अरविंद केजरीवाल का दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, कोर्ट ने गिरफ्तारी को ठहराया सही
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला अब आ गया है। सीएम केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। जिसमें हाई कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाया। आपको बता दें कि कोर्ट ने कहा कि ये याचिका जमानत के लिए नहीं है। साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि याचिका जमानत के लिए नहीं है। याचिका में याचिकाकर्ता ने हिरासत को गलत बताया है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने याचिका को खारिज कर दिया। आपको बता दें कि गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पद से हटाने की मांग को लेकर याचिका दायर करने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के एक पूर्व विधायक संदीप कुमार को कड़ी फटकार लगाई थी। वहीं, आम आदमी पार्टी के सूत्रों से खबर मिल रही है कि ‘आप’ हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं है। केजरीवाल हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ कल ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध- एएसजी एसवी राजू
दिल्ली शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय का प्रतिनिधित्व कर रहे एएसजी एसवी राजू ने कहा कि ‘आज जज ने सभी सबूत देखने के बाद फैसला सुनाया और कोर्ट ने भी कहा उस मनी ट्रेल का पता चल गया है। कोर्ट ने आज न्याय किया है और कोर्ट ने कहा है कि सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध है।’
अरविंद केजरीवाल पर राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कही बड़ी बात
राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘आम आदमी पार्टी का अहंकार चकनाचूर हो गया है। अरविंद केजरीवाल का स्वघोषित ईमानदार चरित्र तथ्यों और सबूतों से भी चकनाचूर हो गया है।’
जब राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तब एक बात कही जा रही थी कि हर रामनवमी के दिन रामलाल का सुर्य देव खुद सूर्य तिलक करेंगे, और वो बात अब जल्द सच होने वाली है। रामनवमी के अवसर पर होने वाले रामलला के सूर्य तिलक का ट्रायल सफल हो चुका है। अब यह तय हो गया है कि 17 अप्रैल को राम जन्मोत्सव के दिन दोपहर में ठीक 12:00 बजे राम लला का सूर्य अभिषेक किया जाएगा। मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल राव ने बताया कि कुछ दिन पहले सूर्य तिलक के लिए वैज्ञानिकों ने उपकरण गर्भगृह के ठीक ऊपर तीसरी मंजिल पर लगाए थे। रविवार को मध्यान्ह आरती के बाद पहला ट्रायल हुआ तो किरणें रामलला के होठों पर पड़ीं फिर लेंस को दोबारा सेट कर सोमवार को ट्रायल हुआ तो किरणें मस्तक पर पड़ीं। इससे रामनवमी पर सूर्य तिलक का आयोजन अब तय माना जा रहा है। इस बार रामनवमी पर सूरज की किरणें राम मंदिर में विराजमान भगवान श्री रामलला का अभिषेक करेंगी। किरणें 17 अप्रैल को ठीक दोपहर 12 बजे मंदिर की तीसरी मंजिल पर लगाए गए ऑटोमैकेनिकल सिस्टम के जरिए गर्भगृह तक आएंगी। यहां किरणें दर्पण से परावर्तित होकर सीधे रामलला के मस्तक पर 4 मिनट तक 75 मिमी आकार के गोल तिलक के रूप में दिखेंगी। इस सूर्य तिलक को देश के दो वैज्ञानिक संस्थानों की मेहनत से साकार किया जा रहा है।
क्यों खास है सूर्याभिषेक
भगवान राम का जन्म सूर्य वंश में हुआ था और उनके कुल देवता सू्र्यदेव हैं। साथ ही भगवान राम का जन्म मध्य काल में अभिजीत मुहूर्त में हुआ था, तब सूर्य अपने पूर्ण प्रभाव में थे। भारतीय धर्म दर्शन में बताया गया है कि उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने, दर्शन व पूजा करने से बल, तेज व आरोग्य की प्राप्ति होती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत रहती है। विशेष दिनों में जब सूर्यदेव की पूजा की जाती है, तब दोपहर के समय में ही होती है क्योंकि तब सूर्यदेव अपने पूर्ण प्रभाव में होते हैं। अयोध्या के मंदिर में रामलला के मस्तक पर भेजने के लिए सूर्य तिलक तंत्र का प्रयोग किया जाएगा। इस तंत्र का प्रयोग हर साल राम नवमी के दिन ही किया जाएगा।
इतने लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
इस साल राम नवमी पर अयोध्या में करीब 40 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक 15 अप्रैल से 17 अप्रैल तक रोजाना प्रभु रामलला 20 घंटे तक श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। 4 घंटे के लिए भोग, शृंगार व आरती के समय मंदिर में पर्दा गिरा रहेगा। इस दौरान आम जन के लिए दर्शन बंद रहेगा।
नवरात्र और मांगलिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होने से पहले ही सोने की कीमत में रिकॉर्ड बढ़त दर्ज हुई है। बरेली में शनिवार को 500 रुपये उछाल के साथ सोना 70,300 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा पहुंचा। वहीं, चांदी 78,200 रुपये प्रति किलो बिकी। सोने की कीमत आसमान छू रही है। सोमवार को यह फिर नए शिखर पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर पहली बार सोने की कीमत 71,000 रुपये के पार निकल गई है। शुरुआती कारोबार में यह करीब 400 रुपये की तेजी के साथ 71057 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विदेशी बाजार में भी सोना रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर सोने की कीमत में इतनी तेजी की वजह क्या है? इसकी एक वजह यह है कि कई देशों के सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। इसमें आरबीआई और चीन का सेंट्रल बैंक भी आता है। चीन के सेंट्रल बैंक में फरवरी में 12 टन सोना खरीदा और मार्च में भी यह सिलसिला जारी रहा। चीन के पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना लगातार 17 महीने से सोने की खरीदारी कर रहा है। जानकारों का कहना है कि सोने की कीमत में तेजी के पीछे यह भी एक बड़ी वजह है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की बात करे तो उसके मुताबिक चीन के सेंट्रल बैंक के पास गोल्ड रिजर्व मार्च में बढ़कर 72.74 मिलियन ट्रॉस औंस पहुंच गया है। और चीन का विदेशी मुद्रा भंडार नवंबर 2015 के बाद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मार्च के अंत में यह 3.2457 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। फरवरी की तुलना में इसमें 0.6 फीसदी और एक साल पहले की तुलना में 1.9 फीसदी तेजी आई है। दुनियाभर के सेंट्रल बैंक 2022 से अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ाने में लगे हैं। 2022 में इन बैंकों ने पहली बार 1000 टन से अधिक सोना खरीदा था और फिर 2023 में भी करीब इतनी ही खरीदारी की थी। अभी केंद्रीय बैंकों के रिजर्व में 20% से अधिक सोना है।
क्यों खरीद रहें हैं बैंक सोना
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की गिरती परचेजिंग पावर से बचने के लिए सोना सबसे बेहतर है। पिछले 110 साल से ऐसा ही होता आया है और आगे भी होता रहेगा। जब करेंसी और इकॉनमी को खतरा होता है तो भी सेंट्रल बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं। अमेरिका, चीन और यूरोप के कई देशों में मंदी की आशंका बनी हुई है। खासकर चीन आर्थिक मोर्चे पर कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रहा है। वैसे अगर गोल्ड रिजर्व की बात करें तो उसके मामले में अमेरिका पहले नंबर पर है। उसके खजाने में करीब 8,133 टन सोना है। इसके बाद जर्मनी, इटली, फ्रांस, रूस, चीन, स्विट्जरलैंड और भारत का नंबर है। आरबीआई ने इस साल करीब 13 टन सोना खरीदा है और उसके पास 817 टन गोल्ड रिजर्व है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम एक बार फिर हुए कांग्रेस पर हमलावर, कही बड़ी बात
कांग्रेस के पूर्व नेता और संभल स्थित कल्कि धाम के प्रमुख आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस के घोषणापत्र पर तंज कसा है। गाजियाबाद में सोमवार को उन्होंने कांग्रेस के मेनिफेस्टो पर हमला बोलते हुए कहा कि लगता है कि “कांग्रेस का घोषणा पत्र देखकर लगता है कि ये महात्मा गांधी की कांग्रेस नहीं जिन्ना की कांग्रेस है. ये घोषणापत्र मल्लिकार्जुन खरगे का घोषणा पत्र नहीं जिन्ना का घोषणापत्र लगता है।” आपको बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने अपना चुनावी मेनिफेस्टो 6 अप्रैल को जारी किया था। इस घोषणापत्र में कांग्रेस ने 5 न्याय, 25 गारंटी के साथ 300 से ज्यादा वादे किए हैं. अपने घोषणापत्र में कांग्रेस ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का भी विरोध किया है. 48 पेज के इस मेनिफेस्टो में पार्टी ने किसान, यूथ, महिलाओं, बुजुर्ग और युवाओं को ध्यान में रखकर भी कई वादे किए हैं।
पीएम मोदी भी मेनिफेस्टो पर ले चुकें हैं चुटकी
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कांग्रेस के मेनिफेस्टो की तुलना मुस्लिम लीग से कर चुके हैं। इसे लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज करा चुकी है। पीएम मोदी ने नवादा, सहारनपुर और पुष्कर की रैलियों में कांग्रेस के घोषणा-पत्र को पूरी तरह से मुस्लिम लीग की छाप वाला बताया था। साथ ही यह भी कहा था कि न्याय पत्र का जो हिस्सा बचा हुआ है, उस पर वामपंथियों का प्रभाव है।
यश, सिद्धि और सर्वत्र विजय के लिए मां ब्रह्मचारिणी की कैसे करें पूजा
देवी दुर्गा का यह रूप साधकों को अमोघ फल प्रदान करता है। साधक को यश, सिद्धि और सर्वत्र विजय की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दूसरे दिन साधक इनकी आराधना कर अपने चित्त को ‘स्वाधिष्ठान’ चक्र में स्थित करते हैं। ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन साधक अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्मचारिणी दो शब्दों के मेल से बना है, ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। इसकी जानकारी भविष्य पुराण में मिलती है। कथावाचक मां ब्रह्मचारिणी किकथा सुनाके हैं कि मां ब्रह्मचारिणी ने अपने पूर्व जन्म में राजा हिमालय के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया था। तब देवर्षि नारद के उपदेश से इन्होंने भगवान शंकर को अपने पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी। इस दुष्कर तपस्या के कारण इन्हें तपस्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। देवी ब्रह्मचारिणी की समुचित उपासना साधक में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि करता है. देवी दुर्गा के इस द्वितीय स्वरुप की अनुकंपा से साधक की समस्त समस्याओं एवं परेशानियों का नाश और उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय मिलती होती है.
उपासना के लिए श्लोक, ध्यान मंत्र और स्तोत्र पाठ:
इन्हें प्रसन्न करने के लिए साधक को इस श्लोक का मंत्रोच्चार करना चाहिए
|| दधाना कर पद्माभ्यामक्ष माला कमण्डलु | देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||
अर्थात, हे देवी ब्रह्मचारिणी, जो हाथों में माला और कमंडलु धारण करती हैं, मुझ पर कृपा करें।
मान्यता है कि मां दुर्गा के द्वितीय रुप देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना इस मंत्र और स्तोत्र से करने पर भक्तों को अनन्त फल की प्राप्ति होती है। जीवन के कठिन-से-कठिन संघर्षों में भी उसका चित्त एकनिष्ठ रहता है और मन कर्तव्य-पथ से विमुख नहीं होता है।
18 साल बाद टूटी शादी, धनुष-ऐश्वर्या ने दाखिल की तलाक की अर्जी
रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या और उनके दामाद धनुष बीते 2 साल से अलग रह रहे थे। शादी के 18 साल बाद आखिरकार आज इस कपल ने कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल कर दी है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार इस कपल ने चेन्नई फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की है। इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने धारा 13 बी – आपसी सहमति से तलाक के तहत याचिका दायर की है। उनके मामले की जल्द ही सुनवाई होगी।
आपको बता दें कि धनुष और ऐश्वर्या ने साल 2004 में शादी की थी। जिसके बाद इस कपल ने 2022 में ऐलान किया था कि वह अब अलग हो रहे हैं। बीते 2 साल से ये कपल अलग रह रहे थे और अब आखिरकार उन्होंने तलाक लेने का फैसला कर लिया है। धनुष ने एक्स पर शेयर किए गए एक नोट में लिखा कि, ‘दोस्तों, कपल, माता-पिता और एक-दूसरे के शुभचिंतकों के रूप में 18 साल की एकजुटता. जर्नी, विकास, समझ, समायोजन और अनुकूलन की रही है. आज हम एक जगह पर खड़े हैं जहां हमारे रास्ते अलग हो गए. ऐश्वर्या और मैंने एक कपल के रूप में अलग होने का फैसला किया है और बेहतरी के लिए हमें एक व्यक्ति के रूप में समझने का समय लिया है। कृपया हमारे फैसले का सम्मान करें और हमें इससे निपटने के लिए जरूरी समय प्रदान करें। ओम नमः शिवाय! डी.’
प्यार के लिए सरहद पार करने वाली सीमा हैदर को कौन नहीं जानता। सीमा हैदर का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो मेंउसके चेहरे पर चोटों के निशान नजर आ रहे हैं। तस्वीरों को देखकर ऐसा लग रहा है कि उसे किसी ने बुरी तरह पीटा है। हालांकि स्थानीय पुलिस सीमा हैदर के साथ ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर रही है। पुलिस ने भी सीमा से संपर्क किया, जिसमें उसने वायरल वीडियो को फेक करार दिया है। वीडियों में नजर आ रहा है कि सीमा की आंखें सूजी हुई हैं और चेहरे पर उदासी है। इस बात को लेकर जब स्थानीय पुलिस द्वारा सीमा हैदर से बातचीत की गई तो पता चला कि सीमा हैदर का वायरल वीडियो फेक है। सीमा हैदर द्वारा यह बताया गया कि उनके साथ किसी के द्वारा कोई मारपीट नहीं की गई है। वहीं इस सब के बीच सीमा हैदर के पाकिस्तानी पूर्व पति गुलाम हैदर का बयान भी सामने आया है। उसने कहा है कि वह जल्द भारत आएगा और अपने बच्चों को लेकर जाएगा। गुलाम ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा है कि सीमा के साथ लगातार मारपीट हो रही है और उसके वहां तंग किया जा रहा है।
साल का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण क्यों है खास, भारत में इस समय दिखेगा ग्रहण
दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण आज यानी सोमवार को लगने जा रहा है। खगोलविद और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को इस दिन का काफी दिनों से इंतजार था। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भाग, पश्चिमी यूरोप पेसिफिक, अटलांटिक, आर्कटिक मेक्सिको, कनाडा, इंग्लैंड के उत्तर पश्चिम क्षेत्र और आयरलैंड में नजर आएगा। ग्रहण के दौरान उत्तरी अटलांटिक से इलाके में कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाएगा।
आपको बता दें कि जब चंद्रमा अपने पथ पर चलते हुए सूर्य और पृथ्वी की सीध में पहुंच जाता है, तो सूर्य ग्रहण लगता है। ग्रहण के दौरान सूर्य को चंद्रमा ढक लेता है और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी धरती पर पहुंचनी बंद हो जाती है। इसकी वजह से धरती पर दिन में अंधेरा छा जाता है। यह घना सूर्योदय और सूर्यास्त की तरह होती है। इस दौरान अंतरिक्ष में सात मिनट से अधिक समय तक अंधेरा रहेगा। यह साल का पहला और 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण होगा। इसके साथ ही यह पूर्ण सूर्य ग्रहण बेहद खास होगा। सबसे खास बात यह है कि इस ग्रहण के दौरान सौर मंडल के कई ग्रह और धूमकेतु को नंगी आंखों से देखा जा सकता है। 50 साल बाद इतना लंबा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तरफ से इस सूर्य ग्रहण के लिए खास तैयारी की गई है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया है कि सूर्य ग्रहण का पॉथ ऑफ टौटलिटी 181 किमी चौड़ी होगी। इसकी शुरुआत मेक्सिको से होगी और अमेरिकी के 15 राज्यों से होते हुए कनाडा तक पहुंचेगी। इस इलाके में रहने वाले लोग नंगी आंखों से पूर्ण सूर्य ग्रहण को देख सकते हैं। हालांकि खगोलविज्ञानिकों ने सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से न देखने की सलाह दी है, क्योंकि इससे आंखों को नुकसान हो सकता है।
भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण
सदी का सबसे लंबा पर्ण सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस ग्रहण के समय सूर्य उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की सीध में होगा और भारत में उस समय रात हो होगी। हालांकि, भारत में रहने वाले लोग आनलाइन स्ट्रीमिंग के जरिए सूर्य ग्रहण को देख सकते हैं।
देश की पहली किन्नर महामंडलेश्वर वाराणसी से लड़ेंगी चुनाव, PM मोदी पर क्यों नाराज़ हैं महामंडलेश्वर
देश में होने जा रहे लोकसभा चुनाव में महज कुछ ही दिन बचे हैं इसी बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी लोकसभा सीट पर देश की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हेमांगी सखी चुनावी मैदान में उतरने जा रही हैं। बता दें कि अखिल भारत हिंदू महासभा ने हेमांगी सखी को बनारस से टिकट दिया है। बताया जा रहा है कि वह 12 अप्रैल को बनारस पहुंचेंगी और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेकर अपने चुनाव प्रचार की शुरूआत करेंगी।
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में चुनावी ताल ठोकने वाली महामंडलेश्वर हेमांगी सखी कहा कहना है कि पूरे देश में किन्नर समाज की स्थिति बहुत ही दयनीय है। किन्नर समाज के लिए एक भी सीट आरक्षित नहीं की गई है। किन्नर समाज अपनी बात लोकसभा और विधानसभा में कैसे रखेगा? किन्नर समाज का नेतृत्व कौन करेगा? किन्नर समाज की भलाई के लिए मैंने धर्म से राजनीति की ओर रुख किया है। हेमांगी सखी ने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में नहीं हैं, उन्होंने भी धर्म का काम किया है। हमारा प्रयास सिर्फ इतना ही है कि हमारी बात सरकार के कानों तक पहुंचे। इसीलिए वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
अर्द्धनारीश्वर को भूल गई है सरकार
महामंडलेश्वर ने कहा कि सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया है। हम इसकी सराहना करते हैं, बेटियां जगतजननी का स्वरूप हैं लेकिन सरकार अर्द्धनारीश्वर को भूल गई। यह नारा हम भी सुनना चाहते हैं, वह दिन कब आएगा? केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर पोर्टल जारी कर दिया लेकिन क्या किन्नरों को इसके बारे में पता है। जो सड़क पर भीख मांग रहे हैं, उनको पता ही नहीं है कि उनके लिए कोई पोर्टल भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने पोर्टल जारी किया तो प्रचार क्यों नहीं किया ? किन्रर बोर्ड बनाने से कुछ नहीं होता है। सरकार को किन्नर समाज के लिए सीट आरक्षित करनी पड़ेगी, तब जाकर स्थितियां बदलेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने पोर्टल जारी किया तो प्रचार क्यों नहीं किया ? किन्रर बोर्ड बनाने से कुछ नहीं होता है। सरकार को किन्नर समाज के लिए सीट आरक्षित करनी पड़ेगी, तब जाकर स्थितियां बदलेंगी।
उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए नाराजगी भी जताई और कहा कि आज BJP ने किन्नरों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे होते तो शायद महामंडलेश्वर हेमांगी सखी को यह कदम नहीं उठाना पड़ता। हिंदू महासभा ने किन्नरों को मुख्य धारा में लाने के लिए, अपनी बात समाज के सामने रखने के लिए मुझे प्रत्याशी घोषित किया है। यह पहल देश की हर पार्टी को करनी होगी।
सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। कल यानी 9 अप्रैल मंगलवा से नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी। नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा का विधान है। नवरात्रि का त्योहार पूरे भारत में खुब धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार में हम 9 दिनों तक शक्ति, देवी, दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं इसको दसवां दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। हम सभी नवरात्रि के अवसर पर, मां दुर्गा की प्रतिमाएं को स्थापित करते हैं। इस त्यौहार से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो काफी लोग नहीं जानते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं।
नवरात्रि में हम शक्ति के 9 रूपों को कैसे कर सकते हैं प्रसन्न
पहले दिन हम देवी शैलपुत्री की पूजा करते हैं, मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं। वह वृषभ की सवारी करती हैं. वह दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प धारण करती हैं। मान्यता है कि इनके पूजन से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इनकी उपासना चंद्रमा के बुरे प्रभाव को दूर करती है। मां शैलपुत्री को श्वेत वस्त्र अतिप्रिय है। इनको प्रसन्न करने के लिए लाल, श्वेत सहित ऋतु पुष्प जैसे कनेर के फूल. साथ ही मां के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व है. इनके अलावा धूप, दीप, अक्षत, फल आदि से माता को प्रसन्न किया जा सकता है।
Maa Shailputri
दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी माँ की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण दी गई है। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं। जिससे मां प्रसन्न होती हैं।
Brahmacharini
नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन चंद्रघंटा के विग्रह की पूजा-अर्चना की जाती है।। इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है। लोकवेद के अनुसार माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं। माँ चंद्रघंटा का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। मां चन्द्रघंटा को नारंगी रंग प्रिय है, तो भक्त को जहां तक संभव हो, पुजन के समय सूर्य के चमक के समान रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए।
Chandragantha
नवरात्रि उपासना के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘अनाहत’ चक्र में अवस्थित होता है। इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और शांत मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-अर्चना करना चाहिए। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। माना जाता है कि ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। जानकार बताते हैं कि इस दिन जहाँ तक संभव हो बड़े माथे वाली तेजस्वी विवाहित महिला का पूजन करना चाहिए। उन्हें भोजन में दही, हलवा खिलाना लाभकारी होता है। इसके बाद फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान भेंट करना चाहिए।
Kushmanda
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। इनके बारे में कहा जाता है कि ये अपने भक्तों के लिए मोक्ष के द्वार खोल देती हैं। स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह (शेर) है।
Skandmata
नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है जिससे दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका पूजा-अर्चना गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए।
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥” मान्यता है कि जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हे इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।
Katyayni
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी – काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री , धूम्रवर्णा कालरात्रि मां के अन्य प्रसिद्ध नामों में से हैं। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें बाहर आती रहती हैं।
Kalratri
नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की उपासना का विधान है। महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। यही महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई थी। अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी प्रत्येक दिन की तरह देवी की पंचोपचार सहित पूजा करते हैं।
Mahagauri
माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।