोनों देश जानते हैं कि केवल तेल पर निर्भर रहकर 100 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
पुतिन की यात्रा से पहले नई रणनीति
4-5 दिसंबर 2025 को होने वाली पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की योजना बना रहे हैं।
इसका उद्देश्य है:
तेल और रक्षा क्षेत्र से आगे व्यापार का विस्तार करना।
रूस से विमान, मिसाइल सिस्टम और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे नए निर्यात बढ़ाना।
भारत से समुद्री उत्पाद, कृषि वस्तुएं, दवाइयां और मशीनरी का निर्यात बढ़ाना।
व्यापार असंतुलन कम करना।
पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण प्रभावित आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना।
व्यापार बढ़ा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी
2022 से पहले भारत-रूस व्यापार 10 अरब डॉलर से भी कम था। अब यह लगभग 69 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
लेकिन समस्या यह है कि:
भारत का रूस से आयात: 60 अरब डॉलर से अधिक
भारत का रूस को निर्यात: 5 अरब डॉलर से कम
यानी भारत का व्यापार घाटा लगभग 59 अरब डॉलर है, जो किसी भी देश के साथ उसके सबसे बड़े व्यापार घाटों में से एक है।
तेल ने भारत की ऊर्जा लागत कम करने में मदद की है, लेकिन इससे व्यापार एक ही वस्तु पर अत्यधिक निर्भर भी हो गया है।
100 अरब डॉलर का लक्ष्य अभी क्यों संभव लगता है?
1. रूस को नए आपूर्तिकर्ताओं की जरूरत
यूक्रेन युद्ध के बाद लगे प्रतिबंधों के कारण रूस को नए आपूर्तिकर्ताओं की जरूरत है, जैसे:
दवाइयां
मशीनरी
खाद्य उत्पाद
इलेक्ट्रॉनिक्स
रसायन
औद्योगिक उपकरण
भारत इन सभी क्षेत्रों में रूस की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
2. भारत को नए निर्यात बाजार चाहिए
भारतीय उद्योग और दवा कंपनियां नए बाजारों की तलाश में हैं। रूस उन्हें:
बड़ी मांग
कम प्रतिस्पर्धा
मजबूत खरीद क्षमता
जैसे अवसर प्रदान करता है।
3. स्थानीय मुद्रा में व्यापार
रुपया-रूबल भुगतान प्रणाली डॉलर पर निर्भरता कम करती है और वित्तीय प्रतिबंधों के प्रभाव को घटाती है।
4. मजबूत ऊर्जा साझेदारी
भारत को रूस से कच्चा तेल, कोयला, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की जरूरत है, जबकि रूस को बड़े और भरोसेमंद खरीदारों की आवश्यकता है।
5. बड़े निवेश की संभावनाएं
दोनों देश मिलकर इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं:
उर्वरक उत्पादन
शिपिंग कॉरिडोर
फार्मा निर्माण
श्रमिक गतिशीलता
बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स
पेट्रोकेमिकल परियोजनाएं
रूस से भारत क्या आयात करता है?
2024-25 के दौरान भारत के प्रमुख आयात:
खनिज ईंधन और तेल – 57.17 अरब डॉलर
पशु और वनस्पति तेल – 2.16 अरब डॉलर
उर्वरक – 1.67 अरब डॉलर
कीमती पत्थर और धातुएं – 665 मिलियन डॉलर
सब्जियां – 460 मिलियन डॉलर
लोहा और इस्पात – 398 मिलियन डॉलर
कागज और पेपरबोर्ड – 150 मिलियन डॉलर
नमक, चूना और सीमेंट – 108 मिलियन डॉलर
परमाणु रिएक्टर और मशीनरी – 93 मिलियन डॉलर
अकार्बनिक रसायन – 85 मिलियन डॉलर
भारत रूस को क्या निर्यात करता है?
भारत के प्रमुख निर्यात:
परमाणु रिएक्टर और मशीनरी – 1.13 अरब डॉलर
विद्युत मशीनरी और उपकरण – 431 मिलियन डॉलर
दवा उत्पाद – 419 मिलियन डॉलर
जैविक रसायन – 367 मिलियन डॉलर
अकार्बनिक रसायन – 222 मिलियन डॉलर
अन्य रासायनिक उत्पाद – 166 मिलियन डॉलर
सिरेमिक उत्पाद – 146 मिलियन डॉलर
लोहा और इस्पात – 141 मिलियन डॉलर
चिकित्सा एवं शल्य उपकरण – 131 मिलियन डॉलर
मछली और समुद्री उत्पाद – 125 मिलियन डॉलर
क्या 100 अरब डॉलर का लक्ष्य वास्तविक है?
हां, लेकिन इसके लिए व्यापार ढांचे में बदलाव जरूरी होगा।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत और रूस को:
कच्चे तेल पर निर्भरता कम करनी होगी।
भारत के निर्यात को तेजी से बढ़ाना होगा।
संयुक्त परियोजनाओं और निवेश को बढ़ावा देना होगा।
लॉजिस्टिक्स और शिपिंग नेटवर्क को मजबूत बनाना होगा।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार का विस्तार करना होगा।
दीर्घकालिक आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करनी होंगी।
राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक सहयोग की संभावनाएं और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां भारत-रूस आर्थिक संबंधों को एक नए दौर में ले जाने का अवसर प्रदान कर रही हैं। 2030 तक 100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही रणनीति के साथ इसे हासिल किया जा सकता है।
हांगकांग के ताई पो स्थित वांग फुक कोर्ट में लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या 128 हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं. तीन दिन बाद बचाव अभियान रोक दिया गया है. आग लगने के कारण की जांच शुरू हो गई है और पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया है.
हांगकांग में एक भीषण अग्निकांड ने भारी तबाही मचाई है, जहां सात हाई-राइज इमारतों में लगी भीषण आग के तीन दिन बाद बचाव, खोज और तलाशी अभियान शुक्रवार को रोक दिया गया. हांगकांग सरकार ने पुष्टि की है कि ताई पो स्थित वांग फुक कोर्ट में लगी आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 128 हो गई है.
सुरक्षा सचिव क्रिस टैंग पिंग-क्युंग ने बताया कि 200 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं, और आशंका है कि पुलिस द्वारा जांच शुरू किए जाने पर और शव मिल सकते हैं. तीन दिवसीय ऑपरेशन के दौरान कुल 391 दमकल इंजन, 185 एम्बुलेंस और 2,311 फायर तथा एम्बुलेंस कर्मियों को तैनात किया गया था.
दुखद रूप से, एक फायर फाइटर की मृत्यु हो गई और 12 घायल हुए. हांगकांग पुलिस ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि लगभग 1,984 अपार्टमेंट में रहने वाले 4,600 निवासियों वाली इमारतों के समूह में आग कैसे लगी.
सरकार ने दी मदद सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 200,000 हांगकांग डॉलर (लगभग 25,693 अमेरिकी डॉलर) की “शोक भुगतान” राशि देने की घोषणा की है. इसके अलावा अगले हफ्ते से प्रति परिवार 50,000 हांगकांग डॉलर का निर्वाह भत्ता वितरित किया जाएगा.
दिल्ली के पॉश इलाके वसंत विहार इलाके में कमला पसंद और राजश्री पान मसाला ग्रुप के मालिक कमल किशोर की बहू दीप्ति चौरसिया ने खुदकुशी कर ली है।
दिल्ली के पॉश इलाके वसंत विहार इलाके में कमला पसंद और राजश्री पान मसाला ग्रुप के मालिक कमल किशोर की बहू दीप्ति चौरसिया ने खुदकुशी कर ली है। दीप्ति की उम्र 40 साल थी। मंगलवार की शाम उसका शव चुन्नी के सहारे फंदे से लटकता मिला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला है जिसमें उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है।
हालांकि दीप्ति चौरसिया के परिजन खुदकुशी के लिए उकसाने की पुलिस को शिकायत दे रहे हैं। दीप्ति की साल 2010 में कमल किशोर के बेटे हरप्रीत चौरसिया से शादी हुई थी। दोनों का 14 साल का एक लड़का है। बताया जा रहा है कि हरप्रीत ने दो शादी कर रखी हैं। दूसरी पत्नी दक्षिण भारत के फिल्मों की अभिनेत्री है। इसे लेकर दीप्ति और हरप्रीत का विवाद होता रहता था। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
सुसाइड नोट में क्या लिखा
पुलिस को मौके से जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें दीप्ति ने भावनात्मक बातें लिखी हैं। नोट में लिखा, अगर प्यार नहीं, भरोसा नहीं किसी रिश्ते में तो फिर रिश्ते में रहने की और जीने की वजह क्या है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दीप्ति मानसिक तनाव या किसी अन्य परेशानी से जूझ रही थीं या नहीं।
गौरतलब है कि मशहूर पान मसाला कंपनी कमला पसंद के मालिक का ताल्लुक कानपुर से है। कानपुर के फीलखाना मोहल्ले से कमला कांत चौरसिया ने गुटखा कारोबार शुरू किया था। करीब 40-45 साल पहले वो गुमटी में खुला पान मसाला बेचते थे, लेकिन आज उनकी कंपनी का अरबों रुपये का टर्नओवर है। उनके पान मसाला गुटखे के कई ब्रांड हैं। कमलाकांत चौरसिया 1980-85 के दौरान पान मसाला घर में ही बनाना प्रांरभ किया था। काहू कोठी में एक गुमटी में वो पान मसाला बेचते थे। फिर परिवार से भी उन्हें मदद मिली।
कमला पसंद पान मसाला का मालिकाना हक केपी समूह और कमला कांत कंपनी के पास है। इसके संस्थापक कमला कांत चौरसिया और कमल किशोर चौरसिया हैं। बताया जाता है कि मानिकचंद समूह कमला पसंद माउथ फ्रेशनर नामक एक संबंधित उत्पाद भी बनाता है, लेकिन मुख्य पान मसाला ब्रांड केपी समूह से जुड़ा है। केपी ग्रुप कमला पसंद पान मसाला बनाने वाली मूल कंपनी है। कमला कांत कंपनी एलएलपी के पास ब्रांड का ट्रेडमार्क है।