दूसरे चरण की किन-किन सीटों पर कल होगा मतदान, कौन था 2019 की सीटों का बादशाह
दुनिया के सबसे बड़े चुनाव के दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 13 राज्यों की 88 सीटों पर मतदान होगा। भारत के विशाल संसदीय चुनावों का रथ सात चरणों में से दूसरे चरण में 26 अप्रैल को शुरू हो रहा है, जिसमें सभी की निगाहें दक्षिणी राज्यों केरल और कर्नाटक पर हैं।
आपको बता दें कि 13 राज्यों की 88 सीटों पर कल वोटिंग होगा, अगर 2019 चुनाव की बात करें तो BJP 50, कांग्रेस 21 सीट जीती थीं और NDA के सहयोगी दलों ने 8 सीटें जीती थीं। दूसरे चरण में 1,198 उम्मीदवार मैदान में जिसमें से 1,097 पुरुष और 100 महिला, और एक प्रत्याशी थर्ड जेंडर है। ADR ने बताया कि 1198 में से 21% यानी 250 उम्मीदवार पर क्रिमिनल केस से जुड़े हैं। 1198 में से 390 यानी 33% उम्मीदवार करोड़पति है, 6 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है और तीन उम्मीदवारों के पास 500 से 1,000 रुपए की संपत्ति है। दूसरे दौर के दावेदारों में भारत के कई दिग्गज नेता शामिल है। जिसमें से स्पीकर ओम बिरला, तिरुअनंतपुरम से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर, कर्नाटक से भाजपा के तेजस्वी सूर्या, उत्तर प्रदेश से हेमा मालिनी और अरुण गोविल, वायनाड से कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तिरुअनंतपुरम से शशि थरूर, कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पूर्व सीएम भूपेश बघेल के भाग्य का फैसले के लिए कल वोट डाले जाएंगे।
पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास होटल में लगी भीषण आग, 6 की मौत, 18 घायल
पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास होटल में भीषण आग लग गई जिसमें 6 लोगों की मौत की खबर है जबकि 18 लोग अस्पताल में घायल हैं., जहां एक विनाशकारी आग ने कई लोगों की जान ले ली है और कई अन्य घायल हो गए हैं घटनाओं के एक भयावह मोड़ में, व्यस्त पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में भीषण आग लग गई। सुबह करीब साढ़े 10 बजे आग की सूचना सामने आयी और लगभग आधे घंटे के अंदर पूरी बिल्डिंग आग और धुएं से भर गई। होटल के बगल वाली बिल्डिंग में भी आग पहुंच गई और दोनों बिल्डिंग से सिर्फ आग और धुआं ही दिखा।पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजीव मिश्रा के अनुसार, भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित उक्त बहुमंजिला इमारत से अग्निशमन कर्मियों ने 20 से अधिक लोगों को निकाला है, घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है, उनकी पहचान की जा रही है.घटनास्थल पर अग्निशमन दस्ते का नेतृत्व कर रहे उपमहानिरीक्षक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है.गर्मियों के आते ही कई जगह आग लगने की खबरें सुनने को मिल चुकी है.आज दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में स्थित जामिया नगर की एक व्यावसायिक इमारत में आग लग गई.दिल्ली अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है. अधिकारी ने कहा, ”जामिया नगर इलाके में दोपहर एक बजकर 25 मिनट पर प्लास्टिक के कुछ पाइप में आग लगने की सूचना मिली थी. इसके बाद दमकल विभाग की चार गाड़ियों को आग पर काबू पाने के लिए भेजा गया.”उन्होंने कहा कि अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका.
रसोई गैस से लगी आग
स्थानीय लोगों का कहना है कि किचन में लगी आग ने चार मंजिला इमारत को अपनी जद में ले लिया। ऊपर के फ्लोर पर नाश्ता कर रहे लोग इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के होटल और दुकानों के लोग बाहर निकलकर सड़क पर आ गए। फायर ब्रिगेड की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को बाहर निकालने में जुटी हुई है।
अखिलेश यादव ने कन्नोज से दाखिल किया नामांकन, चाचा शिवपाल सिंह ने कह दी बड़ी बात
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव 2024 लड़ेंगे या नहीं, इस अटकल पर विराम लग गया है. आज उन्होंने कन्नौज से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव नामांकन दाखिल करते समय अखिलेश के साथ थे. आपको बता दें कि अखिलेश यादव 2014 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था. वहीं अपनी दूसरी पारंपरिक सीट आजमगढ़ से भी अपने भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा है।
2000 से 2012 तक का सफर
अखिलेश यादव 2000-2012 तक लोकसभा सांसद रहे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2012 में कन्नौज संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया.2017 में उनकी पार्टी यूपी में सरकार नहीं बना पाई और उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया. वह 2019 में लोकसभा सांसद चुने गए और 2022 में यूपी विधानसभा के लिए चुने गए. यूपी विधानसभा चुनावों के बाद, यादव ने लोकसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी राज्य विधानसभा सीट बरकरार रखी. वहीं कन्नौज सीट पर लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 13 मई को मतदान होगा.
भारी बहुमत से जीतेंगे अखिलेश यादव- शिवपाल यादव
इससे पहले आज, शिवपाल सिंह यादव ने कन्नौज सीट से अखिलेश की जीत पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा, “वह (अखिलेश) भारी बहुमत से जीतेंगे. पहले, अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने वह सीट (कन्नौज) जीती थी। और इस बार फिर, अखिलेश यादव जीतेंगे. डिंपल मैनपुरी से जीतेगी. हर कोई जानता है कि नेता जी (मुलायम सिंह यादव) ) यहां से लड़ते थे और जीतते थे
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के पिता बठिंडा लोकसभा सीट से लड़ सकते है चुनाव
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला को कौन नहीं जानता… अपने गाने से लोगें का दिल छु लेने वाले सिगंर का 29 मई 2022 की सरेआम हत्या कर दी गई थी. उनकी गाड़ी को घेरकर शूटर्स ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। अब राजनीति के गलियारों में खबर है कि सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह राजनीति में उतर सकते हैं। उनकी बठिंडा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा है। कहा जा रहा है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। वह शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। आपको बता दें कि बठिंडा में एक जून को मतदान होना है। बलकौर सिंह चुनाव लड़ते हैं तो राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। हालांकि इस बारे में कुछ भी आधिकारिक नहीं है। जब हमनेपंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से संपर्क किया तो उनका कहना है कि, ‘सिद्धू मूसेवाला का परिवार हमारा अपना परिवार है। शुरुआत में, बल्कौर सिंह से संपर्क किया गया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। मुझे नहीं पता कि उन्होने अब अपना मन बदल लिया है या नहीं।’ लेकिन इससे पहले, रविवार को अपने घर पर सिद्धू मूसेवाला के प्रशंसकों को बलकौर सिंह ने संबोधित किया था। और अपने साप्ताहिक संबोधन के दौरान बल्कौर सिंह ने राजनीति में शामिल होने का संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है तो वह राजनीति में कूदने के खिलाफ नहीं हैं। आपको बता दें कि वह मई 2023 में उपचुनाव में आप सरकार के खिलाफ प्रचार करने के लिए जालंधर भी गए थे। उन्होंने कांग्रेस पर अपने बेटे की हत्या में उन्हें न्याय से वंचित करने का आरोप लगाया था। वह अपनी पत्नी चरण कौर के साथ चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय में विरोध प्रदर्शन पर भी बैठे थे। सिद्धू मूसेवाला ने फरवरी 2022 का विधानसभा चुनाव मनसा से लड़ा था और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार विजय सिंगला से हार गए थे। 29 मई, 2022 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
सपा में एक बार फिर चाचा भतीजा का हुआ खेल, अखिलेश यादव कन्नौज सीट से लड़ेंगे चुनाव
लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की कन्नौज सीट से चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश ने पहले चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना मन बदल दिया। समाजवादी पार्टी ने कन्नौज सीट पर तेज प्रताप यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन 48 घंटे के अंदर उनका टिकट कट गया और अब अखिलेश यहां से चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश के इस फैसले को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं अखिलेश ने अपने भतीजे और लालू प्रसाद यादव के दामाद तेज प्रताप का टिकट क्यों काटा है। समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में पहले भी कई सीटों पर उम्मीदवार बदले हैं और अब तो बात परिवार तक पहुंच गई। अखिलेश ने अपने भतीजे का ही टिकट काट दिया। उनके इस फैसले के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कन्नौज में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का दबाव था। तेज प्रताप उतना अच्छा चुनाव नहीं लड़ पाते। अखिलेश के आने से मुकाबला कड़ा होगा और बीजेपी के लिए यहां से दोबारा जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। इसी वजह से 22 अप्रैल को तेज प्रताप को उम्मीदवार बनाया गया और 24 अप्रैल को अखिलेश ने खुद नामांकन करने का ऐलान कर दिया। इस लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आठ सीटों पर उम्मीदवार बदले हैं। बदायूं में तो तीन बार में प्रत्याशी तय हुआ। यहां पहले धर्मेंद्र यादव फिर शिवपाल यादव और अंत में आदित्य यादव को टिकट मिला। मुरादाबाद में एसटी हसन और रुचि वीरा का नाम चलता रहा। नामांकन वाले दिन रुचि का नाम तय हुआ। मेरठ में अतुल प्रधान ने नामांकन के बाद नाम वापस लिया और सुनीता वर्मा ने पर्चा भरा। गौतमबुद्ध नगर, बागपत, संभल, बिजनौर और मिश्रिख में भी समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बदले हैं। ऐसे में कन्नौज में भी उम्मीदवार बदलना कुछ नया नहीं है। शायद अखिलेश उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर पहले जनता और कार्यकर्ताओं का मन भांप रहे हैं। इसके बाद ही अंतिम फैसला ले रहे हैं। इसी वजह से कई सीटों पर उन्होंने उम्मीदवार बदले हैं।
नकली एयरबैग सप्लायर का पर्दाफाश, इनोवेशन की आड़ में लोगों की जान से खिलवाड़
नकली एयरबैग मामले को पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए नामी ब्रैंड की गाड़ियां बनाने वाली 16 ऑटोमोबाइल कंपनियों को मेल भेजा है। सभी बरामद एयरबैग की क्वॉलिटी की जांच करवाई जाएगी। डीसीपी (सेंट्रल) एम. हर्षवर्धन ने बताया कि एयरबैग मामले की तफ्तीश कई एंगल से चल रही है। आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करने के मद्देनजर मजबूत केस बनाने पर काम चल रहा है। ऑटोमोबाइल कंपनियों से मेल का जवाब आने पर कॉपी राइट एक्ट भी लगाया जा सकता है, क्योंकि ये इन कंपनियों से ऑथराइज्ड नहीं थे।
कहां हो रहे थे तैयार
माता सुंदरी रोड स्थित गुरुद्वारा के करीब झुग्गी नंबर-24 और झुग्गी नंबर-248 में बन रहे थे नामी कंपनियों के गाड़ियों के नकली एयरबैग। सेंट्रल जिला पुलिस ने 16 अप्रैल को छापेमारी कर नामी ऑटोमोबाइल कंपनियों के 16 ब्रैंडेड गाड़ियों के 921 नकली एयरबैग और रॉ मटीरियल रिकवर किया। इनकी कीमत एक करोड़ 84 लाख 20 हजार रुपये आंकी गई है। एयरबैग के 287 मोटर और 109 रॉ मटीरियल की चीजें बरामद कीं। आपको बता दें कि आरोपी पहले खुद पुरानी गाड़ियों के स्क्रैप का काम करते थे। यहीं से इन्हें नकली एयरबैग बनाने का आइडिया आया। यू-ट्यूब से तरीका सीखा, जिसके बाद बनाने लगे। आरोपी तीन साल से इस काम को अवैध तरीके से कर रहे थे। एक्सिडेंटल गाड़ियों के एयरबैग के मोटर और लोगो खरीदते थे। इनके अब तक 2000 से ज्यादा नकली एयरबैग मार्केट में बेचने की आशंका है। पुलिस अफसरों ने बताया कि उन्होंने पता लगाया कि मार्केट में एक नामी कंपनी की गाड़ी के एयरबैग की कीमत डेढ़ लाख रुपये थी, लेकिन उसी कंपनी का लोगो लगा नकली एयरबैग 30 से 50 हजार रुपये में बेच रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम-वीवीपीएटी के 100% सत्यापन पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब, कहा ईसी के जवाबों में है कन्फ्यूजन
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में दर्ज वोटों का वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) पर्चियों से पूरी तरह वेरीफाई (सत्यापन) की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. शीर्ष आदलत ने कहा ईवीएम पर अक्सर पूछे गए सवालों में दिए गए उसके जवाब में कुछ कन्फ्यूजन है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, “उसे कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है क्योंकि ईवीएम पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों में चुनाव आयोग द्वारा दिए गए उत्तरों में कुछ कन्फ्यूजन है.”
विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समाज समूहों ने चुनाव परिणामों की अखंडता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए वीवीपैट पर्चियों के 100% सत्यापन के सवालों का जवाब मांगा है। उनका तर्क है कि इस तरह के उपाय से चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ेगा और संभावित छेड़छाड़ या दुर्भावना पर चिंताएं कम होंगी।
चुनाव आयोग के जवाबों में 100% सत्यापन के संबंध में प्रश्नों पर चुनाव आयोग के जवाब भ्रम और संदेह के साथ मिले हैं। चुनाव आयोग के रुख में स्पष्टता की कमी ने अटकलों को बढ़ावा दिया है और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक निश्चित स्पष्टीकरण की मांग की है।
EVM VVPAT
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्रवाई:
100% सत्यापन की मांग को संबोधित करने में स्पष्टता और सुसंगतता की आवश्यकता को पहचानते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को हितधारकों द्वारा उठाए गए प्रासंगिक सवालों के स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर बल देते हुए चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित किया है।
जैसे-जैसे ईवीएम-वीवीपीएटी पर्चियों के 100% सत्यापन पर बहस तेज होती जा रही है, सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप चुनाव सुधार की चल रही खोज में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में कार्य करता जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा अधर में लटके होने के कारण स्पष्ट उत्तर देने और लोकतंत्र के सिद्धांतों को कायम रखने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी थी मशीन की विस्तार से जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को हुई सुनवाई में चुनाव आयोग से निष्पक्ष और साफ-सुथरे चुनाव के लिए विस्तार से जानकारी मांगी थी. जस्टिस खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने चुनाव की पवित्रता बनाए रखने को कहा था. इस दौरान सुनवाई में पीठ ने कहा था कि, “यह एक चुनावी प्रक्रिया है. इसमें पवित्रता होनी चाहिए. किसी को भी शक न हो कि वो जो उम्मीद कर रहे हैं, वह नहीं हो रहा है.” जज ने चुनाव आयोग से पूछा था कि आपके पास कितने वीवीपीएटी हैं? इस पर आयोग के अधिकारी ने 17 लाख वीवीपैट होने की बात कही थी, जिस पर जज ने सवाल किया कि आपके पास ईवीएम और वीवीपैट की संख्या अलग क्यों है? इस पर अधिकारी ने समझाने की कोशिश की लेकिन जज को लगा कि यह मुद्दे से भटकने वाली बात है, लिहाजा अधिकारी को जवाब देने से रोक दिया गया. कोर्ट ने और गहराई में जाते हुए सवाल किया कि उसके आंकड़ों को लेकर इन्हें हैंडल करने वाले लोगों के पास क्या जानकारी होती है. इस पर अधिकारी ने कहा कि इन आंकड़ों को जान पाना या उसमें रिगिंग कर पाना किसी भी तरह संभव नहीं है. मॉक पोल में प्रत्याशी अपनी पसंद के मुताबिक किसी भी मशीन की जांच कर सकता है.
हाई कोर्ट ने फैसले में की देरी तो हेमंत सोरेन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, हेमंत सोरेन से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवीनतम घटनाक्रम सामने आया है। एक महत्वपूर्ण कानूनी पैंतरेबाज़ी में, हेमंत सोरेन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जो उच्च न्यायालय में देरी के कारण खराब हो गया है। यह मामला, जो वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर केंद्रित है, सोरेन को बढ़ती कानूनी जांच का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें कि आरोपों की गंभीरता के बावजूद, उच्च न्यायालय निर्णय देने में झिझक रहा है, जिससे कानूनी कार्यवाही लंबी हो गई है और मामले को अधर में लटका दिया गया है। हाई कोर्ट में हो रहे देरी की वजह से की निराश होकर, हेमंत सोरेन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में, हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का जोरदार खंडन किया है, अपनी बेगुनाही का दावा किया है और कानूनी कार्यवाही के निष्पक्ष समाधान की मांग की है।
क्यों देरी कर रही है हाई कोर्ट
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फैसला देने में उच्च न्यायालय की अनिच्छा ने सवाल खड़े कर दिए हैं और कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के अधिवक्ताओं ने इसकी आलोचना की है। लंबी देरी ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में अटकलों को बढ़ावा दिया है और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
जैसे-जैसे हेमंत सोरेन दोषमुक्ति की अपनी लड़ाई देश की सर्वोच्च अदालत में ले जा रहे हैं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले का भूत उनके राजनीतिक करियर पर मंडराता रहता है। सर्वोच्च न्यायालय अब इस मामले पर विचार करने के लिए तैयार है, सभी की निगाहें न्यायपालिका पर फैसला सुनाने पर टिकी हैं जो सुनिश्चित करती है कि न्याय मिले।
टीएमसी विधायक पर मतदाताओं को धमकाने का आरोप, चुनाव आयोग ने जारी किया नोटिस
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एक बार फिर विवादों में घिर गई है क्योंकि उसके एक विधायक पर मतदाताओं को डराने-धमकाने और विपक्षी कार्यकर्ताओं को धमकाने के गंभीर आरोप लग गए हैं। आपको बता दें कि एक हालिया घटनाक्रम में, टीएमसी विधायक पर मतदाताओं को प्रभावित करने और उत्तर दिनाजपुर में विपक्षी गतिविधियों को दबाने के लिए जबरदस्त रणनीति अपनाने का आरोप लगाया गया है। आगामी चुनावों से पहले मतदाताओं और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर डराने-धमकाने की खबरें सामने आई हैं। अभियान रैलियों के दौरान कैद किए गए प्रत्यक्षदर्शी लोग और वीडियो फुटेज में रहमान से असहमत माने जाने वाले लोगों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग और धमकियां जारी करते हुए दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त, कई विपक्षी नेता और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से जुड़े व्यक्तियों द्वारा उत्पीड़न और धमकी के आरोपों के साथ आगे आए हैं।
चुनाव आयोग ने की कार्रवाई
चिंताजनक आरोपों के जवाब में, भारत का चुनाव आयोग टीएमसी विधायक को एक औपचारिक नोटिस (कारण बताओ) जारी किया गया है, जिसमें मतदाताओं को डराने-धमकाने और विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ धमकियों की कथित घटनाओं के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गई है। ईसीआई ने आरोपों की गंभीरता को रेखांकित किया है और चुनावी नैतिकता और निष्पक्ष प्रचार प्रथाओं के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है। विपक्षी दलों ने टीएमसी विधायक के निंदनीय व्यवहार की निंदा की है, और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया है। इस बीच, टीएमसी नेतृत्व ने चुनाव आयोग द्वारा आगे की जांच होने तक मामले पर टिप्पणी करने से परहेज किया है। चूंकि चुनाव आयोग विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों की जांच कर रहा है, इसलिए स्पॉटलाइट विधायक रहमान और टीएमसी पर टिकी हुई है। चुनावों के नजदीक होने के साथ, दबाव और धमकी से रहित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की आवश्यकता कभी इतनी अधिक नहीं रही।
ग्रेटर नोएडा में क्यों लगाए गए मेथ के लैब, 350 करोड़ की MDMA जब्त
पिछले साल (2023) भी 16 मई और 30 मई को ग्रेटर नोएडा में दो संबंधित छापे पड़े, पुलिस ने 75 किलोग्राम से अधिक एमडीएमए जब्त किया, जिसे एक्स्टसी या मौली भी कहा जाता है, और आवासीय संपत्तियों से लगभग एक दर्जन विदेशियों को गिरफ्तार किया, जहां पूरी तरह से मेथ के उत्पादन के लिए लैब लगाई गईं थी। पुलिस के अनुसार, इन दोनों घटनाओं में पकाए गए मेथ की कुल कीमत 350 करोड़ रुपये से अधिक थी। पुलिस को संदेह है कि ये बरामदगी केवल एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के “हिमशैल के टिप” का प्रतिनिधित्व कर सकती है। लेकिन ये लैब ग्रेटर नोएडा को क्यों लगाए जा रहे है, इसका एक उद्देश्य है। क्योंकि दिल्ली और आगरा के बीच स्थित ग्रेटर नोएडा की रणनीतिक स्थिति, सड़क नेटवर्क तक आसान पहुंच बना दे देती है, जिससे यह मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक अच्छी जगह बन जाता है। आगे बात करें तो पश्चिमी देशों की तुलना में, ग्रेटर नोएडा में मेथ लैब स्थापित करने और चलाने की लागत काफी कम है, जिसका श्रेय सस्ते श्रम, किफायती रियल एस्टेट और न्यूनतम नियामक निरीक्षण को जाता है। शहर की अस्थायी आबादी और विविध जनसांख्यिकी अवैध गतिविधियों में शामिल होने के दौरान पहचान से बचने की कोशिश करने वाले विदेशी नागरिकों को कवर प्रदान करती है।
अधिकारियों ने बताया ग्रेटर नोएडा क्यों बना हॉटस्पॉट
अधिकारियों का का कहना है कि, इन दोनों घटनाओं में पकाए गए मेथ की कुल कीमत 350 करोड़ रुपये से अधिक थी। पुलिस को संदेह है कि ये बरामदगी केवल एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के “हिमशैल के टिप” का प्रतिनिधित्व कर सकती है। इन सभी मामलों में, उन्होंने पाया कि सिंडिकेट के निचले स्तर पर काम करने वाले विदेशी लोग मेथ को उसके “शुद्ध रूप” में पकाते हैं। फिर इस मेथ को दिल्ली में पहुंचाया गया और बाद में किसी माध्यम से यूरोप में पहुंचाया गया जिनकी अभी जांच की जानी है। “दिल्ली में उनके संपर्कों द्वारा उन्हें उपलब्ध कराए गए कच्चे माल का उपयोग करके, ग्रेटर नोएडा में आरोपियों ने मेथ को पकाया। इसे घरों के अंदर सुखाया गया और फिर पार्सल करने से पहले छह इंच गुणा एक इंच की ठोस ईंट का रूप दिया गया। दिल्ली में उनके नेटवर्क से, जो जानने की जरूरत के आधार पर उनसे मिले,”
अधिकारी ने कहा कि कई पुलिस कर्मियों में से कम से कम तीन इस बात से सहमत थे कि ग्रेटर नोएडा, अपनी कम घनी आवासीय सुविधाओं और दिल्ली से आसान कनेक्टिविटी के कारण, दवा के निर्माण के लिए एक अच्छी जगह है। एक अधिकारी ने कहा, “तीनों मामलों में, विदेशियों द्वारा किराए पर लिए गए घर अलग-अलग स्थानों पर थे और कम से कम तीन तरफ खुला क्षेत्र था ताकि मेथ खाना पकाने के कारण निकलने वाली तीखी गंध आसपास रहने वाले लोगों का ध्यान न खींचे।” जिस चीज़ ने ग्रेटर नोएडा को गतिविधि के लिए एक सुन्दर जगह बनाया, वह थी कुछ कच्चे माल की उपलब्धता, जिसे विदेशों से प्राप्त करना मुश्किल है। अवैध मेथ लैब से बढ़ते खतरे के जवाब में, अधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा में नशीली दवाओं की तस्करी से निपटने के प्रयासों को तेज करने का वादा किया है। मेथामफेटामाइन उत्पादन के प्रसार को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही रणनीतियों में निगरानी में वृद्धि, सीमा सुरक्षा में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग शामिल है।