Home Blog Page 303

World Press Freedom Day 2024: जाने क्यों मनाया जाता है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस?, क्या है इसका महत्व?

World Press Freedom Day
World Press Freedom Day

जाने क्यों मनाया जाता है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस?, क्या है इसका महत्व?

जाने क्यों मनाया जाता है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस?, क्या है इसका महत्व?

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानी फोर्थ पिलर ऑफ डेमोक्रेसी कहा जाता है. हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस यानी वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाता है. यह दिन उन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को समर्पित है, जो सच को सामने लाने और जनता को सूचित करने के लिए खतरे का सामना करते हैं. पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है, जो किसी खतरे से कम नहीं. दुनियाभर के पत्रकारों पर जानलेवा हमलों के मामले आए दिन देखने को मिलते हैं. मीडिया के महत्व को बढ़ाने के लिए हर साल विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. इस दिन को पत्रकारों को सम्मानित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

1991 में यूनेस्को की एक कॉन्फ्रेंस में प्रेस स्वतंत्रता दिवस को लेकर सिफारिश की गई। जिसके बाद 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की। लेकिन इसकी शुरुआत तब हुई जब साल 1991 में अफ्रीकी पत्रकारों द्वारा प्रेस की आजादी के लिए अभियान छेड़ा गया था। जिसके बाद 3 मई को ही प्रेस की फ्रीडम को लेकर एक बयान जारी किया था। जिसको डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से भी जाना जाता है। जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया। तब से लेकर अब तक हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

प्रेस स्वतंत्रता का महत्व

प्रेस स्वतंत्रता लोगों को इनफॉर्म्ड डिसीजन लेने के लिए जरूरी जानकारी देने में अहम भूमिका निभाती है. यह सरकारों और कई शक्तिशाली संस्थाओं को जवाबदेह रखने में भी मदद करता है. फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन एक फंडामेंटल ह्यूमन राइट्स है और प्रेस स्वतंत्रता इस अधिकार का अभिन्न अंग है. यह लोगों को अपने विचारों को व्यक्त करने का राइट देता है. एक स्वतंत्र और समृद्ध मीडिया समाज के सभी क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने में जरूरी भूमिका निभा सकता है. यह शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे 2024 थीम

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे यानी विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हर साल एक खास थीम तैयार की जाती है. इस साल की थीम ‘ए प्रेस फॉर द प्लैनेट: जर्नलिज्म इन द फेस ऑफ द एनवायर्नमेंटल क्राइसिस’ है. पत्रकारों के काम को सम्मान देने के लिए यह दिन मनाया जाता है.

बिना इंटरनेट के भी WhatsApp पर भेज पाएंगे फोटो-वीडियो, ऐसे काम करेगा ये फीचर

WhatsApp Update
WhatsApp Update

बिना इंटरनेट के भी WhatsApp पर भेज पाएंगे फोटो-वीडियो, ऐसे काम करेगा ये फीचर

बिना इंटरनेट के भी WhatsApp पर भेज पाएंगे फोटो-वीडियो, ऐसे काम करेगा ये फीचर

इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलने पर व्हाट्सएप काम करना बंद कर देता है. ऐसे में आप कई बार जरूरी फाइल्स, फोटो और वीडियो ट्रांसफर नहीं कर पाते हैं. इसी को देखते हुए व्हाट्सएप जल्दी है एक नया फीचर लॉन्च कर सकता है. इसकी मदद से यूजर्स बिना इंटरनेट फोटो और वीडियो शेयर कर पाएंगे. यह एक स्टैंडअलोन फीचर होगा, जो यूजर्स को लोकल नेटवर्क की मदद से फाइल्स, फोटो और वीडियो शेयर करने का ऑप्शन देता है. इसमें इंटरनेट को बाईपास किया जाता है. WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, जल्द ही व्हाट्सएप लोकल फाइल शेयरिंग फीचर ला सकता है, जिसकी मदद से यूजर्स फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट को शेयर कर पाएंगे. इसके लिए यूजर्स को nearby फीचर की जरूरत हो. इस फीचर को ऑन करने के बाद यूजर्स अपनी फाइल को ट्रांसफर कर पाएंगे.  रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप यूजर्स को सबसे पहले सेटिंग्स में जाकर अपना ब्लूटूथ ऑन करना होगा. इसके बाद वह किसी और को ये फाइल्स भेज सकते हैं. ये फाइल्स इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के दूसरे टेक्स्ट की तरह ही एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड (end-t-end encrypted) होगी. 

ऐप को एंड्रॉयड परमिशन की होगी जरूरत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फीचर को काम करने के लिए ऐप को एंड्रॉयड परमिशन की जरूरत होगी. ऑफलाइन फाइल्स शेयर करने के लिए जरूरी है कि जिस डिवाइस के साथ आप फाइल शेयर कर रहे हैं, उन्हें भी ऑफलाइन फाइल-शेयरिंग फीचर उपलब्ध हो. यह फीचर ऐप के आने वाले अपडेट में रोल आउट हो सकता है. 

कैसे काम करेगा या फीचर?

रिपोर्ट के मुताबिक, आसपास मौजूद डिवाइसेज को पहचानने, कनेक्ट करने और उनकी पोजीशन की जानकारी के लिए परमिशन की जरूरत होगी. ऐसे में यूजर्स जब चाहें इस परमिशन को ऑफ कर सकते हैं. इस फीचर पर फिलहाल काम चल रहा है और इसके रिलीज होने से जुड़ी अभी कोई तय तारीख या समय की जानकारी नहीं मिली है.

Kapil Sharma Show: नेटफ्लिक्स ने बंद किया कपिल शर्मा का शो, लगा 25 करोड़ का फटका

The Kapil Sharma Show
The Kapil Sharma Show

Kapil Sharma Show: नेटफ्लिक्स ने बंद किया कपिल शर्मा का शो, लगा 25 करोड़ का फटका

Kapil Sharma Show: नेटफ्लिक्स ने बंद किया कपिल शर्मा का शो, लगा 25 करोड़ का फटका

नेटफ्लिक्स के नए शो ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शर्मा शो’ में कपिल शर्मा का जादू ओटीटी पर नहीं चल पाया है। नेटफ्लिक्स ने इस शो को पहले एपिसोड के प्रसारण के पांच हफ्तों में ही बंद करने का फैसला किया है। शो के आखिरी एपिसोड की शूटिंग हो चुकी हैं और जानकारी के मुताबिक इन पांच एपिसोड में ही नेटफ्लिक्स ने कपिल शर्मा पर करीब 25 करोड़ रुपये बहा दिए हैं। कपिल शर्मा इन दिनों कलर्स टीवी के एक अंत्याक्षरी कार्यक्रम का मेजबान बनने की कोशिश में भी हैं, लेकिन उनकी घटती ब्रांड वैल्यू को देखते हुए इस कार्यक्रम के लिए प्रायोजक मिलने की बड़ी चुनौती सामने आ रही है। ओटीटी के सूत्रों के मुताबिक इसका आखिरी एपिसोड शूट हो चुका है और उसके बाद ही शो के सेट को हटाना शुरू कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि इस शो के लिए कपिल शर्मा को करीब पांच करोड़ रुपये प्रति शो के हिसाब से भुगतान किया गया है, जबकि शो में जिस अभिनेता सुनी ग्रोवर की सबसे ज्यादा तारीफ हुई, उन्हें सिर्फ 25 लाख रुपये प्रति एपिसोड मिले हैं। शो को लेकर नेटफ्लिक्स ने किस कदर पैसे बांटे हैं, इसका अंदाजा लगाने के लिए सिर्फ इतना जानना काफी है कि सिर्फ सोफे पर बैठकर हंसने के लिए अर्चना पूरण सिंह को 10 लाख रुपये प्रति एपिसोड दिए जाने के खुलासे ने नेटफ्लिक्स में हंगामा कर दिया है। नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज टीम ने अपनी बॉस बेला बजरिया के हफ्ते भर पहले भारत आने पर कपिल शर्मा शो की टीम से उनकी खासतौर से मुलाकात कराई थी। लेकिन, बताते हैं कि बेला बजरिया ने ही शो के भारी भरकम बजट के बावजूद दर्शकों में शो को लेकर सकारात्मक माहौल न होने के चलते इसे बंद करने का फैसला भारत से जाते जाते सुना दिया था। बेला बजरिया के आने से तब नेटफ्लिक्स के मुंबई दफ्तर में काफी जोशीला माहौल देखा गया था रहा। ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के कलाकारों में शो के होस्ट कपिल शर्मा के साथ साथ उनके साथी कलाकारों सुनील ग्रोवर, अर्चना पूरण सिंह और राजीव ठाकुर को भी बेला से मिलने का मौका मिला। इस दौरान भारत में नेटफ्लिक्स की वाइस प्रेसीडेंट (कंटेंट) मोनिका शेरगिल और सीरीज हेड तान्या बामी भी इस जश्न में शामिल रहीं।

क्या होता है Inheritance Tax, राजनीति में क्यों है चर्चा?

Inheritance Tax
Inheritance Tax

क्या होता है Inheritance Tax, राजनीति में क्यों है चर्चा?

क्या होता है Inheritance Tax, राजनीति में क्यों है चर्चा?

देश में लंबे समय से एस्टेट टैक्स की वापसी की चर्चा चल रही है। सरकार इसे उत्तराधिकार कर यानी कि इनहेरिटेंस टैक्स के नाम से लागू करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी देश में इस तरह का कर लगाने के पक्ष में है। पिछले साल कई रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया गया था कि सरकार ने उत्तराधिकार या इनहेरिटेंस टैक्स लगाने को लेकर लोगों से सुझाव और उनकी प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। हालांकि, इससे आम आदमी पर कोई असर नहीं होगा। 

क्या है इनहेरिटेंस टैक्स

इनहेरिटेंस टैक्स को पहले एस्टेट ड्यूटी कहा जाता था। इसमें पुरखों से विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स लग सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि इस टैक्स की दर 5-10 प्रतिशत हो सकती है। इससे पहले देश में साल 1953 से लेकर साल 1986 तक उत्तराधिकार कर लागू था, जिसे बाद में राजीव गांधी सरकार ने खत्म कर दिया। इनहेरिटेंस टैक्स के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि अगर यह टैक्स देश में लागू हुआ तो फैमिली ट्रस्ट इसके दायरे से बाहर होंगे। यही कारण है कि उत्तराधिकार टैक्स की वापसी की सुगबुगाहट के बीच हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (एचएनआई) फैमिली ट्रस्ट बनाकर अपनी संपत्ति बचाने में लग गए।

एस्टेट ड्यूटी क्या है

भारत में साल 1935 में पहली बार संपदा शुल्क यानी कि एस्टेट ड्यूटी को लागू किया गया था। यह इंग्लैंड में लागू संपदा शुल्क पर आधारित था। इसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उसके उत्तराधिकारी को मिलने वाली मुख्य संपत्ति पर वसूला जाता था। मुख्य संपत्ति मृत व्यक्ति की वह संपत्ति होती थी जिसे उसके जीवित रहते बाजार में बेचा जा सकता हो। यह कर भारत में साल 1986 तक लागू रहा। राजीव गांधी की सरकार ने इस कर को खत्म कर दिया था। हाल ही में अपने एक संबोधन में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बार फिर इसके नए स्वरुप इनहेरिटेंस टैक्स के बारे में चर्चा की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिमी देशों में इस तरह के टैक्स से अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को काफी मात्रा में अनुदान मिलता है।

पीएम मोदी के कारण दूल्हे को जाना पड़ा जेल, चुनाव आयोग ने दर्ज कराई शिकायत

PM Modi
PM Modi

पीएम मोदी के कारण दूल्हे को जाना पड़ा जेल, चुनाव आयोग ने दर्ज कराई शिकायत

पीएम मोदी के कारण दूल्हे को जाना पड़ा जेल, चुनाव आयोग ने दर्ज कराई शिकायत

लोग अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए कई बार अलग-अलग तरह के प्रयोग करते हैं. कई लोग नाते-रिश्तेदारों और दोस्तों को बुलाने के लिए छपे वेडिंग कार्ड में कुछ ऐसी बातें लिख देते हैं, जिसकी खूब चर्चा होती है. आपने ऐसे कई शादी के कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल होते हुए भी देखा भी है. कई बार तो ऐसा लगता है कि लोग चर्चा में आने के लिए भी अपनी शादी के कार्ड में ऐसे प्रयोग करते हैं, हालांकि कर्नाटक के रहने वाले एक शख्स को ऐसी कोशिश भारी पड़ गई है. दरअसल देश के विभिन्न हिस्सों की तरह कर्नाटक में भी इन दिनों की लोकसभा चुनावों की सरगर्मियां तेज़ हैं. इस बीच इस शख्स की शादी के कार्ड ने वहां सियासी बवाल खड़ा कर दिया. यह मामला दक्षिण कन्नड़ के पुत्तूर तालुक में सामने आया है. चुनाव आचार संहिता की निगरानी करने वाले अधिकारियों ने इस दूल्हे के खिलाफ उप्पिनंगडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है. दरअसल इस दूल्हे ने अपनी शादी के कार्ड में लिखवाया था कि, ‘दंपति को आप सबसे अच्छा उपहार नरेंद्र मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री के रूप में चुनकर देंगे.’ पुलिस के मुताबिक, इसी लाइन को लेकर दूल्हे के एक रिश्तेदार ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. यह शादी 18 अप्रैल को हुई थी. दूल्हे के स्पष्टीकरण के बावजूद चुनाव आयोग ने 26 अप्रैल को उप्पिनंगडी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई. इसके अलावा, निमंत्रण छापने के लिए जिम्मेदार प्रेस मालिक भी चुनाव आयोग और पुलिस की जांच के दायरे में है.

रायबरेली से राहुल गांधी लड़ेगें चुनाव, 25 साल बाद गांधी परिवार ने छोड़ा अमेठी की सीट

Rahul Gandhi
Rahul Gandhi

रायबरेली से राहुल गांधी लड़ेगें चुनाव, 25 साल बाद गांधी परिवार ने छोड़ा अमेठी की सीट

रायबरेली से राहुल गांधी लड़ेगें चुनाव, 25 साल बाद गांधी परिवार ने छोड़ा अमेठी की सीट

राहुल गांधी अपनी पुरानी सीट अमेठी को छोड़कर आज रायबरेली से पर्चा भरेंगे। राहुल गांधी के नामांकन को ऐतिहासिक बनाने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। आज रायबरेली में कांग्रेस विशाल जनसभा करेगी। राहुल गांधी मां सोनिया गांधी, बहन प्रियंका गांधी के साथ रायबरेली के लिए रवाना हो गए हैं। राहुल गांधी रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर दोपहर 12 बजे नामांकन भरेंगे। उनके साथ मां सोनिया गांधी के अलावा, बहन प्रियंका गांधी, रॉबर्ड वाड्रा के अलावा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत तमात दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। 

आगे बात करें तो अमेठी लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट को लेकर सस्पेंस समाप्त हो गया है. कांग्रेस ने गांधी परिवार का गढ़ मानी जाने वाली अमेठी सीट से सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र प्रतिनिधि रहे किशोरी लाल शर्मा को टिकट देने का ऐलान किया है. केएल शर्मा पिछले तीन-चार दिनों से अमेठी में डेरा डाले हुए हैं और वह नामांकन की तैयारियों को लेकर बैठक पर बैठक कर रहे थे. अमेठी में कांग्रेस ने जिस केएल शर्मा को उम्मीदवार बनाया है, वो गांधी फैमिली के करीबी माने जाते हैं. गौर करने वाली बात ये है कि साल 1998 के बाद यानी 25 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेठी सीट से गांधी फैमिली का कोई शख्स चुनावी मैदान में नहीं है. आखिरी बार साल 1998 में सतीश शर्मा ने चुनाव लड़ा था, जिन्हें संजय सिंह से शिकस्त झेलनी पड़ी थी. ये वही अमेठी है जिसे एक समय पर कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था. साथ ही इसे दशकों से गांधी परिवार का गढ़ माना जाता रहा.

गांधी परिवार का पुराना गढ़ स्मृती ईरानी ने कैसे भेदा

उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में से अमेठी सीट को नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ माना जाता रहा है. हालांकि, इस सीट से पिछले चुनाव में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को बीजेपी की स्मृति ईरानी ने बड़े अंतर से हरा दिया था. लेकिन अगर अमेठी में हुए आज तक के लोकसभा चुनाव के इतिहास को देखें तो ये बात साफ हो जाती है कि यह सीट ज्यादातर समय तक कांग्रेस के ही पास रही है. अमेठी को उत्तर प्रदेश के VVIP सीटों में से एक माना जाता है. 2019 से अमेठी की यह सीट भारतीय जनता के पास है.पार्टी का गढ़ रही अमेठी सीट कांग्रेस वर्ष 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हार गई थी. सीट से निवर्तमान सांसद एवं भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने 2019 में राहुल गांधी को हराया था.

दर्शकों का इंतजार खत्म, 28 मई को रिलीज होगी पंचायत का सीज़न 3

Panchayat Season 3
Panchayat Season 3

दर्शकों का इंतजार खत्म, 28 मई को रिलीज होगी पंचायत का सीज़न 3

दर्शकों का इंतजार खत्म, 28 मई को रिलीज होगी पंचायत का सीज़न 3

पिछले कुछ दिनों से प्राइम वीडियो दर्शकों को बहुप्रतीक्षित कॉमेडी वेब सीरीज़ पंचायत सीज़न 3 की रिलीज़ डेट के बारे में बता रहा हैगुरुवार को निर्माताओं ने आखिरकार तारीख का खुलासा कर दिया। जितेंद्र कुमार, नीना गुप्ता, रघुबीर यादव, फैसल मलिक, चंदन रॉय और संविका की प्रमुख भूमिकाओं वाला यह शो 28 मई को रिलीज होने के लिए तैयार है। द वायरल फीवर द्वारा निर्मित, पंचायत एस 3 का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है और इसे लिखा है। चंदन कुमार.  पोस्टर शेयर करते हुए अमेज़न प्राइम ने लिखा, “ आपने लौकीज़ को आगे बढ़ाया, हमने आपका इनाम अनलॉक कर दिया!” इंटरनेट पर प्रशंसक टिप्पणी अनुभाग में पहुंचे और अपना उत्साह व्यक्त किया। एक प्रशंसक ने लिखा, “आखिरकार S3 की रिलीज़ डेट आ गई… एक सपने जैसा लगता है।” एक अन्य ने लिखा, “आखिरकार इंतजार खत्म हुआ।” प्राइम वीडियो ने क्लासिक फुलेरा शैली में पंचायत एस3 की लॉन्च तिथि का खुलासा करके प्रशंसकों को उत्साहित किया, पर एक आकर्षक ऑनलाइन फसल उत्सव के माध्यम से, प्रशंसकों ने रिलीज की तारीख जानने के लिए वर्चुअल लॉकिस तोड़कर भाग लिया। तीन दिनों में, लगभग दस लाख प्रशंसकों ने भाग लिया और श्रृंखला के लॉन्च की तारीख का खुलासा किया।

‘पंचायत 3’ का पहला लुक 9 दिसंबर, 2023 को जारी किया गया था। इसमें जितेंद्र कुमार उर्फ ​​​​अभिषेक त्रिपाठी को उनकी प्रतिष्ठित बाइक पर दिखाया गया था। हिंडोला पर दूसरी तस्वीर में अशोक पाठक (बिनोद) शो में अपने साथियों दुर्गेश कुमार और बुल्लू कुमार के साथ प्रखर दिख रहे थे। इसे साझा करते हुए, प्राइम वीडियो ने इंस्टाग्राम पर उल्लेख किया, “हम जानते हैं कि इंतजार असहनीय है, इसलिए हम आपके लिए सेट से कुछ लाए हैं! #पंचायतऑनप्राइम सीजन 3।”

The World Of Dark Web:  इंटरनेट की दुनिया में छुपा हुआ एक कोना जहां दफ्न है कई राज़

Dark Web
Dark Web

The World Of Dark Web:  इंटरनेट की दुनिया में छुपा हुआ एक कोना जहां दफ्न है कई राज़

इंटरनेट के विशाल विस्तार में एक छिपा हुआ क्षेत्र है जिसे डार्क वेब के रूप में जाना जाता है – साइबरस्पेस का एक रहस्यमय और अक्सर गलत समझा जाने वाला कोना जहां गुमनामी का राज है और अवैध गतिविधियां पनपती हैं। जबकि सरफेस वेब, आम जनता के लिए सुलभ है, इसमें खोज इंजन द्वारा अनुक्रमित वेबसाइटें शामिल हैं, डार्क वेब एन्क्रिप्टेड नेटवर्क पर काम करता है और इसे एक्सेस करने के लिए विशेष सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता होती है। लेकिन वास्तव में डार्क वेब क्या है, और यह आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए क्या खतरे उत्पन्न करता है?

डार्क वेब को समझना: डार्क वेब डीप वेब का एक हिस्सा है, जो मानक खोज इंजनों द्वारा अनुक्रमित नहीं की गई वेब सामग्री को संदर्भित करता है। सतह वेब के विपरीत, जो इंटरनेट के एक छोटे से हिस्से के लिए जिम्मेदार है, डीप वेब में निजी डेटाबेस, अकादमिक अभिलेखागार और पासवर्ड-संरक्षित वेबसाइटों सहित अनइंडेक्स्ड सामग्री का एक विशाल भंडार शामिल है। डीप वेब के भीतर डार्क वेब है, जो गुमनामी की विशेषता वाला एक उपसमूह है और अवैध वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक संपन्न बाज़ार है। डार्क वेब तक पहुंच को टोर (द ओनियन राउटर) जैसे सॉफ्टवेयर द्वारा सुगम बनाया गया है, जो एन्क्रिप्टेड नोड्स की एक श्रृंखला के माध्यम से उपयोगकर्ताओं के इंटरनेट ट्रैफ़िक को अज्ञात करता है। यह गुमनामी डार्क वेब को आपराधिक गतिविधियों के लिए एक आकर्षक ठिकाना बनाती है, जिसमें ड्रग्स, हथियार, चोरी किए गए डेटा की बिक्री और हैकिंग और साइबर क्राइम फॉर हायर जैसी अवैध सेवाएं शामिल हैं।

जनता के लिए जोखिम: डार्क वेब आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है, जिसमें अवैध सामग्री और दुर्भावनापूर्ण अभिनेताओं के संपर्क से लेकर संभावित कानूनी नतीजे तक शामिल हैं। सबसे गंभीर खतरों में से एक वह आसानी है जिसके साथ व्यक्ति ड्रग्स, नकली दस्तावेज़ और मैलवेयर सहित अवैध वस्तुओं और सेवाओं तक पहुंच सकते हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं। इसके अलावा, डार्क वेब द्वारा प्रदान की गई गुमनामी इसे साइबर अपराध के लिए प्रजनन स्थल बनाती है, जहां हैकर्स, धोखेबाज और पहचान चोर बेखौफ होकर काम करते हैं। फ़िशिंग घोटाले, रैंसमवेयर हमले, और डार्क वेब फ़ोरम और मार्केटप्लेस के माध्यम से किए गए डेटा उल्लंघनों के व्यक्तियों और संगठनों के लिए समान रूप से विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। आपराधिक गतिविधियों से उत्पन्न प्रत्यक्ष खतरों के अलावा, डार्क वेब डेटा उल्लंघनों और लीक के माध्यम से प्राप्त संवेदनशील जानकारी के भंडार के रूप में भी कार्य करता है। लॉगिन क्रेडेंशियल, वित्तीय जानकारी और व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी (पीआईआई) सहित व्यक्तिगत डेटा को डार्क वेब मार्केटप्लेस पर खरीदा और बेचा जाता है, जिससे व्यक्तियों को पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा होता है।

जोखिमों को कम करना: जबकि डार्क वेब ऑनलाइन सुरक्षा और सुरक्षा के मामले में कठिन चुनौतियां पेश करता है, ऐसे कदम हैं जो व्यक्ति जोखिमों को कम करने के लिए उठा सकते हैं। अच्छी साइबर स्वच्छता का अभ्यास करना, जैसे कि मजबूत, अद्वितीय पासवर्ड का उपयोग करना, दो-कारक प्रमाणीकरण सक्षम करना और लिंक पर क्लिक करते समय या फ़ाइलों को डाउनलोड करते समय सावधानी बरतना, डार्क वेब से संबंधित खतरों का शिकार होने की संभावना को कम करने में मदद कर सकता है।इसके अतिरिक्त, कानून प्रवर्तन एजेंसियां और साइबर सुरक्षा पेशेवर सक्रिय रूप से डार्क वेब गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं और अवैध अभिनेताओं के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई कर रहे हैं। साइबर अपराध से निपटने और डार्क वेब संचालन को बाधित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, निजी क्षेत्र की संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक हैं।

अंत में, डार्क वेब इंटरनेट के एक अस्पष्ट ढांचे का प्रतिनिधित्व करता है, जो अवैध गतिविधियों और छिपे खतरों से भरा हुआ है। हालांकि इसका अस्तित्व अस्थिर हो सकता है, डार्क वेब की प्रकृति को समझना और ऑनलाइन सुरक्षा की सुरक्षा के लिए सक्रिय उपाय करना इसके खतरों से खुद को बचाने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। सतर्क और सूचित रहकर, व्यक्ति उभरते साइबर खतरों के सामने अधिक लचीलेपन और आत्मविश्वास के साथ डिजिटल परिदृश्य को नेविगेट कर सकते हैं।

कोविशील्ड वैक्सिन की सच्चाई कंपनी ने सरकार को थी बताई, फिर सरकार ने देश से क्यों छुपाई

Covishield vaccine
Covishield vaccine

कोविशील्ड वैक्सिन की सच्चाई कंपनी ने सरकार को थी बताई, फिर सरकार ने देश से क्यों छुपाई

कोविशील्ड वैक्सिन की सच्चाई कंपनी ने सरकार को थी बताई, फिर सरकार ने देश से क्यों छुपाई

आज हम खबर दिखाने या बताने नहीं आए हैं बल्कि सवाल पुछने आए हैं। आप से, सरकार से, हमारे मेडिकल स्टाफ से। खैर सवाल पूछने से पहले आपको बता दें कि AstraZeneca के साइड इफेक्ट्स का मुद्दा चर्चा में है। इसी बीच खबर है कि अब एक परिवार ने अपनी बेटी की मौत को लेकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया यानी SII के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया है। कहा जा रहा है कि कोविशील्ड का पहला डोज लेने के कुछ दिनों बाद ही महिला की मौत हो गई थी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में जब कोविड आया, तब 18 की रितैका श्री ओमत्री ने मई में कोविशील्ड का पहला डोज लिया था। हालांकि, सात दिनों के अंदर उन्हें तेज बुखार आया और चलने में दिक्कत होने लगी थी। रिपोर्ट के अनुसार, MRI स्कैन में दिखाया गया था कि उनके दिमाग में खून के कई थक्के और हैमरेज है। दो सप्ताह के अंदर महिला की मौत हो गई थी। महिला के पैरेंट्स को मौत की असली वजह की जानकारी नहीं थी और उन्होंने इस संबंध में RTI दाखिल की। दिसंबर 2021 में दाखिल आरटीआई से उन्हें पता चला कि महिला ‘थ्रोम्बोसाइटोपीनिया सिंड्रोम के साथ थ्रोम्बोसिस’ से जूझ रही थीं और उनकी मौत ‘वैक्सीन प्रोडक्ट से जुड़े रिएक्शन की वजह से हुई थी।’ जब हमने डॉ यशोमीत मिश्रा से बात की तो उन्होंने बताया कि हाल ही में एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया है कि उनकी वैक्सीन से रेयर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जो एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाई है। जिसका एक्यूरेसी रेट 90% है। एस्ट्राज़ेनेका ने कोर्ट में माना है कि ‘May lead to rare side effect’ इसका मतलब है ‘शायद कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं’

आगे उन्होंने कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के अनुसर, वैक्सीन की दूसरी खुराक उन मरीज़ों को नहीं दी जानी थी,  जिन्हें गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं थीं, दूसरा प्रमुख रक्त का थक्का जमना के मामले थे, साथ ही हाई साइट पीआर उनमे भी contraindicated थी जिनमें प्लेटलेट्स कम (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) थे . लेकिन सवाल उठता है कि जब साइट पर पूरी जानकारी उपलब्ध थी तो टीकाकरण अभियान में इसका ध्यान क्यों नहीं रखा गया? कंपनी का तो पता नहीं, पर क्या सरकार ने लोगो को ये जानकारी दी थी? अगर जानकारी दी थी तो क्या मेडिकल स्टाफ ने वैक्सीन लगवाते हुए मरीज से पूछा था? अगर मेडिकल स्टाफ ने पूछा था तो लोगो ने ये टीकाकरण लगवाया क्यों?

OTT रिव्यू ‘हीरामंडी’: OTT पर धमाल मचा रही है संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’, दर्शक गाने से हैं नाखुश

Heeramandi
Heeramandi

OTT पर धमाल मचा रही है संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’, दर्शक गाने से हैं नाखुश

OTT पर धमाल मचा रही है संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’, दर्शक गाने से हैं नाखुश

संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित श्रृंखला “हीरामंडी” ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर अपनी शुरुआत की है, और ट्विटर पर शुरुआती प्रतिक्रियाओं से संकेत मिलता है कि दर्शक प्रशंसित फिल्म निर्माता द्वारा बनाई गई भव्य दुनिया से पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हैं। भव्य सेट, सम्मोहक कहानी कहने और शानदार प्रदर्शन के साथ, “हीरामंडी” ने दर्शकों पर एक अमिट छाप छोड़ी है, जिन्होंने अपने विचार और राय साझा करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। ट्विटर पर “हीरामंडी” की प्रशंसा की बाढ़ आ गई है और उपयोगकर्ता भंसाली की विशिष्ट शैली और बारीकियों पर ध्यान देने की प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों ने इसकी गहन सिनेमैटोग्राफी, लुभावने दृश्यों और जटिल अवधि सेटिंग के लिए श्रृंखला की सराहना की है, जो दर्शकों को स्वतंत्रता-पूर्व भारत की जीवंत और उथल-पुथल भरी दुनिया में ले जाती है। “हीरामंडी” के कलाकारों को भी व्यापक प्रशंसा मिली है, जिसमें अभिनेताओं ने असाधारण प्रदर्शन किया है जो उनके पात्रों में जान फूंक देता है। रहस्यमय तवायफ़ से लेकर दुर्जेय राजनीतिक हस्तियों तक, प्रत्येक भूमिका को गहराई और बारीकियों के साथ चित्रित किया गया है, जिससे दर्शकों और आलोचकों से समान रूप से प्रशंसा अर्जित की जा रही है।

अपने दृश्य और कथात्मक आकर्षण से परे, “हीरामंडी” ने शक्ति, प्रेम और महत्वाकांक्षा जैसे विषयों की खोज के लिए दर्शकों को आकर्षित किया है। भंसाली की कहानी कहने की क्षमता श्रृंखला की कई कथानक और चरित्र चापों को एक साथ बुनने की क्षमता में चमकती है, जो दर्शकों को बांधे रखती है और सामने आने वाले नाटक में निवेश करती है। जबकि श्रृंखला ने व्यापक प्रशंसा प्राप्त की है, कुछ दर्शकों ने ऐतिहासिक सटीकता या कुछ पात्रों के चित्रण के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए विवाद या आलोचना के क्षणों को भी इंगित किया है। फिर भी, ट्विटर पर जबरदस्त भावना, भंसाली की नवीनतम पेशकश के लिए प्रशंसा और प्रशंसा में से एक है।

जैसा कि “हीरामंडी” दुनिया में धूम मचा रहा है, ट्विटर जगत चर्चाओं, प्रशंसक सिद्धांतों और सिफारिशों से भरा हुआ है। चाहे वह मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्य हों, मनोरंजक डायलॉग हो, या असाधारण प्रदर्शन हो, एक बात स्पष्ट हो गई है: “हीरामंडी” ने दर्शकों पर एक अमिट छाप छोड़ी है, जिसने भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में एक मास्टर कहानीकार के रूप में संजय लीला भंसाली एक बार फिर राजा बन गए हैं।