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Asia Cup ट्रॉफी लेकर मैदान से भागे PCB चीफ मोहसिन नकवी, टीम इंडिया के बहिष्कार के बाद बढ़ा विवाद

Asia Cup ट्रॉफी लेकर मैदान से भागे PCB चीफ मोहसिन नकवी, टीम इंडिया के बहिष्कार के बाद बढ़ा विवाद
Asia Cup ट्रॉफी लेकर मैदान से भागे PCB चीफ मोहसिन नकवी, टीम इंडिया के बहिष्कार के बाद बढ़ा विवाद

दुबई: एशिया कप 2025 के भारत-पाकिस्तान फाइनल के बाद मैदान पर सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि विवादों की आंधी भी देखने को मिली। भारत द्वारा ट्रॉफी न लेने के फैसले के बाद पीसीबी और एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ट्रॉफी लेकर मैदान से भागते नजर आए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

मैच के बाद की प्रस्तुति समारोह में भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। इस विरोध के चलते सेरेमनी में करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई। भारतीय खिलाड़ी चाहते थे कि उन्हें ट्रॉफी किसी तटस्थ अधिकारी द्वारा सौंपी जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मोहसिन नकवी मंच पर अकेले खड़े रहे, जबकि भारतीय टीम पास में ही खड़ी रही और ट्रॉफी स्वीकार करने से इंकार करती रही। इसके बाद नकवी ने मैदान छोड़ दिया और ट्रॉफी भी साथ ले गए। एक वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नकवी मैदान से निकलते समय ट्रॉफी अपने साथ लिए हुए थे। एक टूर्नामेंट अधिकारी को भी ट्रॉफी वापस ले जाते हुए देखा गया।

तिलक वर्मा की पारी से भारत ने दर्ज की जीत

मैच की बात करें तो भारत और पाकिस्तान के बीच यह मुकाबला बेहद करीबी रहा। पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने 146 रन बनाए। साहिबजादा फरहान और फखर जमान ने कुछ अच्छे शॉट्स खेले, लेकिन टीम बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। कुलदीप यादव ने चार विकेट लेकर पाकिस्तान की पारी को कमजोर कर दिया।

भारत की शुरुआत भी खराब रही और टॉप ऑर्डर जल्दी पवेलियन लौट गया। लेकिन तिलक वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 53 गेंदों में नाबाद 69 रन बनाए और भारत को 5 विकेट से जीत दिलाई। इस जीत के साथ भारत ने एशिया कप 2025 का खिताब अपने नाम किया।

विवाद की आंच तेज

मैच के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की राजनीति की ओर बढ़ता दिख रहा है। ट्रॉफी को लेकर मोहसिन नकवी का मैदान छोड़ना न सिर्फ असामान्य था, बल्कि इसे भारत के खिलाड़ियों और फैंस ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताया है।

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया पहले ही साफ कर चुके हैं कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया था और भारत नवंबर में होने वाले आईसीसी सम्मेलन में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगा।

फिलहाल सोशल मीडिया पर यह सवाल गर्म है कि जब एक टीम ने ट्रॉफी जीत ली है, तो उसे उसका हक क्यों नहीं मिला और कैसे एक उच्च पदाधिकारी मैदान से ट्रॉफी लेकर चला गया। क्रिकेट से जुड़े इस विवाद पर अब दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं।

Baba Chaitanyanand Case: फर्जी पहचान और करोड़ों की ठगी, छात्राओं से यौन शोषण के आरोपी बाबा चैतन्यनंद गिरफ्तार

Baba Chaitanyanand Case: फर्जी पहचान और करोड़ों की ठगी, छात्राओं से यौन शोषण के आरोपी बाबा चैतन्यनंद गिरफ्तार
Baba Chaitanyanand Case: फर्जी पहचान और करोड़ों की ठगी, छात्राओं से यौन शोषण के आरोपी बाबा चैतन्यनंद गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के श्री शारदा इंस्टीट्यूट की छात्राओं के यौन शोषण के मामले में आरोपी स्वयंभू बाबा चैतन्यनंद सरस्वती की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई चौंकाने वाले खुलासे मिले हैं। अपनी असली पहचान छिपाने और फरार रहने के लिए उसने ऐसे तरीके अपनाए जो किसी फिल्म की कहानी जैसे लगते हैं।

दो पासपोर्ट, दो नाम, अलग जन्मस्थान और माता-पिता के नाम

पुलिस जांच में सामने आया कि बाबा के पास दो अलग-अलग पासपोर्ट थे। एक पर नाम ‘स्वामी पार्थ सारथी’ और दूसरे पर ‘स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती’ था। दोनों पासपोर्ट में न सिर्फ नाम अलग थे, बल्कि जन्मस्थान (दार्जिलिंग और तमिलनाडु) और माता-पिता के नाम भी अलग दर्ज थे। उसके पैन कार्ड और बैंक दस्तावेजों में भी भिन्न जानकारियाँ पाई गईं।

जुलाई में विदेश भागा, अगस्त में केस दर्ज

बाबा जुलाई में विदेश भाग गया था, जबकि 6 अगस्त को 17 छात्राओं ने यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई। ये छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से थीं। एफआईआर के बाद बाबा फरार रहा और मथुरा, वृंदावन, आगरा जैसे शहरों के सस्ते होटलों में ठहरता रहा ताकि पुलिस से बच सके।

आधी रात का ऑपरेशन और गिरफ्तारी

27 सितंबर की रात को पुलिस को सूचना मिली कि बाबा आगरा के ताजगंज इलाके के एक होटल में ‘पार्थ सारथी’ के नाम से ठहरा हुआ है। सुबह करीब 3:30 बजे पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से मोबाइल, आईपैड और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए।

एफआईआर में दर्ज है कि बाबा रात में छात्राओं को बुलाता था, आपत्तिजनक मैसेज भेजता था और उसकी तीन महिला सहयोगी छात्राओं को चुप रहने के लिए दबाव डालती थीं। वह अपने मोबाइल से छात्रावास और संस्थान के सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड देखता था, जिससे वह छात्राओं की हर गतिविधि पर नजर रखता था।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े होने का झूठा दावा

गिरफ्तारी के बाद बरामद विजिटिंग कार्ड में खुद को संयुक्त राष्ट्र और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का प्रतिनिधि बताया गया था। उसने यह भी प्रचार किया था कि उसके सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंध हैं, जिससे उसका संस्थान में प्रभाव बना रहा।

फर्जी बैंक खाते और करोड़ों की संपत्ति

पुलिस को बाबा के नाम कई फर्जी बैंक खातों का पता चला है। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उसने 50 लाख रुपये की निकासी की थी। पुलिस ने अब तक आठकरोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी है, जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य निवेश शामिल हैं।

छात्राओं की मांग: सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, कड़ी सजा चाहिए

फिलहाल बाबा पांच दिन की पुलिस रिमांड में है। पुलिस अब उसकी महिला सहयोगियों से आमने-सामने पूछताछ करेगी और संभव है कि पीड़ित छात्राओं के सामने भी उसे लाया जाएगा। छात्राओं ने गिरफ्तारी पर राहत जताई है, लेकिन उनका कहना है कि असली न्याय तब मिलेगा जब आरोपी को कड़ी सजा दी जाएगी।

एक छात्रा ने कहा, “उम्रकैद जैसी सजा ही ऐसे लोगों के लिए सबक बनेगी। जब तक ऐसा नहीं होता, हमारा दर्द खत्म नहीं होगा।”

इस मामले ने दिल्ली सहित पूरे देश में संस्थानों में मौजूद सत्ता और आस्था के नाम पर चल रहे शोषण की गंभीरता को उजागर किया है। पुलिस की अगली जांच पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

Karur Stampede: करूर रैली भगदड़ में मृतकों की संख्या 41 हुई, विजय और पीएम मोदी ने जताया दुख, मुआवज़े का ऐलान

Karur Stampede: करूर रैली भगदड़ में मृतकों की संख्या 41 हुई, विजय और पीएम मोदी ने जताया दुख, मुआवज़े का ऐलान
Karur Stampede: करूर रैली भगदड़ में मृतकों की संख्या 41 हुई, विजय और पीएम मोदी ने जताया दुख, मुआवज़े का ऐलान

करूर: तमिलनाडु के करूर जिले में 27 सितंबर को अभिनेता और राजनेता विजय की रैली के दौरान मची भगदड़ में मृतकों की संख्या सोमवार को 41 तक पहुंच गई। करूर जिले की 65 वर्षीय महिला सुगुना, जो अस्पताल में वेंटिलेटर पर थीं, इलाज के दौरान दम तोड़ बैठीं।

मरने वालों में 18 महिलाएं, 13 पुरुष, 5 लड़कियां और 5 लड़के शामिल हैं। इनमें से 34 मृतक करूर जिले के रहने वाले थे, जबकि इरोड, तिरुपुर और डिंडीगुल से दो-दो और सलेम से एक व्यक्ति की मौत हुई। सबसे कम उम्र का शिकार महज 2 साल का बच्चा था। इस हादसे में एक 28 वर्षीय महिला और उसकी दो बेटियाँ, जिनकी उम्र 10 साल से कम थी, एक 24 वर्षीय युवक और युवती जो जल्द ही विवाह करने वाले थे – ये सभी अपनी जान गंवा बैठे।

राहुल गांधी ने की मुख्यमंत्री और विजय से बात

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और टीवीके पार्टी प्रमुख विजय से फोन पर बात की और करूर की भगदड़ में हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए लिखा, “धन्यवाद मेरे प्यारे भाई राहुल गांधी, जिन्होंने फोन कर करूर की दुखद घटना पर चिंता जताई और घायलों की देखरेख को लेकर जानकारी ली।”

लापरवाही के आरोप में केस दर्ज

इस बीच, करूर पुलिस ने भगदड़ के मामले में टीवीके के पदाधिकारियों के खिलाफ लापरवाही समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है और उन जगहों का मुआयना किया जहां से शव बरामद हुए, जिनमें एक नाला भी शामिल है।

घटना के बाद करूर के व्यापारियों और दुकानदारों ने मृतकों के सम्मान में अपनी दुकानें बंद रखीं।

कैसे हुई भगदड़

अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा शाम करीब 7:30 बजे हुआ, जब विजय अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे थे। भारी संख्या में लोग दोपहर से ही विजय की झलक पाने के लिए जमा थे। जब विजय अपने प्रचार वाहन से भाषण दे रहे थे, तभी भीड़ में कुछ लोगों के बेहोश होने की खबरें सामने आईं और अफरातफरी मच गई।

स्थिति बेकाबू होते ही कई लोग गिर पड़े और भगदड़ शुरू हो गई। बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

विजय, मोदी और स्टालिन ने किया मुआवज़े का ऐलान

विजय ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा, “यह राशि आपके नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन इस दुख की घड़ी में मैं आपके साथ खड़ा हूं।” उन्होंने मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे में मारे गए 39 लोगों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये देने की बात कही है, जबकि बीजेपी ने भी मृतकों के परिजनों को 1 लाख रुपये देने की घोषणा की है। करूर की यह घटना न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे देश को झकझोर देने वाली है। प्रशासन, राजनीतिक दलों और समाज को अब यह सोचने की ज़रूरत है कि ऐसी भीड़भाड़ वाली रैलियों में भविष्य में इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जाए।

Asia Cup 2025 फाइनल में भारत की जीत के बाद विवाद, पाक पत्रकार पर भड़के सूर्यकुमार यादव कहा “मेरी ट्रॉफी मेरी टीम है”

Asia Cup 2025 फाइनल में भारत की जीत के बाद विवाद, पाक पत्रकार पर भड़के सूर्यकुमार यादव कहा “मेरी ट्रॉफी मेरी टीम है”
Asia Cup 2025 फाइनल में भारत की जीत के बाद विवाद, पाक पत्रकार पर भड़के सूर्यकुमार यादव कहा “मेरी ट्रॉफी मेरी टीम है”

दुबई: एशिया कप 2025 का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया, जो जितना क्रिकेट के लिए याद किया जाएगा, उतना ही विवादों के लिए भी। टूर्नामेंट की शुरुआत में भारत ने पाकिस्तान से हाथ मिलाने से इनकार किया और अंत में फाइनल जीतने के बाद भारतीय टीम ने पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी मना कर दिया।

इस फैसले के चलते भारतीय टीम को विजेता ट्रॉफी नहीं सौंपी गई और मैच के बाद की प्रस्तुति समारोह में डेढ़ घंटे की देरी हुई। जब कप्तान सूर्यकुमार यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे, तो उन्हें भी इस मुद्दे पर सवालों का सामना करना पड़ा।

एक पाकिस्तानी पत्रकार ने सूर्यकुमार से टीम इंडिया के रवैये को लेकर सवाल पूछा, जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “गुस्सा हो रहे हो आप?” यह जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे एक हल्के-फुल्के अंदाज में पत्रकार को चुप कराने वाला जवाब माना गया।

“मेरी ट्रॉफी मेरी टीम है” – सूर्यकुमार यादव

जब सूर्यकुमार यादव से पूछा गया कि टीम को ट्रॉफी नहीं मिली, तो उन्होंने बेहद भावुक और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अगर आप मुझसे ट्रॉफी के बारे में पूछते हैं, तो मेरी ट्रॉफी तो मेरे ड्रेसिंग रूम में बैठी है। सारे 14 खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ – वही असली ट्रॉफी हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं इन लड़कों का बहुत बड़ा फैन रहा हूं पूरे एशिया कप के दौरान। जब से हम यहां आए, हमने तैयारी शुरू की, हर पल को जिया। यही असली ट्रॉफी है, यही यादें मैं अपने साथ लेकर जा रहा हूं। और मेरे लिए बस इतना ही काफी है।”

विवाद के बाद भी टीम इंडिया की जीत पर फोकस

हालांकि ट्रॉफी को लेकर विवाद ने मैच के बाद माहौल को थोड़ा तनावपूर्ण बना दिया, लेकिन भारतीय टीम के प्रदर्शन को सभी ने सराहा। भारत ने पाकिस्तान को फाइनल में हराकर एशिया कप 2025 का खिताब जीता, लेकिन ट्रॉफी को लेकर पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी और बीसीसीआई के बीच तनातनी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। इस मुद्दे पर बीसीसीआई ने पहले ही साफ कर दिया है कि नवंबर में दुबई में होने वाले ICC सम्मेलन में वे इस मामले को गंभीरता से उठाएंगे। फिलहाल भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और उनकी टीम इस जीत को ट्रॉफी से नहीं, बल्कि एकजुटता और टीम भावना से मना रही है।

India vs Pakistan Asia Cup 2025: भारत ने एशिया कप जीतने के बाद पाकिस्तान को दिखाया अवकात, मोहसिन नकवी से भारत ने नहीं लिया ट्रॉफी

India vs Pakistan Asia Cup 2025: भारत ने एशिया कप जीतने के बाद पाकिस्तान को दिखाया अवकात, मोहसिन नकवी से भारत ने नहीं लिया ट्रॉफी
India vs Pakistan Asia Cup 2025: भारत ने एशिया कप जीतने के बाद पाकिस्तान को दिखाया अवकात, मोहसिन नकवी से भारत ने नहीं लिया ट्रॉफी

नई दिल्ली: एशिया कप 2025 में पाकिस्तान को हराकर भारत ने शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इस जीत के बाद एक बड़ा विवाद सामने आया। भारत की टीम ने एसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया।

प्रस्तुति समारोह में देरी के बाद भारतीय टीम मंच पर नहीं आई, जिस पर मोहसिन नकवी ने ट्रॉफी अपने साथ ले जाने का फैसला किया। भारतीय खिलाड़ियों ने इस कदम को असंवेदनशील और खेल भावना के खिलाफ मानते हुए इसका विरोध किया।

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, “हमने जानबूझकर यह निर्णय लिया था कि ट्रॉफी पाकिस्तान के प्रतिनिधि से नहीं लेंगे। उनका यह अधिकार नहीं था कि वे ट्रॉफी और पदक अपने साथ ले जाएं। यह एक असंवेदनशील कदम था और हम उम्मीद करते हैं कि ट्रॉफी जल्द भारत को लौटाई जाएगी।”

सैकिया ने इस मुद्दे को लेकर कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष चल रहा है, ऐसे में हम किसी ऐसे व्यक्ति से ट्रॉफी नहीं ले सकते, जो पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहा है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे ट्रॉफी लेकर जा सकते हैं।”

बीसीसीआई ने कहा है कि इस मामले पर वे आगामी ICC सम्मेलन में कड़ा विरोध जताएंगे, जो नवंबर में दुबई में होगा।

Bigg Boss 19: Farhana Bhatt बनीं घर की नई Captain, Gauahar Khan ने आवेज और अमाल मलिक को लगाई फटकार

Bigg Boss 19: Farhana Bhatt बनीं घर की नई Captain, Gauahar Khan ने आवेज और अमाल मलिक को लगाई फटकार
Bigg Boss 19: Farhana Bhatt बनीं घर की नई Captain, Gauahar Khan ने आवेज और अमाल मलिक को लगाई फटकार

नई दिल्ली: ‘बिग बॉस 19’ के घर में इन दिनों जबरदस्त ड्रामा और ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए कैप्टेंसी टास्क के बाद फरहाना भट्ट को घर का नया कप्तान चुना गया है। गौरव खन्ना और फरहाना भट्ट के बीच हुए इस टास्क में घरवालों को असेंबली हॉल में बुलाकर उनमें से एक को कप्तान चुनने के लिए कहा गया। घरवालों ने जिस सदस्य को कप्तान नहीं बनाना था, उसे काला हार पहनाया। इस प्रक्रिया में फरहाना भट्ट को कप्तानी का ताज मिल गया।

इस वीकेंड का वार एपिसोड और भी ज्यादा दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि इसमें ‘बिग बॉस 7’ की विजेता और अभिनेत्री गौहर खान स्पेशल गेस्ट के रूप में नजर आएंगी। चैनल ने एपिसोड का एक प्रोमो इंस्टाग्राम पर साझा किया है जिसमें गौहर खान और होस्ट सलमान खान कंटेस्टेंट्स को आईना दिखाते नजर आ रहे हैं।

प्रोमो में सलमान खान आवेज दरबार को फटकार लगाते हुए कहते हैं, “मैं आपकी मदद तभी कर सकता हूं, जब आप खुद की मदद करेंगे। जैसा आप पूरे सप्ताह अपने मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते हैं, मैं भी उसी तरह कुछ नहीं बोलूंगा।”

इसके बाद गौहर खान स्टेज पर आती हैं और अपने देवर आवेज दरबार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहती हैं, “अगर आप अपनी लड़ाई नहीं लड़ेंगे तो कौन लड़ेगा? आप बिल्कुल चुप हो, जहां पर असल में आपको बोलना चाहिए। अगर आप खुद में ही खोए रहेंगे तो इस शो में आपका कोई मौका नहीं मिलेगा जीतने का।”

इतना ही नहीं, गौहर खान ने अमाल मलिक पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अमाल, आपका जो किरदार है वो बहुत अधिक दोगला दिख रहा है, और आप किसी के नहीं हैं।”

‘वीकेंड का वार’ एपिसोड में सलमान खान और गौहर खान दोनों ही कंटेस्टेंट्स को उनके रवैये के लिए आड़े हाथों लेते नजर आएंगे। यह एपिसोड दर्शकों के लिए काफी मनोरंजक और चौंकाने वाला होने की उम्मीद है।

‘I Love Muhammad’ अभियान के समर्थन में प्रदर्शन के बाद Maulana Tauqeer Raza सहित आठगिरफ्तार

'I Love Muhammad' अभियान के समर्थन में प्रदर्शन के बाद Maulana Tauqeer Raza सहित आठगिरफ्तार
'I Love Muhammad' अभियान के समर्थन में प्रदर्शन के बाद Maulana Tauqeer Raza सहित आठगिरफ्तार

बरेली: उत्तर प्रदेश पुलिस ने शनिवार को इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष और स्थानीय मौलाना तौकीर रजा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह गिरफ्तारी शुक्रवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद हुई, जो ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान के समर्थन में तौकीर रजा द्वारा किए गए प्रदर्शन के आह्वान के बाद मस्जिद के बाहर हुई भिड़ंत का परिणाम है। पुलिस ने कुल 10 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें से सात मामलों में तौकीर रजा को आरोपी बनाया गया है।

घटना शुक्रवार को कोतवाली क्षेत्र में हुई, जहां ‘आई लव मुहम्मद’ के पोस्टर लेकर एक बड़ी भीड़ ने पुलिस से टकराव किया। प्रदर्शन रद्द किए जाने की वजह से गुस्सा जताया गया, जिसे तौकीर रजा ने अधिकारियों द्वारा अनुमति न मिलने का कारण बताया था।

पुलिस ने बताया कि इस हिंसा में 39 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से आठको जेल भेजा गया है। मौके से पिस्टल, पेट्रोल बॉटल और डंडे भी बरामद हुए हैं। बरेली एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि 22 पुलिसकर्मी इस दौरान घायल हुए हैं, जिनमें कुछ को गोली लगने की आशंका है। उनका मेडिकल परीक्षण चल रहा है।

एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने और हिंसा भड़काने की कोशिश की। सीसीटीवी फुटेज और गुप्तचर जानकारी के आधार पर सभी शामिलों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि बाहरी तत्वों की भागीदारी भी पाई गई है, जिनमें एक संदिग्ध नादेम भी फरार है।

मौलाना तौकीर रजा ने शुक्रवार रात एक वीडियो जारी कर पुलिस की कथित दावों को खारिज किया और कहा कि उन्हें उनके समर्थकों को संबोधित करने से रोका गया और उन्हें गृह हिरासत में रखा गया। वीडियो में उन्होंने प्रदर्शनकारियों की हिम्मत की प्रशंसा की और कहा कि वे राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन उनकी कोशिशें रोक दी गईं।

‘आई लव मुहम्मद’ विवाद की शुरुआत 9 सितंबर को कानपुर पुलिस द्वारा 24 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने से हुई थी। यह विवाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड और कर्नाटक तक फैल गया था। इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान मिला, जहां AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि ‘आई लव मुहम्मद’ कहना कोई अपराध नहीं है।

Sonam Wangchuk DGP पर SD Singh Jamwal ने लगाए गंभीर आरोप, “पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी के संपर्क में थे वांगचुक”

Sonam Wangchuk DGP पर SD Singh Jamwal ने लगाए गंभीर आरोप,
Sonam Wangchuk DGP पर SD Singh Jamwal ने लगाए गंभीर आरोप, "पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी के संपर्क में थे वांगचुक"

लेह: लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसडी सिंह जमवाल ने शनिवार को कहा कि हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा की मांग को लेकर भूख हड़ताल का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का पाकिस्तान से संबंध है। उन्होंने वांगचुक के पड़ोसी देशों के दौरों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

वांगचुक को शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

लेह में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी जमवाल ने बताया कि पुलिस ने पहले एक पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर वांगचुक के संपर्क में था।

जमवाल ने कहा, “हाल ही में हमने एक पाकिस्तानी पीआईओ को गिरफ्तार किया था जो सीमा पार रिपोर्ट भेज रहा था। हमारे पास इसके सबूत हैं। वांगचुक ने पाकिस्तान में एक डॉन कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और वे बंग्लादेश भी गए थे। यह गंभीर सवाल खड़े करता है। मामले की जांच जारी है।”

डीजीपी ने आगे आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों को उकसाया, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और करीब 80 लोग घायल हुए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने वाहनों और स्थानीय भाजपा कार्यालय में आग लगा दी थी।

Bihar Election: ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा से सियासी ताप बढ़ा, RJD और BJP की नजरें टिकीं

Bihar Election: ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा से सियासी ताप बढ़ा, RJD और BJP की नजरें टिकीं
Bihar Election: ओवैसी की सीमांचल न्याय यात्रा से सियासी ताप बढ़ा, RJD और BJP की नजरें टिकीं

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल क्षेत्र में अपनी चार दिवसीय ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ की शुरुआत कर दी है। यह यात्रा 24 सितंबर को किशनगंज से शुरू हुई और 27 सितंबर को समाप्त होगी। ओवैसी ने इस दौरे को चुनाव प्रचार का हिस्सा बताते हुए कहा कि सीमांचल की जनता से संवाद और जनसभाएं इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हैं।

ओवैसी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “यह कहना गलत है कि चुनाव प्रचार अब शुरू हो रहा है। हमारे बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान के नेतृत्व में काम पहले से चल रहा है। अब सीमांचल में हमारा चार दिवसीय दौरा है, जिसमें हम जनता से मिलेंगे और जनसभाएं करेंगे।”

सीमांचल: मुस्लिम बहुल इलाका, AIMIM का फोकस

सीमांचल क्षेत्र, जिसमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले शामिल हैं, मुस्लिम बहुल माना जाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने इन चार जिलों में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, बाद में इन पांच में से चार विधायक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए। ओवैसी एक बार फिर इस क्षेत्र में अपनी पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।

RJD का गढ़ था सीमांचल, AIMIM ने भरी सेंध

सीमांचल एक समय RJD का मजबूत गढ़ माना जाता था, विशेष रूप से मोहम्मद तसलीमुद्दीन के नेतृत्व में। लेकिन 2017 में उनके निधन के बाद RJD की पकड़ कमजोर हुई, जिसका फायदा AIMIM ने उठाया। अब ओवैसी इस क्षेत्र में फिर से जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

AIMIM ने किया महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव

AIMIM ने बिहार में RJD नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा भी जताई थी। ओवैसी ने बताया कि पार्टी की ओर से लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को तीन बार पत्र लिखे गए, जिसमें छह सीटों की मांग की गई थी। लेकिन RJD की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। ओवैसी ने कहा, “हम मंत्री पद नहीं चाहते थे, केवल बराबरी का सम्मान चाहते थे। लेकिन RJD ने हमें सहयोगी नहीं, गुलाम समझा।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, RJD AIMIM को महागठबंधन में शामिल करने से बच रही है, क्योंकि इससे मुस्लिम वोटों का विभाजन हो सकता है और BJP को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का आरोप लगाने का मौका मिल सकता है।

BJP भी सीमांचल पर नजरें गड़ाए

भले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ओवैसी की यात्रा को सार्वजनिक रूप से महत्वहीन बताया हो, लेकिन पार्टी सीमांचल की राजनीतिक हलचलों पर पैनी नजर रखे हुए है। 2020 के चुनाव में BJP ने सीमांचल क्षेत्र में आठसीटें जीती थीं। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने AIMIM की रणनीति को “शुद्ध वोट बैंक की राजनीति” बताया।

बिहार चुनावी परिदृश्य में सीमांचल एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। AIMIM की न्याय यात्रा न केवल इस क्षेत्र में उसके जनाधार को फिर से सक्रिय करने की कोशिश है, बल्कि यह RJD और BJP दोनों के लिए एक राजनीतिक चुनौती भी बनती जा रही है। चुनाव नजदीक आते ही सीमांचल की सियासत और भी गर्माने की संभावना है।

Bihar Election 2025 News: बिहार में महिलाएं बनी चुनावी मुद्दा, NDA और महागठबंधन ने लगाई वादों की लाइन

Bihar Election 2025 News: बिहार में महिलाएं बनी चुनावी मुद्दा, NDA और महागठबंधन ने लगाई वादों की लाइन
Bihar Election 2025 News: बिहार में महिलाएं बनी चुनावी मुद्दा, NDA और महागठबंधन ने लगाई वादों की लाइन

पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर दो बड़े राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी योजनाएं जारी की हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने हाल ही में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ शुरू की है, जबकि विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने महिलाओं को प्रत्यक्ष मासिक आर्थिक सहायता देने वाली ‘माई बहिन मान योजना’ की घोषणा की है।

एनडीए की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत बिहार की 75 लाख महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता भेजी गई है। यह योजना राज्य में प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसमें कृषि, पशुपालन, कुटीर उद्योग, सिलाई आदि के क्षेत्रों में कार्य शुरू करने का विकल्प है। इसके सफलतापूर्वक व्यवसाय संचालित करने वाली महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने की योजना भी है। इस योजना में स्व सहायता समूहों के माध्यम से प्रशिक्षण और ग्रामीण बाजारों का विस्तार भी शामिल है, जिससे महिलाओं को बेहतर विपणन सुविधाएं मिल सकें।

वहीं, RJD के नेता तेजस्वी यादव ने ‘माई बहिन मान योजना’ की घोषणा करते हुए कहा है कि यदि उनकी पार्टी सरकार बनाती है तो आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़ी समुदाय की महिलाओं को मासिक 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही वे ‘माँ योजना’ और ‘बेटी योजना’ जैसे अन्य महिला केंद्रित सामाजिक कल्याण योजनाएं भी शुरू करने का वादा करते हैं। यह योजना महिलाओं को तत्काल मासिक आर्थिक राहत प्रदान करने पर केंद्रित है।

दोनों योजनाओं के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार है:

एनडीए की योजना स्वरोजगार और दीर्घकालीन आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है, जबकि RJD की योजना सीधे मासिक नकद सहायता के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करती है। एनडीए की योजना सभी समुदायों की महिलाओं को लाभान्वित करती है, जबकि RJD की योजना विशेष रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग की महिलाओं पर केंद्रित है।

बिहार की चुनावी राजनीति में महिलाओं के बढ़ते महत्व को दर्शाते हुए दोनों पार्टियां महिलाओं के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण से योजनाएं प्रस्तुत कर रही हैं। एनडीए स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दे रहा है, जबकि RJD तत्काल आर्थिक सहायता देकर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।

इस तरह की प्रतिस्पर्धा बिहार की महिलाओं को राजनीतिक दलों का प्रमुख लक्ष्य बनाती जा रही है और उनके मताधिकार का प्रभाव आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएगा।