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90s का जैन हवाला कांड, जिसमें राजीव गांधी और आडवाणी की भी फूल गई थी सांसे

Hawala
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90s का जैन हवाला कांड, जिसमें राजीव गांधी और आडवाणी की भी फूल गई थी सांसे

90s का जैन हवाला कांड, जिसने राजीव गांधी और आडवाणी की भी फूल गई थी सांसे

आपने इलेक्टोरल बॉन्ड वाली लिस्ट देखी…. ये लिस्ट तो मोदी काल की थी जिसने इतना हड़कंप मचा दिया है… लेकिन राजीव गांधी के काल में भी एक लिस्ट निकली थी… जिसने कई नेताओं को इस्तिफा देने और जेल भेजने के कगार पर खड़ा कर दिया था… तो चलिए सुनाते हैं आपको वो स्टोरी जब एक ऐसी ही लिस्ट के कारण से दिग्गज नेता फंस गए थे… जिसमें भारतरत्न लालकृष्ण आडवाणी और राजीव गांधी शामिल है… तो के नब्बे का दशक में दिल्ली पुलिस ने 2 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया और इंट्रोगेशन (पूछताछ) में पता चला कि वो JKLF यानि (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) को पैसे ट्रांसफर करने का काम करते है…ये पैसे लंदन और दुबई से आते हैं इस लीड को फॉलो अप करते हुए सीबीआई ने हवाला ऑपरेटर्स के यहां छापेमारी शुरू कर दी… “हवाला” मतलब काले धन को एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर करने को कहा जाता है। अब ऐसा ही एक हवाला ऑपरेटर SK और JK Jain थे… दोनों के यहां भी रेड मारी गई इनके पास से कैश, फॉरेन करेंसी , सोना तो निकला ही लेकिन उसके अलावा कुछ बहुत इंटरस्टिंग निकला… और वो 2 डायरी थे। इन डायरियों में काफी हाई प्रोफाइल राजनेताओं के नाम लिखे थे जिनमें कैबिनेट मंत्री, राज्यपाल, सरकारी अधिकारी सबके नाम शामिल थे और इन सबमें सबसे ज्यादा हाइलाइट हुआ विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम… और आडवाणी ने इसी बात पर लोकसभा से इस्तिफा दे दिया … अब डायरी में हर नाम के सामने उन्हें कितने रुपए दिए गए हैं वो भी लिखा हुआ था… SK Jain ने कोर्ट में बताया कि उसने राजीव गांधी को भी करोड़ों रुपए दिए थे… लेकिन कोर्ट में मामला चल नहीं पाया और सबको बरी कर दिया गया क्योंकि कोर्ट का कहना था कि उन डायरियों को निर्णायक प्रूफ नहीं माना जा सकता है, और सीबीआई ने कोई भी साक्ष्य चार्ज शीट में नहीं डाला था। लेकिन रुकिए… कहीं आपको ये मुंगेरीलाल के हसीन सपने तो नहीं लगते न… तो चलिए आपको प्रूफ भी दे देते हैं… राजेश जोशी जो पिछले तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रिन्ट, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल माध्यमों में पत्रकारिता की है। उन्होने और वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने सबसे पहले इस खबर को अपने अफबार जनसत्ता में छापा था…उन्होने अपने बीबीसी के लेख में लिखा कि अगस्त की उस उमस भरी दोपहर में जनसत्ता अख़बार के दफ़्तर में वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने फ़ोटोकॉपी किए गए काग़ज़ों का एक पुलिंदा भूरे रंग के एक बड़े लिफ़ाफ़े से निकाल कर मेरे सामने रख दिया… जब उन्होने वो सारी फोटो देखी तो उन्हें अपनी आखों पर भरोसा नहीं हुआ… जिसके बाद उन्होने जनसत्ता अख़बार में सबसे पहले जैन हवाला कांड की ख़बर को विस्तार से उजागर किया. ख़बर एक लाइन में ये थी कि सीबीआई दो साल से उद्योगपति एसके जैन की ऐसी विस्फोटक डायरियों को दबाए बैठी है जिसमें कई वरिष्ठ सांसदों, मंत्रियों और बड़े अफ़सरों को कथित तौर पर कुल 64 करोड़ रुपए की रिश्वत दिए जाने का ब्यौरा दर्ज है. जिस तरह आज भी कई सनसनीख़ेज़ ख़बरों का उदगम डॉक्टर सुब्रह्मण्यम स्वामी बनते हैं, वैसे ही 29 साल पहले 29 जून, 1993 को दिल्ली की एक तपती दोपहर को उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी को अपने निशाने पर ले लिया. उन्होने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके ये बयान जारी किया, “मैं ये साबित कर दूँगा कि एक दलाल और हवाला कारोबारी सुरेंद्र जैन ने 1991 में लालकृष्ण आडवाणी को दो करोड़ रुपए दिए. जैन उस जाल से जुड़ा था जो विदेशी धन को यहाँ ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से रुपए में बदल कर कश्मीर के अलगाववादी संगठऩ जेकेएलएफ़ की मदद करता था.” जिसके बाद सीबीआई के डीआईजी ओपी शर्मा से इस जाँच की ज़िम्मेदारी ड्रामाई तौर छीन ली गई. फिर उनके घर पर छापा मारकर सीबीआई के अधिकारियों ने उन्हें एसके जैन के एक आदमी से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया. उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.

Hawala Scandal
Hawala Scandal

ज़ाहिर है ओपी शर्मा इस बात से काफी नाराज़ थे और इस नाराज़ अफ़सर को ये पता था कि सुरेंद्र कुमार जैन के घर से बरामद हुई विस्फोटक डायरियों में किस किस राजनीतिक हस्ती का नाम दर्ज है. विस्फोटक तैयार था। जैन डायरियाँ मिलने के बाद हवाला और कश्मीरी अलगाववादियों और नेताओं-अफ़सरों की जाँच करने की बजाए सीबीआई ने पूरे मामले को रफ़ा दफ़ा करने की कोशिश की और छापे में बरामद डायरियाँ और दूसरी चीज़ें सीबीआई के मालख़ाने में जमा करवा दी गईं.लेकिन पूरे दो साल बाद इस मामले में फिर जान डाली गई जब डॉक्टर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि हवाला कारोबारी ने लालकृष्ण आडवाणी को दो करोड़ रुपए दिए है. इस सूत्र को पकड़ कर ओपी शर्मा से संपर्क किया गया और 17 अगस्त, 1993 को जनसत्ता में डायरियों के हवाले से ख़बर दी गई. लेकिन इस बात पर अख़बार में पहले असमंजस की स्थिति थी कि डायरियों में दर्ज नेताओं के नाम छापे जाएँ या न छापे जाएँ… अगर नहीं छापे जाते तो खबर को कोई असर नहीं होता…जिसके बाद जनसत्ता में एक हफ़्ते की सोचविचार के बाद आख़िरकार 24 अगस्त, 1993 को पहले पन्ने पर इस ख़बर को छापा गया.

Why Advani wants a back seat in Parliament - India Today

कुछ ही दिन बाद वकील राम जेठमलानी ने अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की जिसमें सीबीआई के पूर्व डीआईजी ओपी शर्मा भी मौजूद थे और वहीं ऐलान किया गया कि हवाला कांड के मामले में अदालत का दरवाज़ा खटखटाया जाएगाजिसके बाद अक्टूबर 1993 में जब सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी गई तो मामले को दबाए रखने के लिए सीबीआई को कोर्ट ने कड़ी फटकार सुनाई और उद्योगपति एसके जैन की गिरफ़्तारी के आदेश दिए गए. इसके बाद मार्च 1994 को जैन को गिरफ़्तार किया गया उन्होंने सीबीआई को 29 पेज का बयान दिया जिसमें उन्होंने बताया कि किन किन लोगों को उन्होंने पैसा दिया और किन परिस्थितियों में भुगतान किया गया. आपको बता दें कि इन डायरियों में 115 नाम थे जिनमें से 92 नामों की पहचान कर ली गई थी. इनमें से 55 नेता, 23 अफ़सर और कम से कम तीन पत्रकार शामिल थे… लेकिन वो अंग्रेजी में कहावत है न कि You can lead a horse to water, but you can’t make it drink मतलब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को घोड़े की तरह खींचकर पानी के पास तो ले आई लेकिन पानी पीने पर मजबूर फिर नहीं कर पाई… तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा ने कई बार सीबीआई के अफ़सरों को लताड़ लगाई और यहाँ तक कि सरकार के दबाव से मुक्त करने के लिए सीबीआई अफ़सरों को सीधे कोर्ट के निर्देश में काम करने का हुक्म दिया. लेकिन सच तो ये है कि सीबीआई हवाला कांड की जाँच करने को तैयार ही नहीं थी… उसने पहले जैन डायरियों को दबाने की कोशिश की… लेकिन जनसत्ता अख़बार में छपने के बाद जब मामला सामने आया तो एजेंसी ने डायरियों को पहले सबूत के तौर पर पेश ही नहीं किया… और जब सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के बाद उसने जाँच शुरू भी की तो अनचाहे मन से… जिसका परिणाम यह हुआ कि सभी 115 लोग एक के बाद एक छुटते चले गए। कहते हैं न कि “जब सारे फसंते हैं, तो सारे छूट भी जाते हैं”, और यहां वही हुआ।

क्या आम ब्लड शुगर और वजन बढ़ा सकता है? जाने क्या है सच्चाई

Mango
Mango

क्या आम ब्लड शुगर और वजन बढ़ा सकता है? जाने क्या है सच्चाई

क्या आम ब्लड शुगर और वजन बढ़ा सकता है? जाने क्या है सच्चाई

आम को ‘फलों का राजा’ कहा जाता है, आम को उनके स्वादिष्ट स्वाद और जीवंत रंग के लिए पसंद किया जाता है। हालाँकि, स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव, विशेष रूप से रक्त शर्करा के स्तर और वजन बढ़ने के बारे में गलत धारणाओं ने उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। क्या आप भी आम के शौकीन हैं और अक्सर इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि इसकी मात्रा बहुत ज्यादा है, तो यह लेख आपके लिए है क्योंकि हम गर्मियों के इस लोकप्रिय फल के बारे में कुछ लोकप्रिय मिथकों को दूर करते हैं।

आम के संबंध में आम गलतफहमियों में से एक यह है कि उनमें चीनी की मात्रा अधिक होती है और रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि हो सकती है, जिससे वे मधुमेह वाले व्यक्तियों या चीनी का सेवन करने वालों के लिए अनुपयुक्त हो जाते हैं। हालांकि यह सच है कि आम में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज सहित प्राकृतिक शर्करा होती है, इसमें 51 के आसपास कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) भी होता है। कम जीआई वाले खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे पचते और शरीर में अवशोषित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप रक्त शर्करा के स्तर में धीरे-धीरे वृद्धि होती है।

न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, “आम का सेवन रक्त शर्करा नियंत्रण पर भी लाभकारी प्रभाव डाल सकता है। अधिक वजन वाले व्यक्तियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 12 सप्ताह तक आम को अपने आहार में शामिल करने से नियंत्रण समूह की तुलना में रक्त शर्करा के स्तर और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार हुआ। इन निष्कर्षों से पता चलता है कि आम रक्त शर्करा के स्तर का प्रबंधन करने वाले व्यक्तियों के लिए संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है।

करंट डेवलपमेंट्स इन न्यूट्रिशन जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, “आम खाने के बाद स्थिर रक्त ग्लूकोज और इंसुलिन के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जो आंशिक रूप से एडिपोनेक्टिन के स्तर में वृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है।”

क्या आम से बढ़ सकता है वजन?

कई लोगों का यह भी मानना है कि आम का सेवन हमें मोटा करता है और इसमें मौजूद चीनी की मात्रा के कारण यह वजन बढ़ाने में योगदान देता है। हालाँकि, जिस आम को आप खा रहे हैं उसके आकार का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है, खासकर यदि आप अपने कैलोरी सेवन को देख रहे हैं, वैसे तो आम में अन्य फलों की तुलना में कैलोरी कम होती है। एक मध्यम आकार के आम में लगभग 150 कैलोरी होती है, जो इसे एक पौष्टिक और संतोषजनक नाश्ता विकल्प बनाती है।

इसके अलावा, आम फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो तृप्ति की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं और वजन प्रबंधन में सहायक हो सकता है। फाइबर पाचन को नियंत्रित करने में मदद करता है और तृप्ति को बढ़ावा देता है, जिससे अधिक खाने की संभावना कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, आम में पाए जाने वाले विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट समग्र स्वास्थ्य और कल्याण का समर्थन करते हैं, जिससे वे संतुलित आहार के लिए एक मूल्यवान अतिरिक्त बन जाते हैं।

आम को स्वस्थ जीवनशैली में शामिल करने के तरीके

रक्त शर्करा या वजन बढ़ने की चिंता के बिना आम के स्वास्थ्य लाभों का आनंद लेने के लिए, निम्नलिखित युक्तियों पर विचार करें:

भाग नियंत्रण का अभ्यास करें: संतुलित आहार के हिस्से के रूप में सीमित मात्रा में आम का आनंद लें। अत्यधिक कैलोरी सेवन से बचने के लिए प्रत्येक बैठक में एक बार आम (लगभग एक कप कटे हुए फल) परोसने का लक्ष्य रखें।

प्रोटीन और फाइबर के साथ मिलाएं: आम में प्राकृतिक शर्करा को प्रोटीन युक्त या फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर संतुलित करें। उदाहरण के लिए, ग्रीक दही के साथ आम के स्लाइस का आनंद लें या उन्हें पत्तेदार साग और ग्रील्ड चिकन या टोफू जैसे कम वसा वाले प्रोटीन स्रोतों के साथ सलाद में जोड़ें।

पके आम चुनें: ऐसे पके आम चुनें जो सुगंधित हों और पकने पर हल्के दबाव से उपजते हों। पके आम अधिक मीठे और अधिक स्वादिष्ट होते हैं, जिससे आप अतिरिक्त चीनी की आवश्यकता के बिना अपनी मीठे की लालसा को संतुष्ट कर सकते हैं।

अतिरिक्त शर्करा से सावधान रहें: ऐसे आम उत्पादों से बचें जिनमें अतिरिक्त शर्करा होती है, जैसे आम का रस या सिरप में डिब्बाबंद आम। ये उत्पाद आपके आहार में अतिरिक्त कैलोरी और चीनी का योगदान कर सकते हैं, जिससे आपके स्वास्थ्य लक्ष्य कमजोर हो सकते हैं।

हनुमान जन्मोत्सव 2024: जानिए हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी को कैसे करें प्रसन्न 

Shree Hanuman
Shree Hanuman

हनुमान जन्मोत्सव 2024: जानिए हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी को कैसे करें प्रसन्न 

हनुमान जन्मोत्सव 2024: जानिए हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी को कैसे करें प्रसन्न

हिंदू धर्म में हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। वह श्री राम के परम भक्त हैं। सप्ताह के मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन सभी भक्त विधि विधान से उनकी पूजा करते हैं। हनुमान जी व्यक्ति के सभी दुख, दर्द हर लेते हैं। इसलिए उन्हें संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है। बता दें, भगवान हनुमान का जन्म चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि यानी रामनवमी के ठीक छह दिन बाद हुआ था। भारत भर में भक्त इस शुभ अवसर को उत्साह और भक्ति के साथ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। यहां वह सब कुछ है जो आपको हनुमान जयंती के बारे में जानने की जरूरत है, जिसमें तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त, सामग्री सूची और मंत्र शामिल हैं। 

तिथि: हनुमान जन्मोत्सव चैत्र पूर्णिमा को पड़ती है, जो चैत्र के हिंदू चंद्र महीने में पूर्णिमा का दिन है। 2024 में, हनुमान जन्मोत्सव 23 अप्रैल को मनाई जाएगी। शक्ति, भक्ति और साहस के प्रतीक भगवान हनुमान का सम्मान करने के लिए भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और विशेष प्रार्थना करते हैं।

पूजा विधि: हनुमान जन्मोत्सव की पूजा विधि में भगवान हनुमान का आशीर्वाद पाने के लिए कई अनुष्ठान और प्रसाद शामिल हैं। भक्त दिन की शुरुआत सुबह स्नान से करते हैं और भगवान हनुमान को समर्पित मंदिरों में जाते हैं। वे देवता को प्रार्थना, फूल, फल और मिठाइयाँ चढ़ाते हैं और उनके गुणों की प्रशंसा करते हुए हनुमान चालीसा और अन्य भजन पढ़ते हैं।

मुहूर्त: हनुमान जन्मोत्सव पूजा के लिए सबसे शुभ समय दोपहर के दौरान है, खासकर पूर्णिमा तिथि के दौरान। भक्तों का मानना है कि इस दौरान पूजा करने से उनकी प्रार्थनाओं की प्रभावशीलता बढ़ जाती है और भगवान हनुमान का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा के तिथि 23 अप्रैल 2024 को सुबह 3:25 बजे से शुरू होगी, और 24 अप्रैल 2024 को सुबह 5:18 बजे समाप्त होगी। इस कारण से हनुमान जन्मोत्सव का दिन 23 अप्रैल को मनाया जाएगा। आप सुबह 3:25 से लेकर 5:18 के बीच हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं। इस समयकाल में पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहेगा।

सामग्री सूची: हनुमान जन्मोत्सव पूजा के लिए आवश्यक सामग्री या वस्तुओं में फूल, अगरबत्ती, दीपक, मिठाई, फल, सिन्दूर, हल्दी पाउडर, चंदन का पेस्ट और पवित्र जल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भक्त अनुष्ठान के हिस्से के रूप में पान के पत्ते, सुपारी और सिक्के भी चढ़ा सकते हैं।

मंत्र: हनुमान जन्मोत्सव पूजा के दौरान सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला मंत्र हनुमान चालीसा है, जो संत तुलसीदास द्वारा रचित एक भक्ति भजन है। भगवान हनुमान को समर्पित अन्य मंत्र, जैसे हनुमान गायत्री मंत्र और हनुमान बीज मंत्र, का भी उनका आशीर्वाद और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए जाप किया जाता है। साथ ही हनुमान जयंती पर आप सुबह जल्दी उठकर हनुमान जी को प्रणाम करके उनका पांच बार नाम लेकर नमन करें। इसके बाद स्नान आदि करके पीले वस्त्र धारण करें और हनुमान जी के प्रतिमा के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर ‘ॐ केशवाय नम:, ॐ नाराणाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ हृषीकेशाय नम: मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद सूर्यदेव को भी नमन करें और उगते हुए सूरज को जल अर्पित करें। इसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदर कांड का पाठ करें और बूंदी या लड्डू का भोग हनुमान जी को लगाएं। हनुमान जी का प्रसाद भक्तों में बांटना न भूलें। इससे आपको भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

जैसा कि भक्त 2024 में हनुमान जन्मोत्सव मनाने के लिए तैयार हैं, वे भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने के अवसर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह अवसर आध्यात्मिक नवीनीकरण, चिंतन और शक्ति, साहस और सुरक्षा के लिए दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का समय है।

अगर आप भी एमडीएच और एवरेस्ट मसाले खाते हैं , तो हो सकता है आपको कैंसर

MDH and Everest Massala
MDH and Everest Massala

अगर आप भी एमडीएच और एवरेस्ट मसाले खाते हैं , तो हो सकता है आपको कैंसर

अगर आप भी एमडीएच और एवरेस्ट मसाले खाते हैं , तो हो सकता है आपको कैंसर

मशहूर भारतीय मसाले गलत कारणों से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। हांगकांग के खाद्य नियामक प्राधिकरण ने लोकप्रिय भारतीय ब्रांडों एमडीएच और एवरेस्ट के चार उत्पादों में कैंसरकारी तत्व पाए हैं। जिसके बाद, सिंगापुर ने एथिलीन ऑक्साइड की मौजूदगी का हवाला देते हुए भारत से आयातित एवरेस्ट “फिश करी मसाला” को वापस ले लिया है, जो कैंसर पैदा करने वाला एजेंट है जो स्तन कैंसर और लिंफोमा के खतरे को बढ़ाता है। हांगकांग के खाद्य और पर्यावरण नियामक निकाय, खाद्य सुरक्षा केंद्र ने कहा कि उसने अपने नियमित खाद्य निगरानी कार्यक्रम के तहत चार उत्पादों के नमूने एकत्र किए और कीटनाशक एथिलीन ऑक्साइड की उपस्थिति पाई, जो मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त है। आपको बता दें कि तीन एमडीएच उत्पाद हैं – “करी पाउडर” (मद्रास करी के लिए मसाला मिश्रण), “मिश्रित मसाला पाउडर”, और “सांभर मसाला”। चौथा उत्पाद है “एवरेस्ट फिश करी मसाला”।

5 अप्रैल की अपनी घोषणा में, उसने कहा कि उन्होंने संबंधित विक्रेताओं को अनियमितताओं के बारे में सूचित कर दिया है और उन्हें बिक्री रोकने और प्रभावित उत्पादों को अलमारियों से हटाने का निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने एथिलीन ऑक्साइड को समूह 1 कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है। खाद्य पदार्थ में कीटनाशक अवशेष नियमन (कैप. 132CM) के अनुसार, मानव उपभोग के लिए कीटनाशक अवशेष युक्त भोजन केवल तभी बेचा जा सकता है जब भोजन की खपत स्वास्थ्य के लिए खतरनाक या प्रतिकूल न हो। सीएफएस के निर्देशों के अनुसार, वितरक/आयातक एसपी मुथैया एंड संस पीटीई। लिमिटेड को प्रभावित उत्पादों पर रिकॉल शुरू करने के लिए कहा गया है। हांगकांग के खाद्य नियामक द्वारा इन मसालों में कीटनाशकों की पहचान के बाद, सिंगापुर खाद्य एजेंसी (एसएफए) ने कहा कि उन्होंने आयातक को प्रभावित उत्पादों को व्यापक रूप से वापस लेने का निर्देश दिया है।

 जानिए पृथ्वी दिवस का क्या है इतिहास, किस लिए मनाया जाता है पृथ्वी दिवस

World Earth Day
World Earth Day

 जानिए पृथ्वी दिवस का क्या है इतिहास, किस लिए मनाया जाता है पृथ्वी दिवस

जानिए पृथ्वी दिवस का क्या है इतिहास, किस लिए मनाया जाता है पृथ्वी दिवस

विश्व पृथ्वी दिवस, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस के रूप में भी जाना जाता है, एक विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कार्यक्रम है जो जागरूकता बढ़ाने और हमारे ग्रह की स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। विश्व पृथ्वी दिवस प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता प्रयासों के महत्व की याद दिलाता है।

इतिहास

आपको बता दें कि विश्व पृथ्वी दिवस की उत्पत्ति का पता 1970 में लगाया जा सकता है जब इसे पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका में पर्यावरणीय गिरावट और प्रदूषण की प्रतिक्रिया के रूप में मनाया गया था। बढ़ते पर्यावरण आंदोलन से प्रेरित होकर, सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पर्यावरण संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और नीति सुधारों की वकालत करने के प्रयासों का नेतृत्व किया। उद्घाटन पृथ्वी दिवस में लाखों अमेरिकियों ने रैलियों, प्रदर्शनों और शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लिया, जिससे स्वच्छ वायु अधिनियम, स्वच्छ जल अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) की स्थापना जैसे प्रमुख पर्यावरण कानून पारित हुए। तब से, पृथ्वी दिवस एक वैश्विक घटना बन गया है, जिसमें 190 से अधिक देश प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को विभिन्न पर्यावरणीय पहलों और गतिविधियों में भाग लेते हैं। 

थीम

विश्व पृथ्वी दिवस 2024 का या विषय “सभी के लिए जलवायु कार्रवाई” पर केंद्रित है। यह विषय जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है और समावेशी और न्यायसंगत समाधानों की आवश्यकता पर जोर देता है जिसमें समाज के सभी वर्ग शामिल हों। यह पर्यावरणीय मुद्दों के अंतर्संबंध पर प्रकाश डालता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य का निर्माण करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों का आह्वान करता है। 

महत्व

विश्व पृथ्वी दिवस वैश्विक स्तर पर पर्यावरण जागरूकता, वकालत और कार्रवाई के उत्प्रेरक के रूप में अत्यधिक महत्व रखता है। यह व्यक्तियों, समुदायों, सरकारों और संगठनों को एक साथ आने और जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, प्रदूषण, जैव विविधता की हानि और आवास विनाश जैसी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। पृथ्वी दिवस वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए ग्रह की सुरक्षा और संरक्षण की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है। यह व्यक्तियों को स्थायी प्रथाओं को अपनाने, पर्यावरण नीतियों की वकालत करने और पर्यावरणीय प्रबंधन और संरक्षण को बढ़ावा देने वाली पहल में भाग लेने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा, पृथ्वी दिवस पर्यावरण के प्रति जागरूकता और गतिशीलता बढ़ाने के लिए एक रैली के रूप में कार्य करता है, जो एक अधिक टिकाऊ और लचीली दुनिया की दिशा में गति प्रदान करता है।

लोकसभा चुनाव 2024: माधवी लता ने वायरल वीडियो पर दी सफाई, कहा “मैं मुसलमानों के खिलाफ होती, तो”

Madhavi Lata
Madhavi Lata

लोकसभा चुनाव 2024: माधवी लता ने वायरल वीडियो पर दी सफाई, कहा “मैं मुसलमानों के खिलाफ होती, तो”

लोकसभा चुनाव 2024: माधवी लता ने वायरल वीडियो पर दी सफाई, कहा “मैं मुसलमानों के खिलाफ होती, तो”

भारत, जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के संचालन के लिए जाना जाता है, उसके संसद के निचले सदन लोकसभा की 102 सीटों के लिए 21 राज्यों में मतदान हो चुका है। और जैसे जैसे लोकसभा चुनाव अपने दूसरे चरण के लिए तैयार हो रहा है, उससे पहले एक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है जिसमें एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती माधवी लता कथित तौर पर एक बयान देते हुए तीर चला रही हैं जिससे राजनीति के बड़े बड़े नेताओं की भौंहें तन गई हैं। वीडियो के जवाब में, माधवी लता स्पष्टीकरण देने के लिए आगे आई, उन्होंने कहा कि उनके इरादों को गलत समझा गया और उन्होंने किसी भी मुस्लिम विरोधी भावना को अहात करने से इनकार किया है। दरअसल इस वीडियो में माधवी लता को एक बयान देते हुए तीर चलाते हुए दिखाया गया है, जिसे कुछ लोगों द्वारा मुसलमानों के खिलाफ निर्देशित माना गया है। हालाँकि, माधवी लता ने इन व्याख्याओं का खंडन किया है, यह कहते हुए कि उनके कार्य प्रतीकात्मक थे और संदर्भ से बाहर किए गए थे। विवाद को संबोधित करते हुए एक बयान में, माधवी लता ने कहा, “अगर मैं मुसलमानों के खिलाफ होती, तो इस कृत्य के बाद तीर वापस नहीं लेती।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके कार्यों का उद्देश्य किसी विशिष्ट समुदाय को लक्षित करना नहीं था और उन्होंने अपने इरादों की गलत व्याख्या पर अफसोस जताया। लेकिन माधवी लता के स्पष्टीकरण के बावजूद, वीडियो ने आक्रोश फैलाया और अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया। विवादास्पद वीडियो के संबंध में एक मामला दर्ज किया गया है, अधिकारियों ने इसके फिल्मांकन के आसपास की परिस्थितियों और माधवी लता के कार्यों के संदर्भ का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। यह मामला धार्मिक और सांप्रदायिक भावनाओं से जुड़ी संवेदनशीलता को रेखांकित करता है, खासकर चुनावी राजनीति के संदर्भ में। लोकसभा चुनाव शुरु होने के साथ, राजनीतिक बयानबाजी और कार्रवाइयां कड़ी जांच के दायरे में हैं, और भड़काऊ या विभाजनकारी माने जाने वाले किसी भी बयान या इशारे के महत्वपूर्ण परिणाम हो सकते हैं। जैसा कि वीडियो की जांच जारी है, विवाद के नतीजों से माधवी लता का अभियान और राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। यह घटना चुनावी राजनीति में निहित चुनौतियों और जटिलताओं की याद दिलाती है, जहां एक भी गलती के परिणाम बुरे हो सकते हैं।

असदुद्दीन ओवैसी भी वीडियो पर कर रहे है राजनीति

आपको बता दें कि, इससे पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उन पर निशाना साधते हुए कहा था कि तीर शहर की शांति और अमन को निशाना बना रहा है। उधर, असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि माधवी लता के कथित इशारे का उद्देश्य शहर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच शांति को कमजोर करना था। उन्होंने कहा कि आपने देखा कि बीजेपी का एक उम्मीदवार एक मस्जिद की ओर तीर चलाने का इशारा कर रहा है। अगर आपको थोड़ा सा भी दर्द महसूस होता है, तो आपको पार्टी के लिए नहीं बल्कि उस ‘इबादतगाह’ के लिए वोट देना चाहिए। अगर आप अब भी सोते रहोगे तो कब उठोगे. वह काल्पनिक तीर किसी मस्जिद पर नहीं, बल्कि हैदराबाद की शांति और शांति के खिलाफ था। इससे पता चलता है कि बीजेपी हैदराबाद की शांति को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच शांति को कमजोर करने के लिए किया गया था। मेरे लिए आपके साथ मतभेद हो सकते हैं। लेकिन शहर में शांति सबके लिए है।

गैरी कास्परोव का 40 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 17 वर्षीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने रचा दिया इतिहास

Grandmaster D Gukesh
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गैरी कास्परोव का 40 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 17 वर्षीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने रचा दिया इतिहास

गैरी कास्परोव का 40 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 17 वर्षीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने रचा दिया इतिहास

भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, 17 वर्षीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर खेल के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है, वह विश्वनाथन आनंद के बाद यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में गुकेश की जीत ने पूरे वैश्विक शतरंज समुदाय में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ा दी है। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो चुनौती देने वाले का निर्धारण करता है जो विश्व शतरंज चैम्पियनशिप मैच में मौजूदा विश्व शतरंज चैंपियन का सामना करेगा। इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में गुकेश की जीत शतरंज की बिसात पर उनके असाधारण कौशल, रणनीतिक कौशल और मानसिक दृढ़ता को रेखांकित करती है।

कौन है ग्रैंडमास्टर डी गुकेश

चेन्नई, तमिलनाडु के रहने वाले, गुकेश छोटी उम्र से ही अंतरराष्ट्रीय शतरंज सर्किट में लहरें पैदा कर रहे हैं, उन्होंने 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया, जिससे वह इतिहास में सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टरों में से एक बन गए। शतरंज की दुनिया में उनकी जबरदस्त प्रगति असाधारण से कम नहीं है, जिसे दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों से प्रशंसा और प्रशंसा मिली है। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में गुकेश की जीत उनके समर्पण, कड़ी मेहनत और खेल के प्रति अटूट जुनून का प्रमाण है। उनकी सामरिक प्रतिभा और अनुभवी विरोधियों को मात देने की क्षमता ने उन्हें वैश्विक शतरंज परिदृश्य में सबसे आगे खड़ा कर दिया है, जिससे उन्हें अपने साथियों और प्रशंसकों से प्रशंसा और पहचान मिली है।

गैरी कास्परोव का 40 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

चेन्नई से आने वाले 17 साल के डी गुकेश ने इस टूर्नामेंट को अपने नाम करने के साथ दिग्गज गैरी कास्परोव के 40 साल पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया, जिन्होंने उस समय वर्ल्ड चैंपियन को चुनौती पेश करने के लिए 22 साल की उम्र में क्वालीफाई किया था। डी गुकेश और अमेरिकी खिलाड़ी के बाद मैच 109 चालों तक चला जिसके बाद दोनों ड्रा करने पर अपनी सहमति जताई थी। इस टूर्नामेंट में डी गुकेश के प्रदर्शन को देखा जाए तो उन्होंने 5 मैचों में जहां जीत हासिल की तो उन्हें एक में हार का सामना करना पड़ा जो फ्रांस के खिलाफ अलिरेजा फिरौजा के खिलाफ मिली थी।

Garry Kasparov
Garry Kasparov ( Russian Chess Grandmaster)

शतरंज प्रेमियों की नई पीढ़ी हो रही प्रेरित

युवा ग्रैंडमास्टर की उपलब्धि को भारत में सेवानिवृत्ति और गर्व के साथ स्वीकार किया गया है, कई लोगों ने उन्हें देश भर के महत्वाकांक्षी शतरंज खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श और प्रेरणा के रूप में सराहा है। गुकेश की सफलता भारत के उभरते शतरंज समुदाय के भीतर प्रतिभा और क्षमता की गहराई को भी उजागर करती है, जो शतरंज की दुनिया में एक पावरहाउस के रूप में देश की स्थिति की पुष्टि करती है। जैसा कि गुकेश अपनी ऐतिहासिक जीत की महिमा का आनंद ले रहे हैं, भारतीय शतरंज बिरादरी उनकी जीत को देश के शतरंज इतिहास में एक निर्णायक क्षण के रूप में मना रही है। अपनी उल्लेखनीय प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के साथ, गुकेश दुनिया भर में शतरंज प्रेमियों की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने और उन्हें प्रेरित करने के लिए तैयार है।

घंटों बाद भी नहीं बुझी ‘कूड़े के पहाड़’ में लगी आग, जहरीली गैस से घूंट रहा है लोगों का दम 

Ghazipur Fire
Ghazipur Fire

घंटों बाद भी नहीं बुझी ‘कूड़े के पहाड़’ में लगी आग, जहरीली गैस से घूंट रहा है लोगों का दम 

घंटों बाद भी नहीं बुझी ‘कूड़े के पहाड़’ में लगी आग, जहरीली गैस से घूंट रहा है लोगों का दम 

दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर बने गाजीपुर स्थित कूड़े के पहाड़ में बीती शाम अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने कूड़े के पहाड़ के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें चारों ओर फैल गई। ताजा रिपोर्ट के मुताबित, गाजीपुर लैंडफिल साइट से धुआं निकलना जारी है। दिल्ली फायर सर्विसेज का कहना है कि आग लैंडफिल में पैदा हुई गैस के कारण लगी थी। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इस आग की वजह से आसपास के इलाके में जहरीली गैस फैल गई है, जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है. लैंडफिल साइट पर आग इतनी तेज लगी कि धुएं का गुबार आसमान छू रहा था. इस जहरीले धुएं से न केवल दिल्ली वालों बल्कि उससे सटे नोएडा और गाजियाबाद वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लैंडफिल साइट पर आग बुझाने के लिए दमकल की 30 से ज्यादा गाड़ियां लगी हुई हैं.

पूरी रात आग पर काबू पाने की कोशिश होती रही हालांकि अबतक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है. कई हिस्सों में आग रुक-रुककर धधक रही है. यहां अभी भी धुएं का गुबार उठ रहा है. दिल्ली में गाजीपुर, भलस्वा और ओखला तीन प्रमुख लैंडफिल साइट्स हैं जहां कचरों के ढेर में आग लगना कोई नई बात नहीं है. यहां हर साल गर्मियों के मौसम में जैस ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है तो लैंडफिल साइट में आग लग जाती है, जिससे आस-पास रहने वालों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.  दिल्ली फायर सर्विस एसओ नरेश कुमार ने बताया कि आग लैंडफिल में पैदा हुई गैस के कारण लगी थी। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दमकल कर्मियों का कहना था कि कूड़ों के पहाड़ में लगी आग अक्सर कई-कई दिनों तक चल जाती है।

फिलहाल आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। एक जगह आग बुझाई जाती है तो दूसरी जगह भड़क जाती है। वहीं, लैंडफिल साइट के आसपास रह रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मियों में अक्सर यहां आग लग जाती है। पुलिस के मुताबिक रविवार शाम करीब 5.22 बजे सूचना मिली कि गाजीपुर लैंडफिल साइट में आग लग गई है। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कूड़े के दबाव से वहां मीथेन गैस बनती है, जिससे बार-बार दोबारा आग भड़कती है। आग गर्मी से खुद लगी या किसी मानवीय भूल की वजह से इसका पता आभी तक नहीं चल सका है।

महावीर जयंती: जैन धर्म के आध्यात्मिक प्रतीक के जन्म का जश्न

Mahavir Jayanti
Mahavir Jayanti

महावीर जयंती: जैन धर्म के आध्यात्मिक प्रतीक के जन्म का जश्न

महावीर जयंती: जैन धर्म के आध्यात्मिक प्रतीक के जन्म का जश्न

महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। भगवान महावीर अपनी गहन शिक्षाओं, तपस्वी जीवनशैली और गहन आध्यात्मिक ज्ञान के लिए पूजनीय हैं। वह कई कारणों से जैन धर्म में प्रसिद्ध हैं:

1- जैन धर्म के संस्थापक: महावीर को जैन धर्म का संस्थापक माना जाता है, हालाँकि जैन धर्म के सिद्धांत उनसे भी पहले के हैं। उन्होंने जैन धर्म की मान्यताओं, प्रथाओं और सिद्धांतों को संहिताबद्ध और व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्हें बाद में उनके अनुयायियों द्वारा प्रचारित किया गया।

2- अहिंसा का मार्ग (अहिंसा): महावीर ने जैन दर्शन की आधारशिला के रूप में अहिंसा या अपरिग्रह के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया का उपदेश दिया और सभी रूपों में जीवन की सुरक्षा की वकालत की। अहिंसा पर उनकी शिक्षाएं जैन और गैर-जैनियों को समान रूप से शांति और सद्भाव का जीवन जीने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।

3- तपस्या का अभ्यास: महावीर ने सांसारिक सुखों को त्याग दिया और आध्यात्मिक मुक्ति की खोज में एक तपस्वी जीवन शैली अपनाई। उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या, ध्यान और आत्म-अनुशासन का अभ्यास किया। आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति उनका समर्पण आध्यात्मिक विकास और ज्ञानोदय चाहने वाले अनुयायियों के लिए एक उदाहरण के रूप में कार्य करता है।

4- कर्म का सिद्धांत: महावीर ने कर्म के सिद्धांत की व्याख्या की, जिसमें कहा गया है कि किसी के कार्यों (कर्म) के परिणाम होते हैं जो भविष्य के अनुभवों और जीवनकाल को प्रभावित करते हैं। उन्होंने जन्म और मृत्यु के चक्र (संसार) से मुक्ति पाने के लिए नैतिक आचरण, धार्मिक जीवन और आत्मा की शुद्धि के महत्व पर जोर दिया।

5- जैन नैतिकता पर शिक्षा: महावीर ने जैन नैतिकता पर शिक्षा दी, जिसमें सत्यता (सत्य), चोरी न करना (अस्तेय), ब्रह्मचर्य (ब्रह्मचर्य), और अपरिग्रह (अपरिग्रह) जैसे सिद्धांत शामिल हैं। ये नैतिक सिद्धांत जैन नैतिक आचरण की नींव बनाते हैं और अनुयायियों को एक सदाचारी जीवन जीने में मार्गदर्शन करते हैं।

कुल मिलाकर, अहिंसा, तपस्या, कर्म और नैतिक जीवन पर महावीर की शिक्षाओं का जैन धर्म पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जिसने इसके दर्शन, प्रथाओं और सांस्कृतिक लोकाचार को आकार दिया है। महावीर जयंती जैनियों के लिए उनकी शिक्षाओं पर विचार करने, उनके जीवन का जश्न मनाने और जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का एक अवसर है।

पहले चरण के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने बताया किस पार्टी को पड़े है कितने वोट

ELECTION
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पहले चरण के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने बताया किस पार्टी को पड़े है कितने वोट

पहले चरण के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने बताया किस पार्टी को पड़े है कितने वोट

उत्तर प्रदेश में हाल ही में आठ सीटों पर मतदान संपन्न हुआ, जिसमें कुल 57.90% मतदान हुआ। भागीदारी को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में कम मतदान हुआ, जिसमें रामपुर में सबसे कम वोट पड़े। उत्तर प्रदेश की जिन आठ सीटों पर चुनाव हुए उनमें सहारनपुर, बिजनौर, कैराना, मुजफ्फरनगर, नगीना (आरक्षित), मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत शामिल हैं। चुनाव आयोग के   मुताबिक, सहारनपुर लोकसभा सीट पर 63.29 फीसदी, मुरादाबाद में 57.83 फीसदी, कैराना में 60.39 फीसदी, नगीना में 59.17 फीसदी, पीलीभीत में 60.23 फीसदी, बिजनौर में 54.68 फीसदी, रामपुर में 52.42 फीसदी और मुजफ्फरनगर में 54.91 फीसदी मतदान हुआ। ये निर्वाचन क्षेत्र वो हैं जो की बताता है कि यूपी की कुर्सी पर कौन बैठेगा। उत्तर प्रदेश के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने बताया कि शाम छह बजे तक अधिकांश केन्द्रों पर मतदान पूरा हो गया था। रिनवा ने कहा कि चुनाव पूरी तरीके से शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रिनवा ने कहा कि इन सीट पर 2019 के लोकसभा चुनाव के तुलनात्मक आंकड़े के साथ मतदान प्रतिशत का अंतिम आंकड़ा शनिवार को सुबह जारी किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि राज्य में मतदान शुरु होने के बाद शाम पांच बजे तक कुल 50 बीयू यानि बैलेट यूनिट, 50 सीयू यानि कंट्रोल यूनिट और 152 वीवीपैट बदले गए।  पहले चरण के चुनाव में विभिन्न दलों के कुल 80 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 73 पुरुष और सात महिलाएं शामिल हैं। मुरादाबाद से 12, कैराना से 14, मुजफ्फरनगर और 0बिजनौर से 11-11, सहारनपुर और पीलीभीत से 10-10, नगीना और रामपुर से 6-6 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रथम चरण के आठ लोकसभा क्षेत्रों में 1.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 76.23 लाख पुरुष, 67.14 लाख महिला और 824 मतदाता तृतीय लिंगी हैं। पुलिस महानिदेशक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रथम चरण के मतदान को देखते हुए संबंधित नौ जिलों में 248 चौकियां स्थापित की गई हैं, जहां वाहनों और संदिग्ध लोगों की सघन जांच जारी है।

लोकसभा चुनाव के पहले फेज में यूपी की इन 8 सीटों पर जातिगत समीकरण क्या है, और किस पार्टी का पलड़ा भारी है, ये भी जान लीजिए।

पीलीभीत

पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से तो उसकी आबादी 25 लाख के आस पास है और वोट 18 लाख से ज्यादा है। जातिगत आंकड़ों पर नजर डाले तो 5 लाख के आस पास मुस्लिम, किसान 3 से 4 लाख के बीच और कुर्मी वोट लगभग 2 लाख है, और यह क्षेत्र मेनका और वरुण गांधी के लोकसभा क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है। 

बिजनौर

दूसरे नंबर पर बात करें तो बिजनौर लोकसभा में पांच विधानसभा सीट है। इसमें अगर जातिगत वोटर की बात करें तो करीब साढ़े 4 लाख से 5 लाख के आसपास मुस्लिम वोटर हैं। जबकि तक़रीबन चार से साढे चार लाख के बीच दलित वोटर हैं, डेढ़ से पौने दो लाख के करीब जाट वोटर हैं, और इसके अलावा 50 से 75 हजार के बीच में गुर्जर वोटर है और 50 से 60 हजार के बीच में ब्राह्मण वोटर है. वही इसके अलावा चौहान त्यागी अन्य जातीय सहित कई अन्य जातियों का भी वोट इसमें शामिल है। अगर हम निर्णायक वोटरों की बात करें तो इस सीट पर मुस्लिम और दलित वोटर हमेशा निर्णायक रहा है। बिजनौर लोकसभा के इतिहास की बात करें तो राम मंदिर आंदोलन के बाद से यानी 1991 से अब तक भारतीय जनता पार्टी चार बार इस सीट पर अपना कब्जा जमा चुकी है लेकिन फिलहाल में इस सीट पर कब्जा बसपा का है।

नगीना

हाथ की नक्काशी के लिए जाना जाने वाला नगीना की तो इस सीट पर मुसलमानों की संख्या सबसे ज्यादा है। करीब साढ़े 7 लाख वोटर इसमें मुसलमान है. दलित वोटर की संख्या लगभग साढे चार लाख के आसपास है. और 2009 में यह सीट अस्तित्व में आई और इस पर पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ। इस सीट पर सपा और बसपा के गठबंधन के चलते बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी गिरीश चंद्र इस सीट पर विजय रहे जो वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

कैराना

अब बात करते हैं हिन्दू, मुसलमान गुज्जर बहुल्य इलाका कैराना का ये इलाका हिन्दू और मुसलमान गुजर बहुल्य माना जाता है, कैराना लोकसभा में पांच विधानसभा सीट मौजूद है। जिसमें कैराना, शामली, थाना भवन नुकुड और गंगोह विधानसभा सीट है। कैराना लोकसभा में जातीय समीकरण की बात करें तो यहाँ पर सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। जिनकी संख्या करीब 5.45 लाख के आसपास है। उसके बाद दलित वर्ग के तकरीबन ढाई लाख वोटर है. कैराना में तकरीबन ढाई लाख के आसपास जाट वोटर है। इस सीट पर बीजेपी के प्रदीप चौधरी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

सहारनपुर

सहारनपुर लोकसभा सीट पर दलित और मुस्लिम वोट डिसाइडिंग फ़ैक्टर रहते हैं, जो इसे राजनीतिक दलों के लिए अहम बनाता है. मुरादाबाद लोकसभा की बात करें तो उसमे कुल 5 विधानसभा आती हैं। 2019 के चुनाव के आंकड़ों के अनुसार मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख 41 हजार 2 सौ वोटर हैं। इसमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 8 लाख 80 हजार है, जो कुल मतों का 45 फीसदी से अधिक है। अनुसूचित जाति के जाटव मतदाताओं की संख्या करीब 1 लाख 80 हजार और वाल्मीकि वोटर 43 हजार है, जो कुल मतों का करीब 10 प्रतिशत है। इनमें करीब 29 हजार वोटर यादव जाति से ताल्लुक रखते हैं, इसके अलावा 1 लाख 50 हजार ठाकुर, 1 लाख 49 हजार सैनी, 3 लाख 55 हजार अन्य वोटर हैं। सहारनपुर लोकसभा सीट से महागठबंधन से प्रत्याशी बने बसपा के हाजी फजलुर्रहमान ने 5 लाख 14 हजार वोट पाकर जीत दर्ज की थी

मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर अगर जातिगत आंकड़ों की बात करें तो इसी सीट पर 2019 चुनाव के अनुमानित आकड़ो के मुताबिक लगभग 17 लाख के आसपास मतदाता है. जिसमें लगभग 5 लाख मुस्लिम, 2 लाख दलित, डेढ़ लाख जाट, 1 लाख 30 हजार कश्यप, 1 लाख 20 हजार सैनी, 1 लाख 15 हजार वैश्य और लगभग 4 लाख80 हजार ठाकुर, गुर्जर, और अन्य बिरादरियाँ है। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर लगातार बीजेपी जीत हासिल करती आई है, और इस बार भी अपने जाट चेहरे संजीव बालियान को तीसरी बार मैदान में उतारा है।

रामपुर

अब रामपुर लोकसभा क्षेत्र में करीब 16 लाख से अधिक मतदाता है। 2019 के आंकड़ों की बात करे तो इनमें करीब 8 लाख 72 हजार 84 वोटर पुरुष हैं जबकि 7 लाख 44 हजार 900 महिला वोटर हैं। 2011 की गणना के अनुसार रामपुर क्षेत्र कुल 50.57 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है, जबकि 45.97 प्रतिशत से अधिक हिंदुओं की जनसंख्या है। यही कारण है कि यहां के मतदाता दूसरे धर्म या जाति वाले प्रत्याशी को चुनने में किसी तरह का कोई गुरेज नहीं करते हैं. रामपुर लोकसभा की राजनीतिक पृष्ठभूमि से इंडिया गठबंधन के सबसे बड़े दल के रूप में कांग्रेस की फेहरिस्त में यहां की सीट भी है. जबकि सपा भी यहां पर मजबूत दावा पेश करती देखी जा सकती है. वहीं दूसरी ओर भाजपा के दिग्गजों ने भी विरोधियों को कई मौके पर चुनावी रण में धूल चढ़ाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है।