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Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी ने BCCI से मांगी माफ़ी, लेकिन ट्रॉफी लौटाने से इनकार

Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी ने BCCI से मांगी माफ़ी, लेकिन ट्रॉफी लौटाने से इनकार
Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी ने BCCI से मांगी माफ़ी, लेकिन ट्रॉफी लौटाने से इनकार

दुबई: एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रमुख और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने मंगलवार (30 सितंबर) को एक बैठक में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से माफी मांगी। हालांकि, उन्होंने एशिया कप ट्रॉफी और भारतीय खिलाड़ियों के मेडल लौटाने से साफ इनकार कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, नक़वी अब लाहौर रवाना हो रहे हैं, जबकि ट्रॉफी विवाद अभी भी सुलझा नहीं है। बताया जा रहा है कि उन्होंने मांग की है कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव खुद दुबई आकर ट्रॉफी प्राप्त करें। इस पर बीसीसीआई की ओर से जवाब दिया गया, “जब वो आपके सामने खड़े थे तब उन्होंने ट्रॉफी नहीं ली, अब आपको लगता है कि वो आएंगे?”

इस अहम बैठक में बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और कोषाध्यक्ष आशीष शेलार ने हिस्सा लिया। उन्होंने ट्रॉफी विवाद को लेकर मोहसिन नकवी को घेरा और उनसे विजेता टीम भारत को ट्रॉफी लौटाने की मांग की। बैठक में नक़वी ने यह स्वीकार किया कि प्रेजेंटेशन सेरेमनी में जो कुछ हुआ, वह नहीं होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने अपना रुख नहीं बदला। बैठक के एजेंडे में कई और मुद्दे भी शामिल थे, लेकिन ट्रॉफी विवाद के चलते उन पर चर्चा नहीं हो सकी।

BCCI करेगी ICC में शिकायत दर्ज

बैठक के बाद यह भी सामने आया है कि बीसीसीआई अब मोहसिन नकवी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगी, क्योंकि एशिया कप एक आईसीसी स्वीकृत टूर्नामेंट है। सूत्रों के मुताबिक, एसीसी ने यह निर्णय भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान इन पांच टेस्ट खेलने वाले देशों पर छोड़ दिया है कि ट्रॉफी को लेकर अगला कदम क्या हो।

क्या हुआ था प्रेजेंटेशन सेरेमनी में?

एशिया कप फाइनल के बाद विवाद तब शुरू हुआ जब भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में ट्रॉफी को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। सेरेमनी एक घंटे से अधिक देर तक रुकी रही क्योंकि भारत ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। नक़वी मंच पर लंबे समय तक खड़े रहे, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने केवल व्यक्तिगत पुरस्कार ही स्वीकार किए, टीम ट्रॉफी लेने कोई नहीं गया। बाद में नक़वी विजेता ट्रॉफी और मेडल्स लेकर मंच से चले गए, जिससे विवाद और गहरा गया। अब यह देखना होगा कि इस ट्रॉफी विवाद का समाधान कैसे निकलेगा और आईसीसी इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

US Government Shutdown Mean: ट्रंप सरकार पर लगा ताल, इसका क्या मतलब है और किन पर पड़ेगा असर?

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वॉशिंगटन: अमेरिका में छह वर्षों के बाद एक बार फिर संघीय सरकार का शटडाउन हो गया है। बुधवार को सीनेट में फंडिंग बिल पास नहीं हो पाने के कारण सरकार की सभी गैर-जरूरी सेवाएं ठप हो गईं। यह संकट तब और गहरा गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय कर्मचारियों की नई छंटनी की चेतावनी दी।

सीनेट में 55-45 वोट से बिल पास नहीं हो पाया, जिससे आधी रात के बाद 12:01 बजे से शटडाउन लागू हो गया। यह 1981 के बाद अमेरिका में 15वां सरकारी शटडाउन है।

शटडाउन का असर किन-किन पर पड़ेगा?

इस शटडाउन के कारण कई अहम सेवाएं प्रभावित होंगी। सितंबर की रोजगार रिपोर्ट जारी नहीं होगी, हवाई यात्रा धीमी हो सकती है, वैज्ञानिक अनुसंधान रुकेगा, अमेरिकी सैनिकों को वेतन नहीं मिलेगा, और लगभग 7.5 लाख संघीय कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जाएगा। इससे सरकार को प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा।

सरकार का शटडाउन होता क्या है?

जब अमेरिकी कांग्रेस समय पर बजट पारित नहीं कर पाती और राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर नहीं करते, तब कई संघीय एजेंसियों को फंडिंग नहीं मिलती। जिन एजेंसियों की फंडिंग बाधित होती है, वे अपना कामकाज रोक देती हैं। इस दौरान गैर-जरूरी सेवाओं के कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजा जाता है।

शटडाउन के दौरान क्या होता है?

शटडाउन लागू होने के बाद “नॉन-एक्सेप्टेड” कर्मचारियों को फर्लो यानी अस्थायी छुट्टी पर भेजा जाता है। “एक्सेप्टेड” कर्मचारी — जैसे कि जीवन और संपत्ति की रक्षा से जुड़े लोग — काम पर तो बने रहते हैं लेकिन उन्हें वेतन शटडाउन खत्म होने तक नहीं मिलता।

व्हाइट हाउस का ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट सभी एजेंसियों को निर्देश देता है कि वे “शटडाउन गतिविधियां” शुरू करें। यह निर्देश मंगलवार शाम को जारी कर दिया गया था।

कौन-कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी?

एफबीआई, सीआईए, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डों पर सुरक्षा एजेंसियों का काम चलता रहेगा। सशस्त्र बलों के जवान ड्यूटी पर बने रहेंगे।

जो कार्यक्रम “अनिवार्य खर्च” पर आधारित हैं, वे शटडाउन के दौरान भी जारी रहते हैं। सोशल सिक्योरिटी पेमेंट्स जारी रहेंगी। बुजुर्ग लोग मेडिकेयर के तहत डॉक्टर से इलाज करवा सकेंगे और स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी।

पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाएं भी चालू रहेंगी। वेटरन्स अफेयर्स के अस्पताल और क्लीनिक खुले रहेंगे। पूर्व सैनिकों को मिलने वाले लाभ मिलते रहेंगे और राष्ट्रीय कब्रिस्तानों में दफन की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।

‘The Taj Story’ के पोस्टर पर क्यों बवाल, Paresh Rawal पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप

'The Taj Story' के पोस्टर पर क्यों बवाल, Paresh Rawal पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
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नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पहले ‘हेरा फेरी 3’ से अचानक बाहर होने और अक्षय कुमार से मनमुटाव को लेकर चर्चा में रहे परेश रावल अब अपनी आने वाली फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के मोशन पोस्टर को लेकर विवादों का केंद्र बन गए हैं।

मोशन पोस्टर में ताजमहल से प्रकट होते दिखे भगवान शिव

29 सितंबर को फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ का मोशन पोस्टर सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसमें परेश रावल ताजमहल के गुंबद को उठाते नजर आते हैं और उसके भीतर से भगवान शिव की प्रतिमा प्रकट होती है। इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त नाराजगी पैदा कर दी है।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

पोस्टर वायरल होते ही कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया। एक यूजर ने लिखा, “OMG! ये परेश रावल से उम्मीद नहीं थी।” वहीं, दूसरे ने कहा, “ये क्या बकवास है?” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “ऐसे लोग देश में अशांति फैलाना चाहते हैं।” कुछ ने अभिनेता पर पैसा कमाने के लिए धार्मिक भावनाओं का सहारा लेने का भी आरोप लगाया।

निर्माताओं और अभिनेता ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख फिल्म के निर्माताओं और परेश रावल ने इंस्टाग्राम पर सफाई दी। उनके पोस्ट में लिखा गया,
“द ताज स्टोरी के निर्माता यह स्पष्ट करते हैं कि यह फिल्म किसी भी धार्मिक मुद्दे से संबंधित नहीं है और न ही यह दावा करती है कि भगवान शिव ताजमहल के भीतर विराजमान हैं। यह फिल्म केवल ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। हम दर्शकों से अनुरोध करते हैं कि फिल्म देखने से पहले किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें। धन्यवाद। – स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड”

हालांकि सफाई जारी करने के बावजूद विरोध कम होने की बजाय और तेज हो गया है। कई यूजर्स ने इसे एक सोची-समझी रणनीति बताया और आरोप लगाया कि इस तरह के दृश्य देश में धार्मिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।

फिल्म के भविष्य पर संकट के बादल

जहां एक ओर फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ रही थी, वहीं अब इस विवाद ने ‘द ताज स्टोरी’ के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। धार्मिक संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने सेंसर बोर्ड से फिल्म की गहन जांच की मांग की है।

फिलहाल यह देखना बाकी है कि विवाद के बीच फिल्म रिलीज तक पहुंच पाती है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि परेश रावल और ‘द ताज स्टोरी’ की टीम को अब भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

Philippines Earthquake: फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 31 से अधिक लोगों की मौत, कई घायल

Philippines Earthquake: फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 31 से अधिक लोगों की मौत, कई घायल
Philippines Earthquake: फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 31 से अधिक लोगों की मौत, कई घायल

मनीला: फिलीपींस के सेबू प्रांत में मंगलवार को आए 6.9 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 31 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हैं। भूकंप के कारण कई इमारतें और घर ढह गए, बिजली आपूर्ति ठप हो गई और लोग भय से अपने घरों से बाहर निकल आए।

बोगो शहर बना तबाही का केंद्र

भूकंप का केंद्र सेबू प्रांत के तटीय शहर बोगो से 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित था, जहां कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है। बोगो की आबादी लगभग 90,000 है। आपदा प्रबंधन अधिकारी रेक्स यगोट ने बताया कि पहाड़ी इलाके में भूस्खलन और चट्टानों के गिरने से कई लोग मलबे में दब गए हैं।

रेक्स यगोट ने कहा, “इलाके में भारी जोखिम है, लेकिन बचाव कार्य जारी है। एक बैकहो (मशीन) को मौके पर भेजा जा रहा है ताकि राहत कार्य में तेजी लाई जा सके।”

सैन रेमिगियो में छह की मौत

बोगो से दक्षिण में स्थित सैन रेमिगियो कस्बे में छह लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन कोस्ट गार्ड कर्मी, एक दमकलकर्मी और एक बच्चा शामिल हैं। उप मेयर अल्फी रेयनेस ने जानकारी दी कि भूकंप से नगर की जलापूर्ति प्रणाली भी क्षतिग्रस्त हो गई है और वहां खाद्य एवं जल संकट पैदा हो गया है।

कई इमारतें और सड़कें क्षतिग्रस्त

दमकलकर्मी रे कैनेटे ने बताया कि भूकंप ने बोगो में कई घरों की कंक्रीट की दीवारें, फायर स्टेशन और सड़कों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया। “हम अपने बैरक में थे जब अचानक धरती कांपने लगी, और हम भागने की कोशिश में गिर गए,” उन्होंने बताया।

भूकंप के बाद सैकड़ों लोग फायर स्टेशन के पास एक खुले मैदान में जमा हो गए और डर के कारण घंटों तक अपने घरों में वापस नहीं लौटे।

व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान

भूकंप से कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा है। सड़कें फट गई हैं और पास के दानबांतायन कस्बे में स्थित एक पुराना रोमन कैथोलिक चर्च भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी

फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंपीय संस्थान ने शुरुआत में सुनामी की चेतावनी जारी की थी और लोगों को सेबू, लेयते और बिलिरान प्रांतों के तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई थी। हालांकि बाद में चेतावनी वापस ले ली गई क्योंकि किसी असामान्य लहर की पुष्टि नहीं हुई।

हाल ही में तूफान से भी हुआ था भारी नुकसान

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही मध्य फिलीपींस में आए एक तूफान से 27 लोगों की जान चली गई थी। तूफान के चलते कई शहरों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था। सेबू की गवर्नर पामेला बारिकुआत्रो ने फेसबुक पर एक वीडियो संदेश में कहा, “स्थिति अनुमान से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है। हमें पूरी तस्वीर सुबह तक ही मिल पाएगी।” फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

October Holidays 2025: ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट, कब-कब बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज?

October Holidays 2025: ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट, कब-कब बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज?
October Holidays 2025: ये रही छुट्टियों की पूरी लिस्ट, कब-कब बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज?

नई दिल्ली: देशभर में नवरात्रि और दशहरे की धूम के बीच स्कूलों की छुट्टियों को लेकर माता-पिता और छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बार दशहरा 2 अक्टूबर को पड़ रहा है, जो कि गांधी जयंती के साथ संयोग बना रहा है। ऐसे में कई राज्यों में छुट्टियों को लेकर अलग-अलग घोषणाएं की गई हैं।

कुछ राज्यों में छुट्टियां 1 और 2 अक्टूबर तक सीमित हैं, जबकि कई जगहों पर स्कूल 5 या 6 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। हालांकि, निजी स्कूलों का शेड्यूल अलग हो सकता है, इसलिए अभिभावकों को स्कूल से आधिकारिक पुष्टि करने की सलाह दी गई है।

इन राज्यों में घोषित की गई हैं छुट्टियां:

उत्तर प्रदेश:
1 और 2 अक्टूबर को दशहरा और गांधी जयंती के अवसर पर सभी स्कूल बंद रहेंगे।

बिहार:
राज्य के अधिकांश जिलों में स्कूल 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। वहीं कुछ जिलों में छुट्टी 5 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है।

दिल्ली:
राजधानी में 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश है। कक्षाएं 3 अक्टूबर से शुरू होंगी। हालांकि प्राइवेट स्कूलों में यह शेड्यूल अलग हो सकता है।

झारखंड:
यहां सरकारी स्कूलों में 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक छुट्टी रहेगी। कुछ स्कूलों में यह अवधि 5 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है।

ओडिशा:
राज्य में 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्कूल बंद रहेंगे। कक्षाएं 3 अक्टूबर से फिर शुरू होंगी।

पश्चिम बंगाल:
दुर्गा पूजा के चलते यहां स्कूल 24 सितंबर से ही बंद कर दिए गए हैं और ये 6 अक्टूबर तक बंद रहेंगे।

तेलंगाना:
राज्य में स्कूल 21 सितंबर से ही बंद हैं। अब 3 अक्टूबर से कक्षाएं दोबारा शुरू होंगी।

निजी स्कूलों के लिए अलग हो सकता है शेड्यूल
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि निजी स्कूल अपने हिसाब से छुट्टियों का शेड्यूल बना सकते हैं। इसलिए अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चे के स्कूल से आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

इस त्योहारी माहौल में स्कूलों की छुट्टियां बच्चों के लिए एक बड़ा अवसर हैं, जब वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं और त्योहारों की खुशियों का आनंद ले सकते हैं।

Pawan Vs Tej Pratap Yadav News: “कभी हमारे पैर पर गिरे थे” पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की अटकलों पर तेज प्रताप यादव का तीखा हमला

Pawan Vs Tej Pratap Yadav News: "कभी हमारे पैर पर गिरे थे" पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की अटकलों पर तेज प्रताप यादव का तीखा हमला
Pawan Vs Tej Pratap Yadav News: "कभी हमारे पैर पर गिरे थे" पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की अटकलों पर तेज प्रताप यादव का तीखा हमला

पटना: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की बीजेपी में संभावित वापसी को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। मंगलवार को दिल्ली में पवन सिंह ने एनडीए के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भाजपा में दोबारा शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

तेज प्रताप यादव, जो कभी आरजेडी का हिस्सा थे और अब अपनी अलग पार्टी चला रहे हैं, ने पवन सिंह पर निजी हमला करते हुए कहा, “इनका यही काम है, कलाकारों को पकड़ना। खासकर पवन सिंह जैसा व्यक्ति जो कभी लखनऊ में हमारे पैर पर गिरा हुआ था, अब किसी और के पैर पर गिरने चला गया है।”

“कलाकारी करें, राजनीति नहीं” – तेज प्रताप

तेज प्रताप ने आगे कहा, “ये लोग लगातार किसी न किसी के पैर में गिरते रहते हैं। इनकी बुद्धि और विवेक काम नहीं कर रही है। पवन सिंह क्या करेंगे, क्या नहीं करेंगे, वह खुद जानें। वह एक कलाकार हैं, उन्हें केवल अपनी कलाकारी पर ध्यान देना चाहिए।”

हालांकि, पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से छठ महापर्व को यूनेस्को में दर्ज कराने की पहल पर तेज प्रताप ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा, “यह अच्छी बात है। यह लोक आस्था का विषय है और अगर कोई इसे आगे बढ़ा रहा है तो उसका स्वागत है।”

एनडीए नेताओं से पवन सिंह की अहम मुलाकातें

मंगलवार को पवन सिंह ने दिल्ली में एनडीए के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की। सबसे पहले उन्होंने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से भेंट की। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी उनकी बैठक हुई। इस दौरान बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े भी मौजूद थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकातें पवन सिंह की बीजेपी में वापसी की ओर इशारा कर रही हैं। बीते लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने भाजपा से टिकट न मिलने के कारण काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिससे एनडीए को नुकसान हुआ था।

अब माना जा रहा है कि बीजेपी, पवन सिंह की लोकप्रियता को भुनाकर आगामी विधानसभा चुनाव में शाहाबाद क्षेत्र समेत पूरे बिहार में जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

तेज प्रताप यादव के बयान से साफ है कि पवन सिंह की सक्रियता से विपक्षी दलों में हलचल तेज हो गई है, और आगामी चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में यह मामला एक बड़ा मोड़ ले सकता है।

Pawan Singh News: पवन सिंह की अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी में वापसी के संकेत

Pawan Singh News: पवन सिंह की अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी में वापसी के संकेत
Pawan Singh News: पवन सिंह की अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी में वापसी के संकेत

पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। मंगलवार, 30 सितंबर 2025 को भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार और चर्चित चेहरे पवन सिंह ने एक ही दिन में तीन बड़े नेताओं से मुलाकात कर राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी।

पवन सिंह ने सबसे पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की। इसके तुरंत बाद वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले। यह बैठक लगभग 30 मिनट तक चली, हालांकि इस दौरान पवन सिंह ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और बैठक के बाद चुपचाप निकल गए। दिन का समापन उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के साथ किया, जो उनके आवास पर हुई।

बीजेपी में वापसी के कयास तेज

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन मुलाकातों के बाद पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, जिससे एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को नुकसान उठाना पड़ा था।

अब माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व पवन सिंह की लोकप्रियता को भुनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, खासकर शाहाबाद क्षेत्र की 22 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए।

युवाओं और सिनेप्रेमियों में पवन सिंह का प्रभाव

पवन सिंह का बिहार के युवाओं और सिने प्रेमियों के बीच व्यापक प्रभाव है। पार्टी नेतृत्व उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाकर खासकर ग्रामीण और युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

बताया जा रहा है कि अमित शाह स्वयं बिहार चुनाव की रणनीति पर नजर रख रहे हैं और पार्टी हर मोर्चे पर सतर्कता बरत रही है।

बीते चुनाव में आसनसोल से किया था इनकार, काराकाट से लड़े थे चुनाव

लोकसभा चुनाव से पहले पवन सिंह ने भाजपा का दामन थामा था और उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से टिकट की पेशकश की गई थी। हालांकि उन्होंने यह कहकर इनकार कर दिया कि वे बिहार से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, पवन सिंह की सक्रियता और भाजपा नेताओं से करीबी मुलाकातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि वे एक बार फिर पार्टी में वापसी की ओर अग्रसर हैं।

शाहाबाद की सियासत में नया मोड़

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पवन सिंह की वापसी से शाहाबाद क्षेत्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। साथ ही, बीजेपी जनसुराज पार्टी जैसी उभरती ताकतों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरों पर दांव खेल रही है।

फिलहाल, पवन सिंह की इन अहम मुलाकातों ने चुनावी मौसम में नई सरगर्मी ला दी है और यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आने वाले दिनों में क्या राजनीतिक कदम उठाते हैं।

IND vs SL, Women’s WC 2025: गुवाहाटी में ICC महिला विश्व कप का का आगाज, श्रीलंका ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी

IND vs SL, Women's WC 2025: गुवाहाटी में ICC महिला विश्व कप का का आगाज, श्रीलंका ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी
IND vs SL, Women's WC 2025: गुवाहाटी में ICC महिला विश्व कप का का आगाज, श्रीलंका ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी

गुवाहाटी: ICC महिला विश्व कप का आगाज मंगलवार, 30 सितंबर को पूर्वोत्तर के गुवाहाटी शहर में भारत और श्रीलंका के बीच हुआ। मेहमान टीम की कप्तान चामारी अथापथ्थु ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पिछले कुछ दिनों से गुवाहाटी में धूप खिली हुई थी, लेकिन मैच के दिन बादल छाए रहे। अथापथ्थु ने कहा कि अपनी टीम की क्षमताओं को देखते हुए गेंदबाजी करना इस पिच और मौसम के लिए सबसे सही विकल्प था।

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर भी पहले गेंदबाजी करना चाहती थीं, यह मानते हुए कि पिच शुरुआती समय में गेंदबाजों के लिए मददगार हो सकती है। हालांकि, उन्हें बल्लेबाजी के लिए आने से ज्यादा निराशा नहीं हुई क्योंकि पिच को अच्छा बताया गया। उन्होंने कहा, “हम भी गेंदबाजी करना चाहते थे। पिच बहुत अच्छी लग रही है, उम्मीद है कि हम अच्छा स्कोर बनाएंगे।”

भारतीय टीम ने इस मैच के लिए स्पिन गेंदबाजी को प्राथमिकता दी है। विश्व कप में पदार्पण कर रही श्री चारानी को तीसरे स्पिनर के रूप में चुना गया, जिससे राधा यादव को बाहर बैठना पड़ा। तेज गेंदबाज रेनुका सिंह ठाकुर और अरुंधती रेड्डी को जगह नहीं मिली। ठाकुर को चोट के कारण सीमित रूप से ही उपयोग किया जा सकता है। वहीं, ऑलराउंडर अमनजोत कौर को दूसरी तेज गेंदबाज के रूप में शामिल किया गया है, जिससे भारत की गेंदबाजी कुछ हद तक कमजोर नजर आ रही है।

श्रीलंका की टीम भारत को 260-270 रन के भीतर रोकना चाहेगी ताकि वे सफलतापूर्वक लक्ष्य का पीछा कर सकें और टूर्नामेंट की शुरुआत जीत से कर सकें।

भारत इस मैच में भारी पसंदीदा मानी जा रही है, लेकिन चामारी अथापथु ने कहा कि पिछले 18 महीनों में श्रीलंका ने ‘वुमेन इन ब्लू’ को कई बड़े मुकाबलों में हराया है और वे फिर से कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें अपनी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा।

भारत की संभावित टीम:

प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना, हर्लीन डिओल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, अमनजोत कौर, स्नेह राणा, क्रांति गौड़, श्री चारानी

श्रीलंका की संभावित टीम:

चामारी अथापथ्थु (कप्तान), हसिनी पेरेरा, हर्षिता समराविकरमा, विश्व्मी गुना रत्ने, कविशा दिल्हारी, नीलाक्षी दे सिल्वा, अनुष्का संजीवानी (विकेटकीपर), अचिनी कुलासूरिया, सुगांदिका कुमारी, उदेशिका प्रभोधानी, इनोका रनवीरा

मैच स्थल बारसपारा क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले से टूर्नामेंट की रोमांचक शुरुआत होने की उम्मीद है।

Bihar Election 2025 News: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अंतिम मतदाता सूची जारी, विपक्ष ने लगाया गड़बड़ी का आरोप

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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मंगलवार को चुनाव आयोग ने विशेष संवीक्षा प्रक्रिया (Special Intensive Revision – SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। यह सूची आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है और इसी मतदाता सूची के आधार पर आगामी चुनाव कराए जाएंगे।

बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने बताया कि सूची की भौतिक प्रतियां सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को वितरित की जाएंगी, जो जिलों के जिलाधिकारी भी होते हैं। इसके अलावा, अंतिम सूची सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

पटना में 14 विधानसभा क्षेत्रों के लिए संशोधित सूची जारी

पटना जिला प्रशासन के अनुसार, संशोधित सूची में 14 विधानसभा सीटों पर कुल 48,15,294 मतदाता दर्ज हैं। यह आंकड़ा 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची की तुलना में 1,63,600 अधिक है।

SIR प्रक्रिया पर उठा विवाद

विशेष संवीक्षा प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है।

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि अंतिम सूची प्रकाशित हो जाने के बाद भी यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि सूची जारी होना इसे कानूनी चुनौती से नहीं बचाता। इस मामले की अंतिम सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।

बिहार चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेगी आयोग की टीम

चुनाव आयोग की एक टीम 4 और 5 अक्टूबर को पटना का दौरा करेगी ताकि चुनाव तैयारियों का जायजा लिया जा सके। पीटीआई द्वारा उद्धृत सूत्रों के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा अगले सप्ताह की जा सकती है।

पहले चरण का मतदान संभवतः छठ पर्व के बाद, अक्टूबर के अंत में शुरू हो सकता है। चुनाव की सुचारु प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने राज्यभर में 470 पर्यवेक्षकों की तैनाती का निर्णय लिया है, जिनमें कुछ विधानसभा उपचुनावों के लिए भी पर्यवेक्षक शामिल होंगे।

3 अक्टूबर को सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के लिए एक विशेष ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी। बता दें कि बिहार विधानसभा की वर्तमान 243 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

Journalist Rajiv Pratap News: उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप लापता होने के 10 दिन बाद मृत पाए गए, परिवार ने जताई साजिश की आशंका

Journalist Rajiv Pratap News: उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप लापता होने के 10 दिन बाद मृत पाए गए, परिवार ने जताई साजिश की आशंका
Journalist Rajiv Pratap News: उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप लापता होने के 10 दिन बाद मृत पाए गए, परिवार ने जताई साजिश की आशंका

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप (36) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। 18 सितंबर को लापता हुए राजीव की कार भागीरथी नदी में मिली थी, और 28 सितंबर को उनका शव बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि यह एक हादसा था, लेकिन परिवार ने इस पर सवाल उठाए हैं और साजिश की आशंका जताई है। राजीव प्रताप एक स्वतंत्र पत्रकार थे और उत्तरकाशी जिले में कार्यरत थे। 18 सितंबर को वे अचानक लापता हो गए। खोजबीन के दौरान उनकी कार भागीरथी नदी में मिली, जिससे पहले दिन से ही दुर्घटना की आशंका जताई जा रही थी।

हालांकि, राजीव के परिजनों का कहना है कि वह किसी बड़ी खबर पर काम कर रहे थे और उनकी अचानक हुई मौत संदेहास्पद है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि पुलिस द्वारा जल्दबाज़ी में इसे हादसा बताना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कोई आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। राजीव की मौत ने पत्रकार समुदाय में भी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय पत्रकार संगठनों ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि यह कोई आपराधिक घटना है, तो दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। मामले की जांच जारी है।