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CM अरविंद केजरीवाल पर होगी NIA जांच, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सिफारिश

CM अरविंद केजरीवाल पर होगी NIA जांच
CM अरविंद केजरीवाल पर होगी NIA जांच

दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। एक के बाद एक याचिका खारिज होने के बाद अब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल के खिलाफ NIA जांच की सिफारिश की है। उन्होंने कहा है कि केजरीवाल ने बैन किए गए आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से पॉलिटिकल फंडिंग ली है। LG के पास वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव आशू मोंगिया की शिकायत आई थी, जिसमें कहा गया था कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2014 से 2022 के बीच खालिस्तानी आतंकी समूहों से 1.6 करोड़ डॉलर यानी 133 करोड़ रुपए लिए थे, ताकि देवेंद्र पाल भुल्लर की रिहाई कराई जा सके।

जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों का खंडन किया है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चुनावी मौसम में LG साहब हेडलाइन बनाने की कोशिशें कर रहे हैं। ये LG के संविधानिक ऑफिस का दुरुपयोग है। इस मामले में हाई लेवल इन्वेस्टिगेशन की मांग करने वाली एक याचिका को दो साल पहले हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। आपको बता दें कि इस लेटर में लिखा है कि 1 मई को LG के पास वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव आशू मोंगिया ने एक शिकायत भेजी थी। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AAP के पूर्व कार्यकर्ता डॉ. मुनीष कुमार रायजादा के कुछ पोस्ट का प्रिंटआउट, एक लेटर और एक पेनड्राइव भी थी। अपनी शिकायत में आशू मोंगिया ने पेनड्राइव के एक वीडियो का जिक्र किया था, जिसमें खालिस्तानी आतंकी और सिख फॉर जस्टिस का फाउंडर गुरपतवंत सिंह पन्नू ने यह दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP ने 2014 से 2022 के बीच खालिस्तानी समूहों से 1.6 करोड़ डॉलर यानी 133.60 करोड़ रुपए की फंडिंग ली।

LG Letter
LG Letter

इसमें यह दावा भी किया गया था कि 2014 में केजरीवाल ने न्यूयॉर्क के गुरुद्वारा रिचमंड हिल में खालिस्तान समर्थक सिखों से मुलाकात की थी। इस मीटिंग में केजरीवाल ने वादा किया था कि अगर AAP को खालिस्तानी समूहों से फंडिंग मिलती रहेगी तो वे देवेंद्र पाल भुल्लर की रिहाई में मदद करेंगे। शिकायत में यह भी लिखा है कि मुनीष कुमार रायजादा, जो कि 2014 में AAP कार्यकर्ता थे, उन्होंने X पर कई ट्वीट्स में न्यूयॉर्क के रिचमंड हिल गुरुद्वारे में अरविंद केजरीवाल और सिख नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें शेयर की थीं। मुनीष ने अपने ट्वीट्स में ये भी कन्फर्म किया था कि पब्लिक मीटिंग्स के अलावा इस गुरुद्वारे में केजरीवाल ने खालिस्तान समर्थक सिख नेताओं से अकेले में भी मुलाकात की थी।

क्या है सिख फॉर जस्टिस

सिख फॉर जस्टिस यानी SFJ सिखों के लिए अलग खालिस्तान की मांग करने वाला एक संगठन है। 2007 में अमेरिका में इसकी स्थापना की गई थी। गुरपतवंत सिंह पन्नू SFJ के संस्थापकों में से एक है। SFJ अपने अलगाववादी अभियान ‘रेफरेंडम 2020’ के तहत पंजाब को भारत से मुक्त कराने की बात करता है। SFJ ने अपने अगस्त 2018 में लंदन डिक्लेरेशन में भारत से अलग होने और पंजाब को एक स्वतंत्र देश के रूप में फिर से स्थापित करने के सवाल पर दुनियाभर में रहने वाले सिख समुदाय के बीच पहला जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी। जिसके बाद ‘रेफरेंडम 2020’ नाम से बाकायदा एक वेबसाइट बनाई गई थी। इसमें लिखा था- एक बार जब भारत से आजादी को लेकर पंजाबी लोगों के भीतर आम सहमति बन जाएगी तो हम पंजाब को एक देश के रूप में एस्टैब्लिश करने के लक्ष्य के साथ संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करेंगे।

क्यों लगा 2019 में SFJ पर प्रतिबंध लगा

आपको बता दें कि पन्नू ब्रिटेन में रह रहे बब्बर खालसा इंटरनेशनल के परमजीत सिंह पम्मा, कनाडा में रहने वाले KTF चीफ हरदीप सिंह निज्जर और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के मलकीत सिंह फौजी के संपर्क में है। केंद्र सरकार ने 2019 में अलगाववादी गतिविधियां चलाने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत SFJ पर बैन लगाया। गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा कि सिखों के लिए रेफरेंडम की आड़ में SFJ पंजाब में अलगाववाद और उग्रवादी विचारधारा का समर्थन कर रहा है। साथ ही विदेशी धरती पर सुरक्षित ठिकानों से काम कर रहा है और दुश्मन देशों का उसे समर्थन मिल रहा है। पन्नू पर साल 2020 में अलगाववाद को बढ़ावा देने और पंजाबी सिख युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2020 को पन्नू को UAPA के तहत आतंकी घोषित किया। 2020 में सरकार ने SFJ से जुड़े 40 से ज्यादा वेबपेज और यूट्यूब चैनलों को बैन किया।

POK पर फारूक अब्दुल्ला का आया बड़ा बयान, कहा “पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं”

POK पर फारूक अब्दुल्ला का आया बड़ा बयान, कहा "पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं"
POK पर फारूक अब्दुल्ला का आया बड़ा बयान, कहा "पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं"

जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ”पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं” और उसके पास परमाणु बम भी हैं जो हम पर गिरेंगे।” उनकी ये टिप्पणी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ‘POK का भारत में विलय होगा’ के बयान पर आई है। अप्रैल महीने में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में रैली को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत में हो रहे विकास को देखते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के लोग खुद भारत के साथ रहने की मांग करेंगे।

PoK हमारा था, है और हमारा रहेगा; राजनाथ सिंह ने कहा था कि चिंता मत करें, पीओके हमारा था, है और हमारा रहेगा। भारत की ताकत बढ़ रही है। दुनिया भर में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है और हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। अब पीओके में हमारे भाई-बहन खुद भारत के साथ आने की मांग करेंगे।

पुंछ हमले पर भी सवाल उठाए

फारूक अब्दुल्ला ने पुंछ हमले पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि, ‘यह बहुत अफसोसजनक है। वे (BJP) कहते थे कि आतंकवाद के लिए 370 जिम्मेदार है तो आज 370 नहीं है, अब इस देश में आतंकवाद है या नहीं, इसका जवाब आप गृह मंत्री अमित शाह से पूछें? हमारे सिपाही रोज शहीद होते हैं लेकिन वे खामोश हैं।’. जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है PoK
PoK यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का वह हिस्सा है जो पाकिस्तान के साथ लगता है। 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने कबीलाई विद्रोहियों की मदद से जम्मू-कश्मीर के इस हिस्से पर कब्जा कर लिया था।

भारतीय फौज इस हिस्से को वापस लेने के लिए लड़ रही थी, मगर उसी समय भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) चले गए। UN ने दखल देकर दोनों देशों के बीच युद्ध विराम करवा दिया और ‘जो जहां था, वहीं काबिज हो गया।’

उसी समय से दोनों देशों की फौजें इंटरनेशनल सरहद की जगह लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के दोनों तरफ डटी हैं। LoC दोनों मुल्कों के बीच खींची गई 840 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। पाकिस्तान ने PoK को दो हिस्सों में बांट रखा है
पाकिस्तान, PoK को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है और उसे आजाद कश्मीर बताता है। मौजूदा समय में पाकिस्तान ने PoK को गिलगिट और बाल्टिस्तान, दो हिस्सों में बांट रखा है। भारत सरकार समय-समय पर PoK को वापस लेने की बात कहती रही है।

2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई में BJP सरकार बनने के बाद यह मुद्दा ज्यादा गरमा गया। मोदी सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म किए जाने के बाद PoK को वापस लेने की मांग जोर-शोर से उठती रही है।

12 करोड़ की फिल्म ने 35 करोड़ कमाए, एक ही नाम से 2024 में बनी फिल्म 350 करोड़ के बजट में 100 करोड़ भी कमाना मुश्किल

12 करोड़ की फिल्म ने 35 करोड़ कमाए, एक ही नाम से 2024 में बनी फिल्म 350 करोड़ के बजट में 100 करोड़ भी कमाना मुश्किल
12 करोड़ की फिल्म ने 35 करोड़ कमाए, एक ही नाम से 2024 में बनी फिल्म 350 करोड़ के बजट में 100 करोड़ भी कमाना मुश्किल

बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों के रीमेक और सीक्वल बनते हुए दिख रहे हैं. वहीं कुछ फिल्मों के नाम तो पुरानी मूवी के नाम पर रखे जा रहे हैं. हालांकि यह मूवीज हिट साबित हो ऐसा नहीं कहा जा सकता. इस बात का अंदाजा 26 साल पहले आई फिल्म के एक जैसे नाम वाली 2024 की फिल्म का हाल देखकर लगाया जा सकता है. जी हां हम बात कर रहे हैं अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ की लेटेस्ट फिल्म बड़े मियां छोटे मियां की, जो ईद के मौके पर रिलीज हुई थी. फिल्म का बजट 350 करोड़ बताया गया. लेकिन रिलीज के कई दिनों बाद भी फिल्म 100 करोड़ की वर्ल्डवाइड कमाई तो हासिल कर चुकी. लेकिन भारत में यह आंकड़ा 75 करोड़ तक भी नहीं पहुंच पाया.

इस बिग बजट फिल्म का नाम साल 1988 में आई अमिताभ बच्चन, गोविंदा, रवीना टंडन और अनुपम खेर स्टारर बड़े मियां छोटे मियां के नाम का टू कॉपी है. फिल्म को डेविड धवन ने डायरेक्ट किया. जबकि बजट केवल 12 करोड़ था. वहीं फिल्म ने 35.21 करोड़ की कमाई हासिल की. वहीं आज के समय में फिल्म का बॉक्स ऑफिस 159 करोड़ से ज्यादा का है. इस सुपरहिट मूवी को वाशु भगनानी ने प्रोड्यूस किया था. जबकि साल 2024 में रिलीज हुई बिग बजट बड़े मियां छोटे मियां को भी उन्होंने और उनके बेटे जैकी भगनानी ने प्रोड्यूस किया. इसके अलावा अली अब्बास जफर, दीपशिका देशमुख और हिमांशू किशन भी फिल्म के प्रोड्यूसर्स में से एक हैं. Bade Miyan Chote Miyan की बात करें तो फिल्म को डायरेक्ट अली अब्बास जफर ने किया है, जो 10 अप्रेल 2024 को रिलीज हुई है. अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ के अलावा पृथ्वीराज सुकुमारन, मानुषी छिल्लर, अलाया एफ और सोनाक्षी सिन्हा अहम किरदार में नजर आए हैं. जबकि कलेक्शन की बात करें तो 26 दिनों में फिल्म ने 108 करोड़ वर्ल्डवाइड औऱ भारत में 63.75 करोड़ की कमाई हासिल की है. गौरतलब है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बाद ओटीटी पर रिलीज होने के लिए तैयार है. कहा जा रहा है कि यह नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी.

Jharkhand ED Raid: मंत्री के PA का नौकर निकला धनकुबेर, इतने सारे कैश को देखकर ED के अफसर का उड़ गया होश

Jharkhand ED Raid: मंत्री के PA का नौकर निकला धनकुबेर!, इतने सारे कैश को देखकर ED के अफसर का उड़ गया होश
Jharkhand ED Raid: मंत्री के PA का नौकर निकला धनकुबेर!, इतने सारे कैश को देखकर ED के अफसर का उड़ गया होश

झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के सहायक के घर पर ईडी ने छापेमारी कर 20 करोड़ रुपये कैश बरामद किए गये हैं. जांच एजेंसी ईडी ने मौके पर नोटों को गिनने के लिए कई मशीनें भी बुलाई हैं. ईडी अभी भी बरामद कैश की गिनती कर रही है. प्रवर्तन निदेशालय रांची में कई जगहों पर छापेमारी कर रहा है. वीरेंद्र राम मामले में झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के पीए संजीव लाल के घरेलू सहायक से भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई. ईडी ने कुछ योजनाओं के कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फरवरी 2023 में झारखंड ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य अभियंता वीरेंद्र के. राम को गिरफ्तार किया था. वहीं इस मामले पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार के मंत्री आलमगीर आलम पर निशाना साधते हुए कहा, ‘यह आलमगीर आलम का पैसा है, किसी दूसरे का नहीं है और गिनती 50 करोड़ से ऊपर की होगी.

हेमंत सोरेन जेल में हैं, ये सिंडिकेट क्राइम है. ये बांग्लादेशियों को बुलाकर यहां की डेमोग्राफी बदल रहे हैं. झारखंड में अब राष्ट्रपति शासन के अलावा कोई और चारा नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईडी का मानना है कि यह पैसा काली कमाई का हिस्सा है. बता दें कि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड में चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था और उनकी रैली के कुछ दिन बाद यह कार्रवाई हुई है, जिसमें बड़ी मात्रा में यह कैश मिला है. बता दें कि पिछले साल दिसंबर में भी झारखंड में बड़ी संख्या में कैश बरामदगी हुई थी. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और कारोबारी धीरज साहू के ठिकानों से इनकम टैक्स ने 350 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश बरामद किया था. इसपर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि छापेमारी में जो कैश बरामद किया गया है, वो मेरी शराब की कंपनियों का है. शराब का कारोबाद नकदी में ही होता है और इसका कांग्रेस पार्टी से कोई संबंध नहीं है.

नैनीताल के जंगलो मे आग लगाने वाले गिरफ्तार, बताई वजह क्यों लगते थे आग

नैनीताल के जंगलो मे आग लगाने वाले गिरफ्तार, बताई वजह क्यों लगते थे आग
नैनीताल के जंगलो मे आग लगाने वाले गिरफ्तार, बताई वजह क्यों लगते थे आग

हम आग से खेलते हैं… जला देंगे सारा जंगल” कुछ लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें कुछ बाहरी तथाकथित मजदूर उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के बीच वीडियो बनाते हुए कह रहे हैं कि “हमारा काम आग लगाना और आग से खेलना है. और इसी काम के लिए हम आए हैं, “पहाड़ों को जलाकर भस्म करना है” .वायरल वीडियो उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल के खिर्सू नागदेव रेंज का बताया जा रहा है. हालांकि Digi Khabar इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता.

नागदेव रेंज से 5 लोगों को किया था गिरफ्तार

दरअसल बीते 28 अप्रैल को नागदेव रेंज में खिर्सू के पास के जंगलों में संदिग्ध परिस्थितियों में 5 मजदूरों को गिरफ्तार किया था, इन 5 लोगों की पहचान बिहार निवासी फिरोज आलम, मोसार आलम, नुरूल, सलीम, नाजफेर आलम के रूप में हुई है. ये पांचों खिर्सू क्षेत्र में मजदूरी का कार्य करते थे. वन विभाग ने इन 5 लोगों को जंगलों में आग लगाते हुए पकड़ा था. जिसके बाद कोतवाली श्रीनगर द्वारा सभी युवकों को गिरफ्तार कर लिया. आपको बत दे कि श्रीनगर गढ़वाल कोतवाली के एसएचओ होशियार पंखोली बताते हैं कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में भी है, जो 5 व्यक्ति गिरफ्तार किए गए थे यह वीडियो उनकी नहीं है. इसकी सच्चाई का पता लगाया जा रहा है. खिर्सू रेंज से गिरफ्तार किए गए 5 लोगों की संलिप्तता वीडियो में नहीं है.

अब तक 360 मुकदमे दर्ज

उत्तराखंड में जंगलों में आग का सिलसिला जारी है. वन विभाग लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहा है. शरारती तत्व भी वन विभाग की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार अब तक इस सीजन में जंगल में आग लगाने पर वन संरक्षण अधिनियम और वन अपराध के तहत 350 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं. जिनमें 290 मुकदमे अज्ञात और 60 मुकदमे नामजद दर्ज किए गए हैं. साथ ही जंगल की आग की सूचना देने के लिए नंबर भी जारी किए गए हैं. आप इन टोल फ्री नंबर 18001804141, 01352744558 पर कॉल कर सकते हैं. साथ ही 9389337488 व 7668304788 पर व्हाट्सएप के माध्यम से भी सूचित कर सकते हैं.

Hamida Banu: Google ने बनाया भारत की पहली महिला रेसलर का Doodle, जानें इनकी अनसुनी कहानियां

Google Doodle
Google Doodle

Google ने बनाया भारत की पहली महिला रेसलर का Doodle, जानें इनकी अनसुनी कहानियां

Google ने बनाया भारत की पहली महिला रेसलर का Doodle, जानें इनकी अनसुनी कहानियां

भारत के खेल इतिहास की अग्रणी शख्सियत को उचित श्रद्धांजलि देते हुए, Google ने देश की पहली महिला पहलवान हमीदा बानो के सम्मान में एक डूडल समर्पित किया है। सर्च इंजन के होमपेज पर प्रमुखता से प्रदर्शित डूडल, कुश्ती की दुनिया में बानू की अभूतपूर्व उपलब्धियों और स्थायी विरासत को याद कराता है। 20वीं सदी की शुरुआत में पंजाब में जन्मी हमीदा बानो ने कुश्ती के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक मानदंडों और लैंगिक रूढ़ियों को चुनौती दी, उस समय जब खेल मुख्य रूप से पुरुषों का वर्चस्व था। काफी विरोध और संदेह का सामना करने के बावजूद, बानू के दृढ़ संकल्प और प्रतिभा ने उन्हें भारत में महिला कुश्ती में सबसे आगे खड़ा कर दिया। बानू की कुश्ती कौशल और दृढ़ता ने उन्हें व्यापक प्रशंसा और पहचान दिलाई, जिससे महिला एथलीटों की भावी पीढ़ियों के लिए उनके नक्शेकदम पर चलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। उनके निडर रवैये और अपनी कला के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने देश भर में अनगिनत महिलाओं को अपनी एथलेटिक आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और यथास्थिति को चुनौती देने के लिए प्रेरित किया। अपने शानदार करियर के दौरान, हमीदा बानो ने कई मील के पत्थर और प्रशंसाएं हासिल कीं, जिनमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में कई चैंपियनशिप और खिताब शामिल हैं। उनके असाधारण कौशल और प्रतिस्पर्धी भावना ने उन्हें अपने साथियों और प्रशंसकों से समान रूप से सम्मान और प्रशंसा दिलाई, जिससे भारतीय कुश्ती के सच्चे अग्रदूत के रूप में उनकी विरासत मजबूत हुई। कुश्ती मैट पर अपनी उपलब्धियों के अलावा, हमीदा बानो हर जगह महिलाओं के लिए सशक्तिकरण और लचीलेपन का प्रतीक भी थीं। बाधाओं को तोड़कर और परंपराओं को चुनौती देकर, उन्होंने रूढ़िवादिता को तोड़ा और खेल की दुनिया में अधिक लैंगिक समानता का मार्ग प्रशस्त किया। जैसा कि भारत Google डूडल के माध्यम से हमीदा बानो की विरासत का जश्न मना रहा है, उनकी उल्लेखनीय यात्रा बाधाओं पर काबू पाने और महानता हासिल करने में दृढ़ संकल्प, साहस और दृढ़ता की शक्ति की याद दिलाती है। अपने अग्रणी प्रयासों के माध्यम से, बानू ने भारतीय कुश्ती के इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी और एथलीटों की पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और सितारों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना जारी रखा।

कांग्रेस को एक और झटका, पुरी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुचारिता मोहंती नहीं लड़ेंगी चुनाव

Rahul Gandhi And Sucharita Mohanty
Rahul Gandhi And Sucharita Mohanty

कांग्रेस को एक और झटका, पुरी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुचारिता मोहंती नहीं लड़ेंगी चुनाव

कांग्रेस को एक और झटका, पुरी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुचारिता मोहंती नहीं लड़ेंगी चुनाव

गुजरात की सूरत और मध्य प्रदेश की इंदौर सीट के बाद कांग्रेस को एक और करारा झटका लगा है। पुरी सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी सुचारिता मोहंती ने फंड की कमी का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। बता दें कि ओडिशा की पुरी सीट हॉटसीट में से एक है। यहां भाजपा के दिग्गज नेता संबित पात्रा मैदान में हैं। बता दें कि कांग्रेस प्रत्याशी के नाम वापस लेने के बाद संबित पात्रा के लिए रास्ता आसान हो गया है। साथ ही उन्होने पुरी लोकसभा के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीट पर कमजोर उम्मीदवार उतारने का आरोप लगाया है। बता दें कि इससे पहले सूरत सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रहे नीलेश कुम्भणी का नामांकन ही रद्द हो गया था। इसके अलावा अन्य प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस तरह भाजपा के मुकेश कुमार चुनाव होने से पहले ही निर्विरोध जीत गए। वहीं इंदौर लोकसभा सीट का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। यहां से कांग्रेस ने अक्षय बम को उम्मीदवार बनाया था। बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। अब इंदौर सीट पर भी कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं है।

पुरी सीट से कांग्रेस का टिकट लौटाने वाली मोहंती ने बताया कि उनको पार्टी की तरफ से फंड नहीं मिल रहा है। ऐसे में पैसे की कमी के चलते वह चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं हैं। सुचारिता ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में कहा कि पार्टी की तरफ से राशि ना मिलने की वजह से वह चुनाव प्रचार भी नहीं कर पा रही हैं। बता दें कि 25 मई को छठे चरण में पुरी सीट पर मतदान होना है। 

क्या संबित पात्रा की राह आसान होगी?

कांग्रेस उम्मीदवार के मैदान से हटने से संबित पात्रा ही नहीं बीजद उम्मीदवार को भी फायदा हो सकता है। बीजद उम्मीदवार ने पिछली बार बाजी मार ली थी। सुचरिता महांति 2014 में पुरी संसदीय क्षेत्र चुनाव लड़ चुकी हैं। 2014 में वह दुसरे नंबर थी और उन्हें 2 लाख 59 हजार 800 वोट मिला था। अब इनके हटने से कहीं न कहीं संबित पात्रा और बीजद दोनों की तरफ वोट शिफ्ट होगा।

International Firefighter’s Day: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस

International Firefighters Day
International Firefighters Day

International Firefighter’s Day: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस

International Firefighter’s Day: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस

हर साल 4 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस, उन निस्वार्थ पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देता है जो समुदायों को आग और अन्य आपात स्थितियों से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। दुनिया भर में अग्निशामकों की बहादुरी, बलिदान और अटूट प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है। अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई एक दुखद घटना से मानी जा सकती है। 4 जनवरी, 1999 को ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में जंगल की आग से लड़ते हुए पाँच अग्निशामकों की जान चली गई। इस विनाशकारी क्षति के जवाब में, विक्टोरिया के छोटे से शहर लिंटन के निवासियों ने अग्निशामकों के बलिदान का सम्मान करने और उनकी सेवा के लिए आभार व्यक्त करने के लिए एक दिन का विचार प्रस्तावित किया।

अपनी स्थापना के बाद से, अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक दिवस एक वैश्विक उत्सव बन गया है, जो समुदायों को एक साथ आने और अग्निशामकों के अमूल्य योगदान को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। परेड और समारोह आयोजित करने से लेकर सामुदायिक कार्यक्रमों और धन संचयन की मेजबानी करने तक, दुनिया भर के लोग इस अवसर का उपयोग अपनी स्थानीय अग्निशमन सेवा के लिए समर्थन और प्रशंसा दिखाने के लिए करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक दिवस का महत्व केवल मान्यता से परे है – यह कर्तव्य के दौरान अग्निशामकों द्वारा सामना किए जाने वाले अंतर्निहित खतरों और चुनौतियों की याद दिलाता है। अग्निशामक नियमित रूप से जीवन बचाने, संपत्ति की रक्षा करने और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए खुद को नुकसान पहुंचाते हैं, अक्सर चरम परिस्थितियों में काम करते हैं और अप्रत्याशित खतरों का सामना करते हैं।

इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक दिवस अग्नि सुरक्षा और रोकथाम उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। जनता को आग के खतरों के बारे में शिक्षित करके, अग्नि सुरक्षा प्रथाओं को बढ़ावा देकर और आग की रोकथाम की पहल की वकालत करके, समुदाय आग की घटनाओं को कम करने और अग्निशामक हस्तक्षेप की आवश्यकता को कम करने में मदद कर सकते हैं।जैसे-जैसे दुनिया चल रही सीओवीआईडी-19 महामारी से जूझ रही है, अग्निशामकों का लचीलापन और समर्पण पूर्ण प्रदर्शन पर रहा है। महामारी से उत्पन्न अतिरिक्त चुनौतियों के बावजूद, अग्निशामक अपने समुदायों की सेवा करने, आवश्यक आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाएं और सहायता प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहे हैं।

शतरंज के पूर्व दिग्गज कास्परोव ने राहुल गांधी पर कसा तंज, कहा रायबरेली से जीतकर दिखाएं

Rahul Gandhi and Garry Kasparov
Rahul Gandhi and Garry Kasparov

शतरंज के पूर्व दिग्गज कास्परोव ने राहुल गांधी पर कसा तंज, कहा रायबरेली से जीतकर दिखाएं

शतरंज के पूर्व दिग्गज कास्परोव ने राहुल गांधी पर कसा तंज, कहा रायबरेली से जीतकर दिखाएं

भारतीय शतरंज खिलाड़ी इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज कर रहे हैं। कैंडिडेट्स हो या वर्ल्ड चैंपियनशिप, भारतीय खिलाड़ियों ने हर जगह अपना लोहा मनवाया है। इस बीच जब एक यूजर ने मौजूदा खिलाड़ियों को पूर्व वर्ल्ड चैंपियन से बेहतर तो बताया तो एक्स पर एक नई बहस शुरू हो गई। रूस के पूर्व वर्ल्ड चैंपियन गैरी कास्परोव ने राहुल गांधी का नाम लेकर इस बहस को नया मोड़ दे दिया। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने इस पर मजाकिया अंदाज में लिखा कि ‘बहुत राहत महसूस हो रही है कि गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद जल्दी रिटायर हो गए और उन्हें हमारे समय की सबसे बड़ी शतरंज प्रतिभा का सामना नहीं करना पड़ा।’  आपको बता दें की हाल ही में कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर राहुल गांधी की एक वीडियो साझा की थी। इस वीडियो में राहुल गांधी अपने मोबाइल पर चेस खेलते नजर आ रहे थे। इस दौरान राहुल गांधी ने अपना पसंदीदा चेस खिलाड़ी गैरी कास्परोव को बताया और चेस के खेल और राजनीति की तुलना भी कर डाली। राहुल गांधी ने कहा कि जब आप राजनीति और चेस के खेल में बेहतर हो जाते हैं तो विपक्षी के मोहरे भी आपके मोहरों की तरह काम करते हैं। 

जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक यूजर ने इस पर मजाकिया अंदाज में लिखा कि ‘बहुत राहत महसूस हो रही है कि गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद जल्दी रिटायर हो गए और उन्हें हमारे समय की सबसे बड़ी शतरंज प्रतिभा का सामना नहीं करना पड़ा।’ इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए गैरी कास्परोव ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में राहुल गांधी पर लगभग तंज कसते हुए लिखा कि ‘परंपरागत निर्देश है कि आपको शीर्ष पर चुनौती देने से पहले रायबरेली से जीतकर दिखाना चाहिए।’  

कास्परोव ने तंज पर दी सफाई

अब उन्होंने एक नए पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने सिर्फ छोटा सा मजाक किया था और उन्हें उम्मीद है कि उनके मजाक को विशेषज्ञता के तौर पर नहीं देखा जाएगा। गैरी कास्परोव का यह पोस्ट ऐसे समय आया है, जब शुक्रवार को ही राहुल गांधी ने कांग्रेस की परंपरागत लोकसभा सीट रायबरेली से नामांकन किया है। गैरी कास्परोव ने साल 2005 में चेस के खेल से संन्यास ले लिया था। कास्परोव, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर आलोचक माने जाते हैं और इसके चलते उन्हें रूस छोड़ना पड़ा था। फिलहाल कास्परोव क्रोएशिया में रह रहे हैं। कास्परोव महज 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बने थे और लगातार 255 हफ्ते तक दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी रहे थे।

19 साल बाद घर लौटे संजय निरुपम, मुख्यमंत्री शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल

Sanjay Nirupam
Sanjay Nirupam

19 साल बाद घर लौटे संजय निरुपम, मुख्यमंत्री शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल

19 साल बाद घर लौटे संजय निरुपम, मुख्यमंत्री शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल

शिवसेना से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले संजय निरुपम की 19 साल के बाद फिर से ‘घर वापसी’ हो गई है। कांग्रेस के पूर्व नेता संजय निरुपम शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। मुंबई के पूर्व सांसद ने लगभग दो दशक पहले अविभाजित शिवसेना छोड़ी थी। निरुपम को पिछले महीने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने के आरोप में कांग्रेस से निष्कासित कर दिया था। निरुपम मुख्यमंत्री शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हो गए। निरुपम अविभाजित शिव सेना के हिंदी मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ के संपादक रह चुके हैं। निरुपम 2005 में कांग्रेस में शामिल हुए थे और उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया था। वह 2009 के लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्तर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता राम नाइक को मामूली अंतर से हराकर सांसद निर्वाचित हुए। कांग्रेस में 19 साल तक रहने के दौरान उन्होंने कई पदों पर काम किया जिनमें से मुंबई इकाई के प्रमुख पद की जिम्मेदारी भी शामिल थी। कांग्रेस ने पिछले महीने “अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों” के चलते छह साल के लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। निष्कासन से कुछ दिन पहले ही निरुपम ने मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट पर फैसला करने के लिए पार्टी को “एक सप्ताह का अल्टीमेटम” दिया था। मूल रूप से बिहार के निवासी निरुपम 1990 के दशक में पत्रकारिता के रास्ते राजनीति में आए। वह मुंबई से प्रकाशित अविभाजित शिवसेना के हिंदी मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ के संपादक बने। उनके कार्य से प्रभावित तत्कालीन शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उन्हें 1996 में राज्यसभा भेजा। निरुपम शिवसेना के मुखर नेता के रूप में उभरे। शिवसेना उस वक्त मुंबई में बसे उत्तर भारतीय मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही थी। हालांकि निरुपम को उस वक्त झटका लगा जब शिवसेना ने 2005 में उनसे राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने को कहा। शिवसेना से मतभेद होने पर अंततः 2005 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और उसके बाद कांग्रेस में शामिल हो गए।